Khatu Shyam Dog Video: राजस्थान के सीकर स्थित श्री खाटू श्याम जी मंदिर में फाल्गुन मेले के दौरान ‘डॉगेश भाई’ नाम से चर्चित एक कुत्ता जयपुर के जोबनेर से करीब 60 किलोमीटर पैदल चलकर खाटूधाम पहुंचा. लंबी पदयात्रा में उसके पैरों में घाव हो गए, लेकिन श्रद्धालुओं ने रास्ते में उसकी सेवा की और वह बाबा श्याम के जयकारों के बीच सफर पूरा करता रहा.
60 किलोमीटर की पैदल यात्रा और फिर‘डॉगेश भाई’ को मिला VIP दर्शन.
Viral Dog Khatu Shyam: राजस्थान के सीकर जिले में स्थित प्रसिद्ध तीर्थ स्थल ‘श्री खाटू श्याम जी मंदिर’ इन दिनों फाल्गुन मेले की रौनक से जगमगा रहा है. इसी बीच एक ऐसी घटना सामने आई जिसने लाखों भक्तों का दिल छू लिया. जयपुर के जोबनेर से करीब 60 किलोमीटर की पदयात्रा कर एक कुत्ता खाटूधाम पहुंचा और बाद में उसे मंदिर में विशेष वीआईपी दर्शन भी कराए गए. श्रद्धालुओं ने उसे प्यार से नाम दिया‘डॉगेश भाई’.
यह कुत्ता जोबनेर से निकली श्याम भक्तों की पदयात्रा के साथ-साथ चल पड़ा. शुरुआत में लोगों ने इसे साधारण आवारा जानवर समझकर हटाने की कोशिश की, लेकिन वह पीछे मुड़ने को तैयार ही नहीं था. बाबा श्याम के जयकारों के बीच वह लगातार आगे बढ़ता रहा.लंबे सफर के दौरान उसके पैरों में घाव और छाले पड़ गए. यह देखकर यात्रियों ने रास्ते में रुककर उसके पैरों पर दवाई लगाई, पट्टियां बांधीं और उसकी देखभाल की. दर्द के बावजूद उसने यात्रा अधूरी नहीं छोड़ी. धीरे-धीरे सोशल मीडिया पर उसकी तस्वीरें और वीडियो वायरल होने लगे और वह ‘सेलिब्रिटी भक्त’ बन गया.
जब ‘डॉगेश भाई’ खाटू पहुंचा और अन्य श्रद्धालुओं की तरह कतार में लगकर दर्शन करने की कोशिश की, तो सुरक्षा कर्मियों ने उसे बाहर कर दिया. इस घटना का वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई. कई भक्तों ने सवाल उठाए कि इतनी दूर से आए इस मूक प्राणी को दर्शन से क्यों रोका गया.
मामला मंदिर प्रबंधन तक पहुंचा तो स्थिति बदल गई. बताया गया कि समिति के पदाधिकारी के निर्देश पर उसे दोबारा सम्मानपूर्वक मंदिर लाया गया. उसे साफ-सुथरा कर मर्यादा के साथ अंदर ले जाया गया और गर्भगृह के निकट विशेष दर्शन कराए गए. पुजारियों ने उसके गले में फूलों की माला डाली और बाबा की मोर छड़ी से आशीर्वाद दिया.यह दृश्य देखकर मौजूद श्रद्धालु भावुक हो उठे. मंदिर परिसर “जय श्री श्याम” के जयकारों से गूंज उठा.
VIP दर्शन का वीडियो इंटरनेट पर तेजी से फैल गया. कई लोगों ने इसे भक्ति और करुणा का अनूठा उदाहरण बताया.दर्शन के बाद ‘डॉगेश भाई’ अपने साथ आए श्रद्धालुओं के साथ जोबनेर लौट गया. इस पूरी घटना ने यह संदेश दिया कि समर्पण और आस्था किसी एक प्रजाति तक सीमित नहीं होती.खाटूधाम के इतिहास में यह घटना एक अलग ही अध्याय के रूप में याद की जा रही है,जहां एक बेजुबान की लगन ने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया.
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