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Late Pregnancy: 60 वर्षीय महिला बनी मां, 2.8 किलो के बच्चे को दिया जन्म, डॉक्टर भी हुए हैरान

Late Pregnancy: क्रोनिक हाइपरटेंशन और जेस्टेशनल डायबिटीज से जूझ रही 60 साल की महिला ने सेंट्रल ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी हॉस्पिटल में 2.8 किलोग्राम के हेल्दी बच्चे को जन्म दिया है.

Written By: Vipul Tiwary
Last Updated: March 22, 2026 15:32:54 IST

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Late Pregnancy: क्रोनिक हाइपरटेंशन और जेस्टेशनल डायबिटीज जैसी जटिल स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही 60 वर्षीय महिला ने एक अनोखी मिसाल पेश की है. सेंट्रल ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी हॉस्पिटल में डॉक्टरों की निगरानी में सीजेरियन सेक्शन के जरिए उन्होंने 2.8 किलोग्राम के हेल्दी बच्चे को जन्म दिया है. महिला की उम्र की वजह से यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है. गर्भवती महिला को गर्भावस्था के 38.2 सप्ताह में अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उसकी सामान्य स्थिति अस्थायी रूप से स्थिर थी, लेकिन कई जोखिम कारक भी थे. इलाज के तहत हाी बीपी, दैनिक इंसुलिन नियंत्रण की आवश्यकता वाली जेस्टेसनल डाइबिटीज और स्त्री रोग संबंधी सर्जरी का इतिहास था, जिसमें एक्टोपिक गर्भावस्था भी है.

आश्वासन और भरोसे से बढ़ी मरीज की सहजता

सर्जरी टीम के एक प्रतिनिधि ने बताया कि सर्जरी से पहले, मां का ब्ल्ड प्रेशर125/80 mmHg, नाड़ी दर 85 धड़कन/मिनट थी और इंसुलिन द्वारा ब्लड शुगर कंटोल हो रहा था. सर्जरी के दौरान, केंद्रीय प्रसूति एवं स्त्रीरोग अस्पताल के निदेशक, प्रोफेसर-डॉक्टर गुयेन डुई अन्ह ने अपने पेशेवर कार्य पर गहन ध्यान देने के साथ-साथ लगातार मां से बात की और उन्हें तनाव कम करने के लिए प्रोत्साहित किया. यह उन्हें आश्वस्त करने और उन्हें अधिक सहज महसूस कराने का एक तरीका भी था.

2.8 किलोग्राम का नवजात

शिशु का जन्म बीते 20 मार्च को हुआ. उसका वजन 2.8 किलोग्राम था, वह जोर-जोर से रो रहा था और उसके रिएक्शन अच्छे थे. प्रोफेसर आन्ह ने गर्भनाल को देर से काटा, जो एनीमिया को रोकने और नवजात शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाने के लिए एक मेडिकल प्रोसेस है.

हाई-रिस्क कैटेगरी में रही पूरी गर्भावस्था

केंद्रीय प्रसूति एवं स्त्रीरोग अस्पताल के मुताबिक, हाई-रिस्क के कारण यह गर्भावस्था अत्यंत जोखिम भरी श्रेणी में आती है. 60 वर्ष की उम्र में गर्भावस्था हृदय और अंतःस्रावी तंत्र पर गंभीर दबाव डालती है. प्रत्येक संकेतक को सुरक्षित सीमा के भीतर रखना आवश्यक है, और हर घटना एक अप्रत्याशित मोड़ पर आ सकती है.

सर्जरी के दौरान ब्लड शुगर असंतुलन का जोखिम

हृदय संबंधी समस्याएं, हाई बीपी के कारण स्ट्रोक, सर्जरी के दौरान और बाद में ब्लड शुगर संबंधी विकार, गर्भाशय के कमजोर संकुचन के कारण प्रसवोत्तर रक्तस्राव, संक्रमण या धीमी रिकवरी जैसे जोखिम मौजूद रहते हैं. इस गर्भवती महिला के लिए, पहले की दो सर्जरी के इतिहास ने ऑपरेशन के दौरान आसंजन, ऊतक क्षति और रक्तस्राव के जोखिम को बढ़ा दिया था, जिसके लिए प्रक्रिया के दौरान सजग रहना था.

रेयर केस में मां और बच्चे दोनों की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती

डॉक्टरों के मुताब, ऐसे रेयर मामलों में सफलता केवल हेल्दी बच्चे तक नहीं होता बल्कि मां की निरंतर निगरानी और ऑपरेशन के बाद की रिकवरी भी चैलेंजिंग होता है. ज्यादा उम्र में गर्भवती महिलाओं को विशेष चिकित्सा सुविधाओं में ही इलाज की जरूरत होती है.

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Last Updated: March 22, 2026 15:32:54 IST

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Late Pregnancy: क्रोनिक हाइपरटेंशन और जेस्टेशनल डायबिटीज जैसी जटिल स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही 60 वर्षीय महिला ने एक अनोखी मिसाल पेश की है. सेंट्रल ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी हॉस्पिटल में डॉक्टरों की निगरानी में सीजेरियन सेक्शन के जरिए उन्होंने 2.8 किलोग्राम के हेल्दी बच्चे को जन्म दिया है. महिला की उम्र की वजह से यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है. गर्भवती महिला को गर्भावस्था के 38.2 सप्ताह में अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उसकी सामान्य स्थिति अस्थायी रूप से स्थिर थी, लेकिन कई जोखिम कारक भी थे. इलाज के तहत हाी बीपी, दैनिक इंसुलिन नियंत्रण की आवश्यकता वाली जेस्टेसनल डाइबिटीज और स्त्री रोग संबंधी सर्जरी का इतिहास था, जिसमें एक्टोपिक गर्भावस्था भी है.

आश्वासन और भरोसे से बढ़ी मरीज की सहजता

सर्जरी टीम के एक प्रतिनिधि ने बताया कि सर्जरी से पहले, मां का ब्ल्ड प्रेशर125/80 mmHg, नाड़ी दर 85 धड़कन/मिनट थी और इंसुलिन द्वारा ब्लड शुगर कंटोल हो रहा था. सर्जरी के दौरान, केंद्रीय प्रसूति एवं स्त्रीरोग अस्पताल के निदेशक, प्रोफेसर-डॉक्टर गुयेन डुई अन्ह ने अपने पेशेवर कार्य पर गहन ध्यान देने के साथ-साथ लगातार मां से बात की और उन्हें तनाव कम करने के लिए प्रोत्साहित किया. यह उन्हें आश्वस्त करने और उन्हें अधिक सहज महसूस कराने का एक तरीका भी था.

2.8 किलोग्राम का नवजात

शिशु का जन्म बीते 20 मार्च को हुआ. उसका वजन 2.8 किलोग्राम था, वह जोर-जोर से रो रहा था और उसके रिएक्शन अच्छे थे. प्रोफेसर आन्ह ने गर्भनाल को देर से काटा, जो एनीमिया को रोकने और नवजात शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाने के लिए एक मेडिकल प्रोसेस है.

हाई-रिस्क कैटेगरी में रही पूरी गर्भावस्था

केंद्रीय प्रसूति एवं स्त्रीरोग अस्पताल के मुताबिक, हाई-रिस्क के कारण यह गर्भावस्था अत्यंत जोखिम भरी श्रेणी में आती है. 60 वर्ष की उम्र में गर्भावस्था हृदय और अंतःस्रावी तंत्र पर गंभीर दबाव डालती है. प्रत्येक संकेतक को सुरक्षित सीमा के भीतर रखना आवश्यक है, और हर घटना एक अप्रत्याशित मोड़ पर आ सकती है.

सर्जरी के दौरान ब्लड शुगर असंतुलन का जोखिम

हृदय संबंधी समस्याएं, हाई बीपी के कारण स्ट्रोक, सर्जरी के दौरान और बाद में ब्लड शुगर संबंधी विकार, गर्भाशय के कमजोर संकुचन के कारण प्रसवोत्तर रक्तस्राव, संक्रमण या धीमी रिकवरी जैसे जोखिम मौजूद रहते हैं. इस गर्भवती महिला के लिए, पहले की दो सर्जरी के इतिहास ने ऑपरेशन के दौरान आसंजन, ऊतक क्षति और रक्तस्राव के जोखिम को बढ़ा दिया था, जिसके लिए प्रक्रिया के दौरान सजग रहना था.

रेयर केस में मां और बच्चे दोनों की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती

डॉक्टरों के मुताब, ऐसे रेयर मामलों में सफलता केवल हेल्दी बच्चे तक नहीं होता बल्कि मां की निरंतर निगरानी और ऑपरेशन के बाद की रिकवरी भी चैलेंजिंग होता है. ज्यादा उम्र में गर्भवती महिलाओं को विशेष चिकित्सा सुविधाओं में ही इलाज की जरूरत होती है.

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