Viral News: कई बार लोगों के मन में प्रश्न होता है कि क्या मछलियां पानी में डूबती हैं. यह सवाल लगभग अजीब लगता है. आखिरकार, मछलियां तैरने के लिए ही पैदा होती हैं. फिर भी विज्ञान एक चौंकाने वाली सच्चाई बताता है.
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Viral News: पानी में रहने वाले जीवों को देखकर इंसान सोचते हैं कि आखिर वे कैसे जीवन यापन करती होंगी. खासकर जब बात मछलियों की आती है तो कई बार लोगों के मन में प्रश्न होता है कि क्या मछलियां पानी में डूबती नहीं. यह सवाल लगभग अजीब लगता है. आखिरकार, मछलियां तैरने के लिए ही पैदा होती हैं. फिर भी विज्ञान एक चौंकाने वाली सच्चाई बताता है. मछलियाँ सच में ‘डूब’ सकती हैं, हालांकि उस तरह से नहीं जैसे इंसान डूबते हैं. तो फिर कैसे, चलिए जानते हैं.
अगर इंसान पानी में डूबता है तो उनके फेफड़ों में पानी भर जाता है. मछलियां पानी में घुली ऑक्सीजन पर निर्भर करती हैं. अपने नाजुक गलफड़ों के ज़रिए वे पानी के गुज़रने पर ऑक्सीजन निकालती हैं. इस प्रक्रिया को काउंटरकरंट एक्सचेंज कहा जाता है. लेकिन जब यह बहाव रुक जाता है, तो पानी के अंदर भी ज़िंदगी जानलेवा हो सकती है. मछलियाँ तब ‘डूबती हैं’ जब वे पानी से पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं निकाल पातीं. ऐसा तब होता है जब पानी ठहरा हुआ हो और उसमें घुली ऑक्सीजन कम हो या अगर गलफड़े ठीक से काम करना बंद कर दें. पानी में घुली ऑक्सीजन पहले से ही कम होती है. हवा में मौजूद ऑक्सीजन का लगभग 1% और गर्म पानी में यह और भी कम हो जाती है.
पर्यावरणीय कारक जो मछलियों का दम घुटने का कारण बनते हैं. कई पर्यावरणीय स्थितियां मछलियों को ऑक्सीजन से वंचित कर सकती हैं. इनमें पहला समुद्री हीटवेव है. गर्म पानी में कम ऑक्सीजन होती है, जिससे बड़े पैमाने पर मछलियों की मौत होती है. इसके बाद शैवाल का बढ़ना भी एक कारण है. ज़्यादा शैवाल उपलब्ध ऑक्सीजन का इस्तेमाल कर लेते हैं, जिससे मछलियों का दम घुट जाता है और वे मर जाती हैं. वहीं, प्रदूषित पानी भी प्रदूषक गलफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं या ऑक्सीजन की मात्रा कम कर देते हैं. एक्वेरियम या तालाबों में जहां एरिएटर (ऑक्सीजन पंप) नहीं होते, मछलियाँ अक्सर सतह पर हांफती हैं लेकिन आखिरकार थककर मर जाती हैं. अगर मछलियों के गलफड़े खराब हो जाएं, तो भी उनका दम घुट सकता है. उदाहरण के लिए जब उन्हें गलत तरीके से खींचा या पकड़ा जाता है. बिना काम करने वाले गलफड़ों के ऑक्सीजन खून में प्रवेश नहीं कर पाती, जिससे मौत हो जाती है.
वैज्ञानिकों ने पानी में दम घुटने से मरने वाली मछलियों के 300 से ज़्यादा मामलों को दर्ज किया है. डिस्कवर वाइल्डलाइफ, लाइव साइंस और मियामी विश्वविद्यालय की रिपोर्ट पुष्टि करती हैं कि “मछलियाँ डूब सकती हैं, लेकिन इसलिए नहीं कि उनमें पानी भर जाता है, बल्कि वे इसलिए मरती हैं क्योंकि उन्हें पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती.” सरल शब्दों में कहें तो जब लोग कहते हैं कि मछलियाँ डूब गईं, तो उनका मतलब ऑक्सीजन की कमी से दम घुटना होता है. न कि फेफड़ों में पानी भरना. चाहे प्रदूषित आवासों, ठहरे हुए पानी या खराब गलफड़ों के कारण हो, मछलियां जीने के लिए पूरी तरह से ऑक्सीजन से भरपूर पानी पर निर्भर करती हैं. इसके बिना प्रकृति के सबसे बेहतरीन तैराकों का भी चुपचाप दम घुट सकता है.
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