Aizawl Silent City: यह है भारत की साइलेंट सिटी, न ट्रैफिक न शोर, सुकून की जिंदगी
Aizawl Silent City: छुट्टियों पर जाने वाले लोग अक्सर शांत माहौल की तलाश में रहते हैं. लेकिन, शहरों में घंटों तक लगने वाला ट्रैफिक जाम और सड़कों पर बजने वाले हॉर्न का शोर अक्सर छुट्टियों का मज़ा किरकिरा कर देता है. दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में ट्रैफिक की हालत तो और भी ज़्यादा खराब है. अगर आप किसी शांत जगह पर घूमने जाना चाहते हैं, तो भारत की साइलेंट सिटी आइजोल आपके लिए एकदम सही जगह है. यह मिजोरम की राजधानी है. बड़े शहरों के मुकाबले आइजोल में न तो ज्यादा ट्रैफिक जाम होता है और न ही लोगों में एक-दूसरे से आगे निकलने की कोई होड़ मची रहती है. सड़कों पर गाड़ियों से होने वाला शोर भी यहां बहुत कम होता है. यह शहर इतना शांत है कि यहां आने वाला कोई भी व्यक्ति आसानी से आराम कर सकता है और अपने थके हुए मन को सुकून दे सकता है. आइए इस शांत शहर (Silent City) के बारे में और जानें.
आइजोल को कहते हैं साइलेंट सिटी
आइजोल को भारत का एकमात्र शांत शहर यानी साइलेंट सिटी होने का गौरव प्राप्त है. इसका मतलब यह नहीं है कि यहां के लोग आपस में बात नहीं करते बल्कि यह शहर अपने बेहतरीन ट्रैफिक नियमों के लिए मशहूर है. यहां का ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम हर आने वाले सैलानी पर एक गहरी छाप छोड़ जाता है. भारी ट्रैफिक या घंटों जाम में फंसे होने के बावजूद भी यहां के लोग आपस में बहुत ही तहजीब और शिष्टाचार से पेश आते हैं.
खूबसूरत घाटियों का शहर
आइजोल एक बेहद खूबसूरत और प्रदूषण-मुक्त शहर है. यहां किसी भी ऊंची जगह पर खड़े होकर आप घंटों तक आस-पास के नजारों की मनमोहक खूबसूरती को निहारते रह सकते हैं. यह शहर ऊंची-ऊंची पहाड़ियों और गहरी घाटियों के बीच बसा हुआ है और समुद्र तल से 1,132 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. अपनी इन्हीं खूबसूरत घाटियों और पहाड़ी इलाकों की वजह से इस शहर को प्यार से पहाड़ियों पर रहने वालों की धरती (Land of Highlanders) भी कहा जाता है.
नियमों को करते हैं फॉलो
यहां लोग अपनी गाड़ियां एक ही व्यवस्थित लाइन में चलाते हैं. वे एक-दूसरे से आगे निकलने की कोशिश नहीं करते. कोई भी हॉर्न नहीं बजाता. यहां तक कि सबसे ज्यादा ट्रैफिक वाले समय में भी हर कोई एक-दूसरे के प्रति विनम्र और विचारशील बना रहता है. आमतौर पर शहरों में गाड़ियाँ सड़क के बाईं ओर चलती हैं.यही नियम यहां भी लागू होता है. लेकिन, आइजोल के ट्रैफिक सिस्टम में एक ऐसी अनोखी बात है जो इसे दूसरे शहरों से अलग बनाती है.
अच्छा है ट्रैफिक रूल्स
तय की गई लाइनों के अंदर भी दोपहिया और चारपहिया वाहनों के लिए अलग-अलग लाइनें बनी होती हैं. दाईं और बाईं लाइनों को अलग करने के लिए कोई ठोस डिवाइडर नहीं बनाया गया है बल्कि, उन्हें सिर्फ़ एक सफ़ेद रंग की लाइन से अलग किया जाता है. मान लीजिए कोई जल्दी में है और आगे चल रहे वाहन को ओवरटेक करना चाहता है. उसे बस आगे वाले वाहन को सचेत करने के लिए धीरे से हॉर्न बजाना होता है. अगर हालात ठीक हों तो आगे वाला वाहन रास्ता दे देता है और उसे आगे निकलने देता है.
सभ्य और समझदार लोग
यहां का ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम इतना असरदार है कि ट्रैफिक लाइट की कोई ज़रूरत ही महसूस नहीं होती. नतीजतन, इस शहर में आने पर आपको सड़कों पर शायद ही कभी ट्रैफिक लाइट देखने को मिलेंगी. ट्रैफिक सिग्नल न होने के बावजूद भी यहां के लोग सड़कों पर सुरक्षित और सभ्य तरीके से गाड़ी चलाते हैं.
जरूरत हो तभी हॉर्न बजाते हैं लोग
यहां के स्थानीय लोगों का मानना है कि लगातार हॉर्न बजाना और दूसरे वाहनों को आक्रामक तरीके से ओवरटेक करना खराब शिष्टाचार की निशानी है. वे उन लोगों को असभ्य मानते हैं जो ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं करते.
बेहतरीन पर्यटन स्थल
आइजोल में पर्यटकों के लिए घूमने लायक कई जगहें हैं. यहां रहते हुए आप सोलोमन मंदिर, मिजोरम स्टेट म्यूजियम, रीक और बारा बाज़ार घूम सकते हैं. रीक एक छोटा लेकिन बेहद खूबसूरत गांव है जो आइजोल से सिर्फ़ 10 किलोमीटर दूर है. इस गांव की प्राकृतिक सुंदरता दुनिया भर के पर्यटकों को अपनी ओर खींचती है. यही वजह है कि हर साल हजारों पर्यटक इसे देखने के लिए यहां आते हैं.
कैसे पहुंचे आइजोल
आइजोल के लिए कोई सीधी ट्रेन सेवा उपलब्ध नहीं है. रेलगाड़ी से इस शहर तक पहुंचने के लिए आपको सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन सिलचर पर उतरना होगा. वहां से आप टैक्सी या कैब लेकर आइजोल तक का अपना सफर पूरा कर सकते हैं. हवाई जहाज से आइजोल का अपना एक हवाई अड्डा है, जिसे लेंगपुई हवाई अड्डे के नाम से जाना जाता है. आप बड़े शहरों से इस जगह के लिए सीधी उड़ानें ले सकते हैं.