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एक चूजे के लिए जेड प्लस सुरक्षा! 50 जवान, 24 घंटे पहरा और पूरे इलाके में नो एंट्री; आखिर क्या है माजरा?

Great Indian Bustard: कच्छ के रेगिस्तान में 10 साल बाद गूंजी नन्हीं किलकारी! इस दुर्लभ चूजे को बचाने के लिए 50 जवान दिन-रात तैनात हैं. उम्मीद और सुरक्षा की यह अद्भुत कहानी जरूर पढ़ें.

Written By: Shivani Singh
Last Updated: 2026-04-01 18:36:33

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गोडावण पक्षी: रेगिस्तान की तपती रेत और सन्नाटे के बीच एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरे देश का दिल जीत लिया है. गुजरात के कच्छ में एक नन्हे से चूजे की सुरक्षा के लिए 50 जवानों की फौज तैनात की गई है. आप सोच रहे होंगे कि एक छोटे से पक्षी के लिए इतनी कड़ी सुरक्षा क्यों है? दरअसल, यह कोई साधारण पक्षी नहीं है बल्कि ‘गोडावण’ का बच्चा है ये एक ऐसा प्रजाति है जो आज दुनिया से खत्म होने की कगार पर है.

10 साल का लंबा इंतजार हुआ खत्म

आपको बता दें कि इस चूजे का जन्म 26 मार्च 2026 को हुआ है. यह तारीख इसलिए खास है क्योंकि गुजरात में पूरे 10 साल के लंबे इंतजार के बाद किसी गोडावण ने प्राकृतिक रूप से जन्म लिया है. वन विभाग के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं है, क्योंकि इस प्रजाति की संख्या अब उंगलियों पर गिनने लायक रह गई है.

परिंदा भी पर न मार सके, ऐसी है सुरक्षा

वन विभाग ने इस नन्हीं जान को बचाने के लिए सुरक्षा का ऐसा घेरा तैयार किया है कि दुश्मन तो क्या, कोई अनजान परिंदा भी पास न फटक सके. इस चूजे की सुरक्षा में 50 से ज्यादा जवान तीन अलग-अलग शिफ्टों में दिन-रात इसकी निगरानी कर रहे हैं. बाइनोक्युलर्स और स्पॉटिंग स्कोप के जरिए दूर से ही हर हरकत पर नजर रखी जा रही है. पूरे इलाके को नो-मेंस लैंड घोषित कर दिया गया है, ताकि इंसानी दखल से इस चूजे को कोई खतरा न हो.

यह सुरक्षा क्यों है जरूरी?

ग्रेट इंडियन बस्टर्ड यानी गोडावण भारत के सबसे भारी उड़ने वाले पक्षियों में से एक है. शिकार, बिजली के तारों और घटते आवास के कारण इनकी संख्या बहुत तेजी से कम हुई है. ऐसे में कच्छ में जन्मे इस पहले बच्चे को बचाना अब सिर्फ वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक मिशन बन गया है. इसलिए इतनी कड़ी सुरक्षा लगाई गई है.

कहते हैं कि प्रकृति अपनी रक्षा खुद करना जानती है, लेकिन जब कोई प्रजाति खत्म होने वाली हो तो इंसान को उसका ढाल बनना पड़ता है. कच्छ के ये 50 जवान सिर्फ एक पक्षी को नहीं बल्कि प्रकृति के एक अनमोल विरासत को बचाने की कोशिश में हैं. उम्मीद है कि यह नन्हा गोडावण सुरक्षित बड़ा होगा और आसमान की ऊंचाइयों को नापेगा।

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Last Updated: 2026-04-01 18:36:33

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गोडावण पक्षी: रेगिस्तान की तपती रेत और सन्नाटे के बीच एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरे देश का दिल जीत लिया है. गुजरात के कच्छ में एक नन्हे से चूजे की सुरक्षा के लिए 50 जवानों की फौज तैनात की गई है. आप सोच रहे होंगे कि एक छोटे से पक्षी के लिए इतनी कड़ी सुरक्षा क्यों है? दरअसल, यह कोई साधारण पक्षी नहीं है बल्कि ‘गोडावण’ का बच्चा है ये एक ऐसा प्रजाति है जो आज दुनिया से खत्म होने की कगार पर है.

10 साल का लंबा इंतजार हुआ खत्म

आपको बता दें कि इस चूजे का जन्म 26 मार्च 2026 को हुआ है. यह तारीख इसलिए खास है क्योंकि गुजरात में पूरे 10 साल के लंबे इंतजार के बाद किसी गोडावण ने प्राकृतिक रूप से जन्म लिया है. वन विभाग के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं है, क्योंकि इस प्रजाति की संख्या अब उंगलियों पर गिनने लायक रह गई है.

परिंदा भी पर न मार सके, ऐसी है सुरक्षा

वन विभाग ने इस नन्हीं जान को बचाने के लिए सुरक्षा का ऐसा घेरा तैयार किया है कि दुश्मन तो क्या, कोई अनजान परिंदा भी पास न फटक सके. इस चूजे की सुरक्षा में 50 से ज्यादा जवान तीन अलग-अलग शिफ्टों में दिन-रात इसकी निगरानी कर रहे हैं. बाइनोक्युलर्स और स्पॉटिंग स्कोप के जरिए दूर से ही हर हरकत पर नजर रखी जा रही है. पूरे इलाके को नो-मेंस लैंड घोषित कर दिया गया है, ताकि इंसानी दखल से इस चूजे को कोई खतरा न हो.

यह सुरक्षा क्यों है जरूरी?

ग्रेट इंडियन बस्टर्ड यानी गोडावण भारत के सबसे भारी उड़ने वाले पक्षियों में से एक है. शिकार, बिजली के तारों और घटते आवास के कारण इनकी संख्या बहुत तेजी से कम हुई है. ऐसे में कच्छ में जन्मे इस पहले बच्चे को बचाना अब सिर्फ वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक मिशन बन गया है. इसलिए इतनी कड़ी सुरक्षा लगाई गई है.

कहते हैं कि प्रकृति अपनी रक्षा खुद करना जानती है, लेकिन जब कोई प्रजाति खत्म होने वाली हो तो इंसान को उसका ढाल बनना पड़ता है. कच्छ के ये 50 जवान सिर्फ एक पक्षी को नहीं बल्कि प्रकृति के एक अनमोल विरासत को बचाने की कोशिश में हैं. उम्मीद है कि यह नन्हा गोडावण सुरक्षित बड़ा होगा और आसमान की ऊंचाइयों को नापेगा।

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