SC on Jantar Mantar Protest: जंतर मंतर पर छात्र प्रदर्शन और पुलिस एक्शन की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अगुवाई में 5 सदस्यीय कमेटी गठित की, अगली सुनवाई 10 सितंबर को.
जंतर मंतर पर छात्र प्रदर्शन और पुलिस एक्शन की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 5 सदस्यीय कमेटी गठित की
सुप्रीम कोर्ट ने 20 जुलाई को जंतर मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन और उसके बाद हुई पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच के लिए 5 सदस्यीय समिति का गठन किया है. इस समिति की अगुवाई सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी करेंगे. यह कमेटी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस, पैरामिलिट्री फोर्स और अन्य सुरक्षा बलों द्वारा कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए अत्यधिक बल की जांच करेगी. मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर 2026 को तय की गई है.
18 अगस्त 2026 (मंगलवार) को सुप्रीम कोर्ट ने इस उच्चस्तरीय तथ्य-अन्वेषण (फैक्टर-फाइंडिंग) समिति के गठन का फैसला लिया था.
इससे पहले हुई सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा था कि देश में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार सभी को है. केवल प्रदर्शन होने के आधार पर लाठीचार्ज को सही नहीं ठहराया जा सकता. अदालत ने साफ कहा, “जो भी इसके लिए जिम्मेदार है, उसके लिए कोई बहाना या तर्क स्वीकार नहीं किया जाएगा. इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इसके अंजाम तक पहुंचाया जाएगा.”
हालांकि, चीफ जस्टिस ने यह भी स्पष्ट किया कि फेस रिकग्निशन टेक्नोलॉजी (चेहरा पहचानने वाली तकनीक), निगरानी और निजता से जुड़े बड़े संवैधानिक सवालों पर फैसला अदालत खुद करेगी, न कि यह जांच समिति.
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