प्रकृति का कमाल: खुद में 1.2 लाख लीटर पानी छुपाए बैठा है ये पेड़, सूखे इलाकों में है वॉटर बैंक
Baobab Tree: आप अपने आसपास रोजाना तमाम पेड़ देखते होंगे. हर पेड़ की अपनी एक अलग पहचान और उसका अलग काम होता है. लगभग पेड़ ऑक्सीजन देने के काम आते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक ऐसा पेड़ भी है, जो पानी देता है. ये पेड़ अपने अंदर 1 लाख लीटर से ज्यादा पानी जमा करता है. इसमें भी हैरानी की बात ये है कि ये पेड़ अफ्रीका के सूखे, तपते और पानी की कमी से जूझते इलाकों में पाया जाता है. वहां के लोग इसे जीवनदाता मानते हैं. हम बात कर रहे हैं बाओबाब पेड़ की. कहा जाता है कि जब वहां आसपास पानी के सारे स्रोत सूख जाते है, तो यही पेड़ अपने अंदर जमा पानी से लोगों की प्यास बुझाता है.
कहां पाए जाते हैं बायोबाब पेड़?
इतना ही नहीं इस पेड़ की लंबी उम्र, मोटे तने और पोषण से भरपूर फल भी इसे दुनिया के सबसे अनोखे पेड़ों में से एक बनाता है. ये पेड़ अधिकतर अफ्रीका, मडागास्कर और ऑस्ट्रेलिया के सूखे इलाकों में पाया जाता है. हालांकि भारत के भी कुछ इलाकों में ये पेड़ पाया जाता है. ये अपने अंदर हजारों लीटर पानी को समेटे रखता है, जिसके कारण ये गर्मियों में भी बिना मुरझाए खड़ा रहता है.
जीवित पानी की टंकी
इसमें भरपूर मात्रा में पानी पाए जाने के कारण इसे जीवित पानी की टंकी भी कहा जाता है. इस पेड़ का वैज्ञानिक नाम Adansonia है. इस पेड़ की कुल नौ प्रजातियां पाई जाती हैं. इनमें से 6 प्रजातियां मडागास्कर में पाई जाती हैं.
हजारों साल पुराना है इतिहास
इस पेड़ का इतिहास 5000 सालों से भी पुराना है. इसे सबसे पुराने जीवित पेड़ों में से एक माना जाता है. इस पेड़ का तना अंदर से स्पंज जैसा होता है. ये बारिश के पानी को सोखता है और उसे अपने अंदर स्टोर करता है. इस पेड़ में 1,20,000 लीटर तक पानी जमा होता है. इसके कारण ये गर्मियों में भी राजस्थान के इलाकों में जीवित और हर-भरा रहता है.
जड़ों जैसी ही दिखती हैं शाखाएं
इसकी एक खास बात ये भी है कि ये पेड़ कई महीनों तक बिना पत्तों के खड़ा रहता है. इसके कारण इस पेड़ को 'उल्टा पेड़' भी कहा जाता है. इसकी शाखाएं देखने में जड़ों जैसी लगती हैं. बाओबाब के फल को मंकी ब्रेड भी कहा जाता है.
पोषक तत्वों से भरपूर है फल
इस फल में विटामिन सी, कैल्शियम, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. इसके कारण इसे सुपरफूड में भी काउंट किया जाता है. इसका स्वाद खट्टा-मीठा होता है. साथ ही इसे कई दवाईयां बनाने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है.
वातावरण को करता है शुद्ध
ये पेड़ कार्बन डाइऑक्साइड सोखकर वातावरण को शुद्ध करता है, साथ ही आसपास के जानवरों और पक्षियों को शरण और भोजन भी देता है. इस पेड़ की जड़ें आसपास की मिट्टी की नमी को बरकरार रखती हैं.