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UCSF की नई खोज: बुढ़ापे में भी याददाश्त दुरुस्त रखने का आसान तरीका, शोध में खुलासा

Research: व्यायाम न सिर्फ शरीर बल्कि यह दिमाग के लिए भी फायदेमंद होता है, शोध बताते हैं कि यह मस्तिष्क की सुरक्षा बढ़ाकर याददाश्त में सुधार करता है. साथ ही यह आपके संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा होता है.

Written By: Vipul Tiwary
Last Updated: February 24, 2026 12:05:27 IST

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व्यायाम से आपके स्वास्थ्य को कई तरह से लाभ पहुंचता है. यह मांसपेशियों की ताकत बनाए रखता है, हृदय को हेल्दी रखता है, शरीर का स्वस्थ वजन बनाए रखता है और मधुमेह जैसी दीर्घकालिक बीमारियों से भी बचाता है. इसके साथ साथ व्यायाम दिमाग के लिए भी अच्छा होता है. आइए जानते हैं यह कैसे काम करता है. यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, सैन फ्रांसिस्को (UCSF) के रिसर्च करने वालों ने एक ऐसी जैविक प्रक्रिया की खोज की है, जो बताती है कि व्यायाम मस्तिष्क की सुरक्षात्मक दीवार को रिपेयर करके याददाश्त को बढ़ा सकता है.

हानिकारक तत्वों से सुरक्षा की ढाल

हमारे दिमाग में ब्लड वेसल्स का एक कठीन जाल होता है जिसे ‘ब्लड-ब्रैन बैरियर’ कहा जाता हैं. यह कवच शरीर के हानिकारक पदार्थों को मस्तिष्क के ऊतकों में जाने से रोकता है. लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, यह दीवार समय के साथ कमजोर और ‘लीकी’  होने लगती है. ब्लड के हानिकारक तत्व दिमाग में पहुंचने लगते हैं, जिससे सूजन की समस्या होती है और अल्जाइमर जैसी बीमारियां आपके शरीर में जन्म लेने लगती है. 

व्यायाम से लिवर और दिमाग दोनों होंगे फायदेमंद

शोधकर्ताओं ने पाया है कि जब हम व्यायाम करते हैं, तो हमारा लिवर एक खास एंजाइम रिलीज करता है, जिसको GPLD1 कहा जाता है. चौंकाने वाली बात यह है कि यह एंजाइम खुद दिमाग के अंदर नहीं जा सकता, फिर भी यह दिमाग को जवान बनाए रखने में कारगर साबित होता है. 

दिमाग की सुरक्षा में योगदान देने वाले एंजाइम

वैज्ञानिकों ने पाया कि जैसे जासे आपकी उम्र बढ़ती है, मस्तिष्क की सुरक्षा दीवार पर TNAP नामक एक हानिकारक प्रोटीन जमा होने लगता है, जो इसे जमने के साथ कमजोर बनाता है. फिजिकल एक्टिविटी के दौरान लिवर से निकलने वाला GPLD1 एंजाइम ब्लड के जरिए मस्तिष्क की बाहरी वाहिकाओं तक पहुंचता है. यह एंजाइम वहां जमा हानिकारक TNAP प्रोटीन को हटा देता है. जिसकी वजह से मस्तिष्क की सुरक्षा दीवार फिर से मजबूत हो जाती है और सूजन कम हो जाती है. इसके अलावा रिसर्च में यह भी पाया गया कि वृद्ध चूहों जो इंसानी उम्र के 70 साल के बराबर थे, जब उनमें इस तंत्र को सक्रिय किया गया, तो उनकी याददाश्त में जबरदस्त सुधार देखने को मिला. डॉ. शाऊल विलेडा के मुताबिक, यह रिसर्च अल्जाइमर के उपचार के लिए नई संभावनाएं लाती है.

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Written By: Vipul Tiwary
Last Updated: February 24, 2026 12:05:27 IST

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