Heart Health Alert: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में दिल से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं, और इसकी एक बड़ी वजह है हमारी शाम की लाइफस्टाइल. हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, शाम 7 बजे के बाद की कुछ साधारण आदते लेकिन खतरनाक आदतें हार्ट अटैक के लिए जोखिम को बढ़ा सकती हैं. यही वह बेहतरीन समय होता है जब हृदय धीरे-धीरे अपनी रिकवरी का काम शुरू करता है. ब्लड प्रेशर कम हो जाता है, हृदय गति स्थिर होती है, और शरीर रिपेयर मोड में आ जाता है.
एक्सपर्ट के मुताबिक, शाम 7 बजे के बाद शरीर धीरे-धीरे सर्कैडियन रिकवरी स्टेज में चला जाता है, जब ब्लड प्रेशर, हार्ट बीट और चयापचय गतिविधि धीमी होने लगती है. इस रिद्दम में गड़बड़ी से हृदय प्रणाली पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है. हालांकि, असली समस्या यह नहीं है कि आप दिन में क्या करते हैं, बल्कि यह है कि जब आपके शरीर के आराम करने का समय होता है तब आप क्या करते रहते हैं.
ओवर इटिंग से बचें
अक्सर आपने देखा होगा कि रात का खाना अक्सर दिन का सबसे भारी भोजन होता है. यहीं से समस्या शुरू होती है. रात में देर से अधिक कैलोरी वाला भोजन करने से पाचन तंत्र पर ज्यादा दबाव पड़ता है. जबकि वह आराम करने का समय होता है. इससे पाचन क्रिया में ब्लड फ्लो बढ़ जाता है. और हृदय को अधिक जोर से धड़कना पड़ता है. साथ ही रात के समय ब्लड प्रेशर का संतुलन बिगड़ जाता है.
कॉफी का सेवन
कैफीन का सेवन तंत्रिका तंत्र को उत्तेजित करता है. यह आपके हृदय गति को बढ़ाता है और नींद के चक्र में बाधा डाल सकता है. खराब नींद का सीधा संबंध हृदय संबंधी बीमारियों और हाई बीपी के बढ़ते जोखिम से है.
अल्कोहल का सेवन
एक गिलास शराब का सेवन आपको रिलैक्स करता है और आमतौर पर यह कहते हैं कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है. लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है. एक्सपर्ट के मुताबिक, नियमित रूप से देर शाम को शराब पीना हृदय गति को बिगाड़ सकता है, बीपी बढ़ा सकता है और नींद की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. यह दीर्घकालिक रूप से हार्ट हेल्थ को नुकसान पहुंचाता है. रात को नियमित रूप से शराब पीना से हृदय रोग और स्ट्रोक के खतरा को बढ़ता है.
लेट नाइट स्नैक्स खाना
किसी भी व्यक्ति को देर रात तक जागने से भूख लगती है. और लोग अक्सर चिप्स, मिठाई या प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों जैसे अनहेल्दी विकल्पों का सेवन करते हैं. एक्सपर्ट के मुताबिक, चीनी और अनहेल्दी फैट का अधिक सेवन कोलेस्ट्रॉल लेवल को बढ़ा सकता है और समय के साथ हृदय प्रणाली पर दबाव डाल सकता है.
सोने से पहले ज्यादा स्क्रीन टाइम
आपको फोन स्क्रॉल करना या लगातार मूवी या शो देखना भले ही अच्छा लगता हो. लेकिन नीली रोशनी के संपर्क में आने से मेलाटोनिन का उत्पादन कम हो जाता है. इससे न केवल नींद में देरी होती है और शरीर सतर्क अवस्था में रहता है, बल्कि हृदय गति भी सामान्य हो जाती है.