Optical Illusion: यह ऑप्टिकल इल्यूजन 1880 के दशक की एक पुरानी तस्वीर है, जिसमें पहली नजर में सिर्फ एक भालू दिखाई देता है. लेकिन ध्यान से देखने पर उसी तस्वीर में एक आदमी का चेहरा भी छिपा हुआ है. बच्चों के लिए इसे एक विज्ञापन चैलेंज के रूप में बनाया गया था, जहां उन्हें छिपे चेहरे को ढूंढना होता था.
सामने दिख रहे भालू की तस्वीर में छिपे शिकारी को 20 सेकंड में खोजिए
Bear Master Illusion: ऑप्टिकल इल्यूजन यानी ऐसी तस्वीरें जो हमारे दिमाग और आंखों को भ्रम में डाल देती हैं. इंटरनेट पर ऐसी तस्वीरें बहुत वायरल होती हैं क्योंकि ये दिखाती हैं कि हमारा दिमाग रंग, परछाई और आकृतियों को कैसे अलग-अलग तरीके से समझता है. कुछ इल्यूजन आपके व्यक्तित्व को टेस्ट करते हैं, तो कुछ आपकी नजर की तेजी को परखते हैं.
यह खास तस्वीर 1880 के दशक की है. उस समय इसे बच्चों को आकर्षित करने के लिए एक विज्ञापन के रूप में बनाया गया था. बच्चों को चुनौती दी जाती थी कि वे भालू की तस्वीर में छिपे एक आदमी का चेहरा ढूंढें. जो इसे ढूंढ लेता, उसे इनाम मिलता था. आज भी यह तस्वीर लोगों को उलझा रही है. एक ऑनलाइन वर्जन में हजारों लोग इसे हल करने की कोशिश कर चुके हैं, लेकिन कई बड़े लोग इसमें असफल रहे हैं, जबकि बच्चे इसे जल्दी पकड़ लेते थे.
पहली नजर में यह एक काले-सफेद रंग की साधारण भालू की स्केच लगती है. भालू के कान खड़े हैं, आंखें सामने की ओर हैं और पूरा शरीर रेखाओं से बना हुआ दिखता है. लेकिन अगर आप ध्यान से देखें, खासकर भालू की आंखों और उसके बाएं कान (आपकी दाईं तरफ) के बीच, तो वहां एक आदमी का चेहरा छिपा हुआ है.अगर आप थोड़ा सिर दाईं तरफ झुकाकर देखें तो आदमी की नाक, होंठ और ठोड़ी साफ नजर आने लगते हैं. ऐसा लगता है जैसे वह आदमी भालू की गर्दन की तरफ देख रहा हो. उसकी आकृति भालू की फर वाली रेखाओं में इस तरह छिपाई गई है कि पहली बार में समझ ही नहीं आता.
इस इल्यूजन की सबसे खास बात यही है कि बड़े लोग अक्सर इसे जल्दी नहीं ढूंढ पाते. इसका कारण है कि हमारा दिमाग पहले पूरी आकृति को एक 'भालू' के रूप में पहचान लेता है. हम सीधी और साफ दिखने वाली चीज को प्राथमिकता देते हैं. सूक्ष्म रेखाएं और छिपी आकृतियां नजरअंदाज हो जाती हैं.यह तस्वीर Gestalt सिद्धांत पर काम करती है, जिसमें हमारा दिमाग अलग-अलग रेखाओं को जोड़कर एक पूरी आकृति बना देता है. जब कोई साफ किनारा या सीमा नहीं दिखती, तो दिमाग जानवर की आकृति को पहले पहचानता है, इंसानी चेहरे को नहीं. बच्चे अक्सर ज्यादा सरल तरीके से सोचते हैं, इसलिए वे छिपी हुई आकृति को जल्दी पकड़ लेते हैं. बड़े लोग ज्यादा सोचने लगते हैं और उलझ जाते हैं.
अगर आपने 20 सेकंड के अंदर आदमी का चेहरा देख लिया, तो आपकी नजर और अवलोकन क्षमता काफी तेज है. अगर नहीं देख पाए तो भी चिंता की बात नहीं है. ऑप्टिकल इल्यूजन हमारी बुद्धि का टेस्ट नहीं, बल्कि हमारी सोचने और देखने की शैली को दिखाते हैं.अगली बार जब कोई ऐसी तस्वीर सामने आए, तो याद रखिए - कभी-कभी हमारा दिमाग ही हमें भ्रमित कर देता है. थोड़ी देर ठहरकर, अलग एंगल से देखने पर सच सामने आ जाता है.

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