62 साल की महिला के पेट में मिला बाल का गुच्छा, हुआ ऐसा चौंकाने वाला खुलासा, जान डॉक्टर भी रह गए हैरान

Ajab Gajab News: आगरा में एक ऐसा अजीबो-गरीब मामला सामने आया है, जिसने लोगों के साथ- साथ डॉक्टरों को भी हक्का- बक्का कर दिया.

Hairball Found in Stomach: बचपन में अक्सर बच्चों को चॉक, मिट्टी खाने की आदत होती है, लेकिन क्या आपने पहले कभी यह सुना हैं कि किसी को बाल खाने की आदत हो. जी हां सही सुना आपने आगरा से एक ऐसा ही अजीबो- गरीब मामला सामने आया है, जिसने डॉक्टरों को भी हक्क- बक्का कर दिया. यहां एक 62 साल की महिला तेज पेट दर्द और लगातार उल्टियों की शिकायत लेकर नवदीप हॉस्पिटल पहुंची. लेकिन जब डॉक्टरों ने उसकी जांच की, तो जो देखा उसने सभी को हैरान कर दिया महिला के पेट में बालों का बड़ा गुच्छा फंसा हुआ था.

50 साल की अजीब आदत ने बढ़ाई मुश्किलें

जांच के दौरान महिला ने खुद एक चौंकाने वाला खुलासा किया. वह पिछले 50 साल से अपने ही सिर के बाल तोड़कर खा रही थी. यह आदत बचपन में शुरू हुई थी और धीरे-धीरे यह उसकी लत बन गई. इस वजह से उसके पेट में बाल जमा हो गए, जिससे खाने का पाचन बंद हो गया और उसे लगातार पेट दर्द और उल्टियों की समस्या होने लगी.

34 साल पहले भी हुआ था ऐसा ही ऑपरेशन

डॉ. सुनील शर्मा, वरिष्ठ लेप्रोस्कोपिक सर्जन, ने बताया कि महिला ने पहले भी इसी तरह का ऑपरेशन 34 साल पहले करवाया था. उस समय भी पेट से बालों का गुच्छा निकाला गया था. इस बार महिला की हालत गंभीर थी क्योंकि बालों का बड़ा गुच्छा पाचन तंत्र को ब्लॉक कर रहा था. डॉक्टरों ने सावधानीपूर्वक ऑपरेशन किया और सफलतापूर्वक बालों का गुच्छा पेट से निकाल दिया। फिलहाल महिला की स्थिति स्थिर है.

क्या है इस बीमारी का नाम?

इस मामले के बारे में डॉक्टर ने विस्तार से बताया कि महिला को ट्राइकोफैगिया नामक बीमारी थी. यह बीमारी मानसिक रूप से जुड़ी होती है. पहले व्यक्ति अपने बालों को बार-बार तोड़ता है, जिसे ट्राइकोटिलोमेनिया कहा जाता है. यदि टूटे बाल खाने की आदत भी जुड़ जाए, तो इसे ट्राइकोफैगिया कहा जाता है. बाल पचने योग्य नहीं होते और धीरे-धीरे पेट और आंतों में जमा होकर हेयर बॉल बना लेते हैं. यह हेयर बॉल पाचन तंत्र को ब्लॉक कर देता है, जिससे गंभीर पेट दर्द और उल्टियां होने लगती हैं.

बच्चों और किशोरों में भी दिख सकते हैं लक्षण

डॉक्टर ने चेतावनी दी कि यह समस्या केवल वयस्कों तक सीमित नहीं है. बच्चों और किशोरों में भी यह आदत देखने को मिल सकती है. यदि समय रहते पहचान कर उचित काउंसलिंग और दवाओं से इलाज शुरू किया जाए, तो इस मानसिक आदत को रोका जा सकता है और पेट में गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है.

Shristi S

Shristi S has been working in India News as Content Writer since August 2025, She's Working ITV Network Since 1 year first as internship and after completing intership Shristi Joined Inkhabar Haryana of ITV Group on November 2024.

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