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क्या आप भी खाना खाते समय देखते हैं मोबाइल या टीवी? जानें प्रेमानंद महाराज इसे सही मानते हैं या गलत

Premanand Maharaj on Mobile While Eating: प्रेमानंद महाराज ने भोजन करते समय मोबाइल और टीवी देखने की आदत को लेकर अपने विचार साझा किए हैं. उनके अनुसार, भोजन के समय व्यक्ति का मन शांत और ग्रहणशील होता है, इसलिए उस दौरान नकारात्मक बातें, तनाव और अशांत करने वाली चीजों से बचकर भगवान का स्मरण और सकारात्मक भाव रखना चाहिए.

Premanand Maharaj on Mobile While Eating: मथुरा-वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज इन दिनों देश ही नहीं, विदेशों में भी काफी लोकप्रिय हैं. उनके प्रवचनों और जीवन से जुड़े विचारों को सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं. आम लोगों के अलावा कई चर्चित अभिनेता, नेता और अन्य जानी-मानी हस्तियां भी उनसे आशीर्वाद लेने पहुंचती हैं. प्रेमानंद महाराज अपने प्रवचनों में अक्सर रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े ऐसे विषयों पर बात करते हैं, जिनका सीधा संबंध व्यक्ति के व्यवहार, सोच और जीवनशैली से होता है. इसी क्रम में उनका एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में है, जिसमें उन्होंने भोजन करने के दौरान मोबाइल और टीवी देखने को लेकर अपनी बात रखी है. उन्होंने भोजन को केवल शरीर की भूख मिटाने वाला माध्यम नहीं बताया, बल्कि इसे मन और संस्कारों से भी जोड़कर समझाया है. उनके मुताबिक, भोजन करते समय व्यक्ति का मन जिस तरह के विचारों और वातावरण के संपर्क में रहता है, उसका प्रभाव उसके स्वभाव पर भी पड़ सकता है.

भोजन के समय मन की स्थिति क्यों है महत्वपूर्ण?

प्रेमानंद महाराज के अनुसार, हम जो अन्न खाते हैं, उसका असर सिर्फ हमारे शरीर तक सीमित नहीं रहता. भोजन हमारे मन और संस्कारों को भी प्रभावित करता है. यही वजह है कि शास्त्रों और संतों की वाणी में भोजन के समय अच्छे विचार रखने, पवित्र नाम का स्मरण करने और सकारात्मक भाव बनाए रखने की बात कही गई है. उनका कहना है कि अगर कोई व्यक्ति भोजन करते समय गलत बातें सुनता है, अनुचित दृश्य देखता है या उसके मन में नकारात्मक विचार चल रहे होते हैं, तो उसका असर उसके स्वभाव पर पड़ सकता है. इसके विपरीत अगर भोजन के दौरान वातावरण शांत हो, भगवान का स्मरण किया जाए और मन में अच्छे भाव रखे जाएं तो व्यक्ति के भीतर शांति और सकारात्मकता बनी रह सकती है. यानी भोजन के दौरान सिर्फ यह मायने नहीं रखता कि थाली में क्या है, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण माना जाता है कि उस समय हमारा मन किस स्थिति में है.

खाना खाते समय मन क्यों रहता है ज्यादा ग्रहणशील?

प्रेमानंद महाराज ने भोजन के समय मन की स्थिति को बेहद महत्वपूर्ण बताया है. उनके अनुसार, जब व्यक्ति भोजन कर रहा होता है, तब उसका मन कोमल और ग्रहणशील होता है. ऐसे में आसपास का वातावरण और उस समय चल रहे विचार मन पर प्रभाव डाल सकते हैं. अगर कोई व्यक्ति भोजन के समय गुस्से, निंदा, ईर्ष्या, अशुद्ध बातों या तनाव से घिरा हुआ है, तो उसका मन भी उसी तरह प्रभावित हो सकता है. वहीं, यदि भोजन के समय भगवान का नाम लिया जाए, कीर्तन सुना जाए, जयकारा लगाया जाए या किसी पवित्र विषय पर चर्चा की जाए तो मन को शांति मिल सकती है. इसी वजह से कई संत-मंडलियों और धार्मिक परंपराओं में भोजन से पहले तथा भोजन के दौरान नाम-स्मरण करने की परंपरा देखने को मिलती है. इसका उद्देश्य भोजन को सिर्फ शारीरिक आवश्यकता न मानकर उसे सकारात्मक और आध्यात्मिक भाव से जोड़ना है.

शास्त्रों में भी भोजन के समय प्रभु स्मरण की बात

प्रेमानंद महाराज ने अपनी बात को धार्मिक परंपराओं से जोड़ते हुए कहा कि शास्त्रों में भी भोजन करते समय प्रभु का स्मरण करने की बात कही गई है. उनके अनुसार, व्यक्ति को भोजन शुरू करने से पहले अपने आराध्य देव का स्मरण करना चाहिए और फिर भगवान का नाम लेते हुए भोजन करना चाहिए. कई लोग भोजन और पानी को प्रभु का प्रसाद मानकर ग्रहण करते हैं. भोजन करते समय उनके मन में यह भाव रहता है कि जो अन्न और जल उन्हें मिला है, वह ईश्वर की कृपा है. इस तरह भोजन उनके लिए केवल शरीर को पोषण देने का साधन नहीं रहता, बल्कि आत्मिक शांति और भक्ति से जुड़ा अभ्यास भी बन जाता है. उनके अनुसार, भोजन के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता का भाव व्यक्ति की सोच को भी सकारात्मक दिशा दे सकता है.

मोबाइल और टीवी को लेकर क्या बोले प्रेमानंद महाराज?

आज के समय में मोबाइल फोन हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. कई लोगों की आदत होती है कि वे खाना खाते समय मोबाइल पर वीडियो देखते हैं, सोशल मीडिया चलाते हैं या टीवी पर मनोरंजन से जुड़े कार्यक्रम देखते रहते हैं. कुछ लोग भोजन के दौरान लगातार बातचीत या दूसरी गतिविधियों में भी व्यस्त रहते हैं. प्रेमानंद महाराज के अनुसार, भोजन के समय इस तरह मनोरंजन में व्यस्त रहने के बजाय व्यक्ति को अपने भोजन और मन पर ध्यान देना चाहिए. उनका कहना है कि भोजन करते समय मोबाइल पर अनावश्यक चीजें देखना, टीवी पर गलत या अशांत करने वाली सामग्री सुनना अथवा इधर-उधर की बातों में मन लगाना उचित नहीं है.

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