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Dry Eye Syndrome: स्क्रीन नहीं देखते फिर भी आंखों में ड्राइनेस से हैं परेशान, कहीं ये तो नहीं असली वजह

Dry Eye Syndrome: आजकल कई लोगों को आंखों में सूखेपन की परेशान होती है. कुछ लोगों को यह समस्या कम्प्यूटर के सामने स्क्रीन पर ज्यादा वक्त बिताने पर होती है तो कुछ लोगों को बिना स्क्रीन टाइम के भी इससे जूझना पड़ता है. जानते हैं इसका कारण.

Written By: Pushpendra Trivedi
Last Updated: March 12, 2026 12:50:45 IST

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Dry Eye Syndrome: बिना स्क्रीन टाइम के भी कुछ लोगों की आंखें ड्राई क्यों लगती हैं? आजकल बहुत से लोग आंखों में जलन, सूखापन या किरकिरापन की शिकायत करते हैं. इसके लिए अक्सर मोबाइल या लैपटॉप स्क्रीन को दोषी ठहराया जाता है. हालांकि, आंखों के डॉक्टरों का कहना है कि कई मरीज क्लिनिक जा रहे हैं, भले ही वे रेगुलर स्क्रीन का इस्तेमाल न करते हों, फिर भी उनकी आंखें ड्राई और थकी हुई महसूस होती हैं.

इससे यह सवाल उठता है कि यह समस्या क्यों बढ़ रही है? इसके बारे में सह्याद्री अस्पताल के नेत्र विशेषज्ञ डॉ. विश्वेश अग्रवाल इसके बारे में जानकारी दे रहे हैं. चलिए जानते हैं.

यह समस्या क्यों होती है?

डॉ. विश्वेश अग्रवाल यूट्यूब चैनल पर बताते हैं कि दरअसल, हमारी आंखों की सतह पर एक पतली परत होती है जिसे टियर फिल्म कहते हैं. यह परत आंखों को नम और आरामदायक रखती है. जब यह बैलेंस बिगड़ता है तो सूखापन, खुजली या जलन जैसी समस्याएं होने लगती हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि लाइफस्टाइल की कई आदतें धीरे-धीरे इस बैलेंस पर असर डालती हैं.

भारत में कितने लोग इस समस्या से परेशान हैं?

इंडियन जर्नल ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी में छपी एक स्टडी के मुताबिक, उत्तर भारत में लगभग 32 प्रतिशत लोग ड्राई आईज़ से परेशान हैं. रिसर्चर्स का मानना ​​है कि इसमें माहौल, उम्र और रोजमर्रा की लाइफस्टाइल का बड़ा रोल होता है. ड्राई आई सिंड्रोम दुनिया भर में आंखों की एक आम समस्या बन गई है. यह कंडीशन तब होती है जब आंखें काफी आंसू नहीं बनातीं या जो आंसू बनाती हैं वे जल्दी सूख जाते हैं. आंसू सिर्फ़ पानी नहीं होते; उनमें तेल, म्यूकस और कुछ प्रोटीन भी होते हैं जो आंखों को इंफेक्शन से बचाते हैं. यह उन्हें लुब्रिकेट रखते हैं. जब यह मिक्सचर इम्बैलेंस हो जाता है, तो आंखों में जलन और असहजता महसूस होने लगती है.

इसके क्या कारण हैं?

शहरों में बढ़ता पॉल्यूशन और एयर कंडीशनर का ज्यादा इस्तेमाल भी आंखों पर असर डालता है. एयर कंडीशनिंग हवा में नमी कम कर देती है, जिससे आंसू जल्दी सूख जाते हैं. धूल और पॉल्यूशन से भी आंखों में जलन बढ़ सकती है. एक और जरूरी वजह है पलकें न झपकाना. जब हम किसी काम पर बहुत ज्यादा ध्यान लगाते हैं, जैसे पढ़ना, लिखना, या लंबी दूरी तक गाड़ी चलाना तो हमारी पलकें झपकने की रफ़्तार धीमी हो जाती है. इससे टियर फिल्म आंखों की सतह पर ठीक से फैल नहीं पाती, जिससे सूखापन होता है. एलर्जी से भी कभी-कभी आंखों में जलन और खुजली हो सकती है. पॉलन, धूल, फफूंद या पालतू जानवरों के बाल जैसी चीजें आंखों के आस-पास की नाज़ुक स्किन में जलन पैदा कर सकती हैं.

आप इसे कैसे रोक सकते हैं?

डॉक्टर के अनुसार, डिहाइड्रेशन, नींद की कमी या विटामिन A, D, और ओमेगा-3 जैसे न्यूट्रिएंट्स की कमी से भी सूखापन बढ़ सकता है. इसलिए, एक्सपर्ट्स खूब पानी पीने, समय-समय पर अपनी आंखों को आराम देने और जरूरत पड़ने पर आंखों की जांच करवाने की सलाह देते हैं. छोटी-छोटी आदतों को बदलकर आप लंबे समय तक अपनी आंखों को हेल्दी रख सकते हैं.

डिस्क्लेमर – यह लेख कई स्त्रोतों से लिया गया है. यह सिर्फ सामान्य जानकारी के लिए है. पाठकों से अनुरोध है कि वे एक्सपर्ट की सलाह ले. इंडिया न्यूज डॉट इन तथ्यों की पुष्टि नहीं करता है.

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Dry Eye Syndrome: बिना स्क्रीन टाइम के भी कुछ लोगों की आंखें ड्राई क्यों लगती हैं? आजकल बहुत से लोग आंखों में जलन, सूखापन या किरकिरापन की शिकायत करते हैं. इसके लिए अक्सर मोबाइल या लैपटॉप स्क्रीन को दोषी ठहराया जाता है. हालांकि, आंखों के डॉक्टरों का कहना है कि कई मरीज क्लिनिक जा रहे हैं, भले ही वे रेगुलर स्क्रीन का इस्तेमाल न करते हों, फिर भी उनकी आंखें ड्राई और थकी हुई महसूस होती हैं.

इससे यह सवाल उठता है कि यह समस्या क्यों बढ़ रही है? इसके बारे में सह्याद्री अस्पताल के नेत्र विशेषज्ञ डॉ. विश्वेश अग्रवाल इसके बारे में जानकारी दे रहे हैं. चलिए जानते हैं.

यह समस्या क्यों होती है?

डॉ. विश्वेश अग्रवाल यूट्यूब चैनल पर बताते हैं कि दरअसल, हमारी आंखों की सतह पर एक पतली परत होती है जिसे टियर फिल्म कहते हैं. यह परत आंखों को नम और आरामदायक रखती है. जब यह बैलेंस बिगड़ता है तो सूखापन, खुजली या जलन जैसी समस्याएं होने लगती हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि लाइफस्टाइल की कई आदतें धीरे-धीरे इस बैलेंस पर असर डालती हैं.

भारत में कितने लोग इस समस्या से परेशान हैं?

इंडियन जर्नल ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी में छपी एक स्टडी के मुताबिक, उत्तर भारत में लगभग 32 प्रतिशत लोग ड्राई आईज़ से परेशान हैं. रिसर्चर्स का मानना ​​है कि इसमें माहौल, उम्र और रोजमर्रा की लाइफस्टाइल का बड़ा रोल होता है. ड्राई आई सिंड्रोम दुनिया भर में आंखों की एक आम समस्या बन गई है. यह कंडीशन तब होती है जब आंखें काफी आंसू नहीं बनातीं या जो आंसू बनाती हैं वे जल्दी सूख जाते हैं. आंसू सिर्फ़ पानी नहीं होते; उनमें तेल, म्यूकस और कुछ प्रोटीन भी होते हैं जो आंखों को इंफेक्शन से बचाते हैं. यह उन्हें लुब्रिकेट रखते हैं. जब यह मिक्सचर इम्बैलेंस हो जाता है, तो आंखों में जलन और असहजता महसूस होने लगती है.

इसके क्या कारण हैं?

शहरों में बढ़ता पॉल्यूशन और एयर कंडीशनर का ज्यादा इस्तेमाल भी आंखों पर असर डालता है. एयर कंडीशनिंग हवा में नमी कम कर देती है, जिससे आंसू जल्दी सूख जाते हैं. धूल और पॉल्यूशन से भी आंखों में जलन बढ़ सकती है. एक और जरूरी वजह है पलकें न झपकाना. जब हम किसी काम पर बहुत ज्यादा ध्यान लगाते हैं, जैसे पढ़ना, लिखना, या लंबी दूरी तक गाड़ी चलाना तो हमारी पलकें झपकने की रफ़्तार धीमी हो जाती है. इससे टियर फिल्म आंखों की सतह पर ठीक से फैल नहीं पाती, जिससे सूखापन होता है. एलर्जी से भी कभी-कभी आंखों में जलन और खुजली हो सकती है. पॉलन, धूल, फफूंद या पालतू जानवरों के बाल जैसी चीजें आंखों के आस-पास की नाज़ुक स्किन में जलन पैदा कर सकती हैं.

आप इसे कैसे रोक सकते हैं?

डॉक्टर के अनुसार, डिहाइड्रेशन, नींद की कमी या विटामिन A, D, और ओमेगा-3 जैसे न्यूट्रिएंट्स की कमी से भी सूखापन बढ़ सकता है. इसलिए, एक्सपर्ट्स खूब पानी पीने, समय-समय पर अपनी आंखों को आराम देने और जरूरत पड़ने पर आंखों की जांच करवाने की सलाह देते हैं. छोटी-छोटी आदतों को बदलकर आप लंबे समय तक अपनी आंखों को हेल्दी रख सकते हैं.

डिस्क्लेमर – यह लेख कई स्त्रोतों से लिया गया है. यह सिर्फ सामान्य जानकारी के लिए है. पाठकों से अनुरोध है कि वे एक्सपर्ट की सलाह ले. इंडिया न्यूज डॉट इन तथ्यों की पुष्टि नहीं करता है.

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