Mysterious Bhairav Temple: यहां मांगी हुई हर मुराद पूरी, 52 समुदायों का एक साथ इक्ट्ठा होना, आखिर क्या है इस मंदिर का रहस्या, जानें सबकुछ.
Mysterious Bhairav Temple
Mysterious Bhairav Temple: जम्मू-कश्मीरके देवभूमी में मौजूद एक प्राचीन भैरव मंदिर, जो न सिर्फ एक धार्मिक स्थल है बल्कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक समससता और पुरानी परंपरा एक अद्भुत प्रतीक भी है. यह जम्मू के अपर बाजार चौक चबूतरा क्षेत्र में स्थित है. इसे आस्था का एक मुख्य केंद्र माना जाता है. इस मंदिर की सबसे खास बात, जो आज के समय में भी लोगों को आकर्षित करती है, वह है यहां 5्2 अलग-अलग समुदायों का एक साथ जुटना और मंदिर के पूजा-अर्चना और परंपरागत अनुष्ठानों में हिस्सा लेना.
आस्था का मुख्य केंद्र माना जाने वाला इस मंदिर में, यह मान्यता है कि यहां भगवान भैरव से सच्चे मन से मांगी गई मुराद जरूर पूरी होती है. मान्यता के अनुसार भगवान भैरव, भगवान विष्णु के उग्र रूप है, जिन्हें भगवान शिव का पांचवा अवतार माना जाता है. इस मंदिर के निर्माण से जुड़ी की पौराणिक कथाएं प्रचलित है. यहां के एक महंत पुजारी के मुताबिक, वहां के बुजुर्गों का कहना है कि करीब 200 साल पहले महाराजा गुलाब सिंह ने अपने महलों के निर्माण से पहले बाबा भैरव की पूजा-अर्चना की थी. इसके बाद बिना किसी बाधा के इन महलों का निर्माण बहुत ही अच्छे से हुआ.
दूसरी कथा के अनुसार, मंदिर के स्थान के पास महल निर्माण के दौरान मजदूरों ने अनजाने में भगवान भैरव की पिंडी को मलबे के साथ हटाकर वहां तालाब के किनारे फेंक दिया था. तब भवन निर्माण करने वाले व्यक्ति के स्वप्न में भगवान भैरव ने दर्शन दिए थे और पिंडी को पुनः उसी स्थान पर स्थापित करने का आदेश दिया था. फिर वैसा ही किया गया और आगे किसी से गलती न हो इसके लिए मंदिर का निर्माण किया गया.
इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां हर साल 52 समुदायों का मेला भी लगता है. इसका मुख्य कारण है कि भगवान भैरव नाथ यहां के लगभग 52 समुदायों के कुल देवता हैं. इन समुदायों का मेला हर साल मंदिर के प्रांगण में आयोजित किया जाता है. जिसमें से ज्यादा समुदायों का भारत-पाक विभाजन के दौरान विस्थापन हुआ था. यहां भैरव अष्टमी के शुभ अवसर पर मंदिर और शहर के बाजारों में उत्सव का महौल रहता है. पंडालों की सजावट होती है, भजन कीर्तन किया जाता है. यहां मौजूद समुदायों में सासन, सूदन, दत्त, शूद्र, आनंद, खुबखर सहित कुल 52 समुदाय अपनी-अपनी पारंपरिक भूमिका निभाते हैं.
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