Traffic Cameras Hacked: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई शनिवार को अमेरिका-इजराइल के संयुक्त अभियान के तहत हुए हवाई हमले में मार दिए गए. दुनिया के लिए यह एक अप्रत्याशित बहुत बड़ा हमला था. लेकिन वास्तव में यह एक सुनियोजित इजराइल-अमेरिकी खुफिया प्लानिंग का हिस्सा था. जिस पर कथित तौर पर लंबे समय से काम किया जा रहा था. इस प्लान के तहत, तेहरान के सभी ट्रैफिक कैमरों को कथित तौर पर कई सालों से हैक किया जा रहा था.
CCTV पहली बार हैक नहीं हुए
हालांकि ऐसा पहली बार नहीं है कि सुरक्षा के लिए लगाए गए सीसीटीवी कैमरों का इस्तेमाल युद्ध में हुआ है. बताया जाता है कि 2023 में अचानक हमलों से पहले हमास ने निजी कैमरों को हैक किया था. यूक्रेन पर हमले के बाद रूस ने भी वहां के ट्रैफिक और सड़क पर लगे कैमरों का इस्तेमाल मिसाइल हमलों की योजना बनाने के लिए किया था.
क्या शहरों के कैमरे सुरक्षित हैं?
मिडिल ईस्ट में पहले से जारी तनाव के बीच यह घटनाक्रम नई तरह की जंग की ओर इशारा करती दिखाई दे रही है. अगर किसी शहर का इंफ्रास्ट्रक्चर ही निगरानी का माध्यम बन जाए, तो यह साइबर वॉरफेयर की गंभीरता को दर्शाता है. इस रिपोर्ट ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. जैसे- क्या शहरों के कैमरे पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं. क्या मोबाइल नेटवर्क अभेद्य हैं, आदि.
हैकिंग कैसे होती है?
हैकिंग दो तरह से होती है. इसमें लोकल और रिमोट दोनों शामिल है. लोकल हैकिंग तब होती है, जब कोई आपके घर या आपके नेटवर्क के करीब पहुंच जाता है. रिमोट हैकिंग ज्यादा नॉर्मल है. हैकर्स, कैमरों की कमजोरियों का फायदा उठा सकते हैं. अगर आप अपने ऑनलाइन अकाउंट्स के लिए सेम पासवर्ड यूज करते हैं, तो एक अकाउंट के हैक होने पर हैकर आपके घर के कैमरों तक पहुंच सकता है.