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NCERT Controversy: NCERT की किताब में ‘जजों का भ्रष्टाचार’? सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई हुई पूरी, लिया गया ये बड़ा फैसला!

NCERT विवाद में बड़ा मोड़! अब के.के. वेणुगोपाल और जस्टिस इंदु मल्होत्रा जैसे 3 दिग्गज लिखेंगे बच्चों की किताब. आखिर उस चैप्टर में ऐसा क्या था? पूरी रिपोर्ट ...

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Published: March 20, 2026 19:00:00 IST
Last Updated: 2026-03-20 19:15:18

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NCERT द्वारा प्रकाशित कक्षा 8 की पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका से संबंधित अध्याय को फिर से लिखने के लिए तीन सदस्यों वाली एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है. केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को यह जानकारी दी. शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि तीन सदस्यों वाली एक समिति बनाई गई है. इस समिति में पूर्व अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल, जस्टिस इंदु मल्होत्रा ​​और जस्टिस अनिरुद्ध बोस शामिल हैं.

सरकार ने यह फैसला NCERT की पाठ्यपुस्तक के एक खास हिस्से को लेकर उठे विवाद के बाद लिया जिसमें न्यायपालिका के भीतर भ्रष्टाचार का ज़िक्र किया गया था. समिति के गठन के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपनी ओर से शुरू की गई कार्यवाही को समाप्त कर दिया.

सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर अपनी आपत्ति जताई थी

NCERT ने हाल ही में कक्षा 8 के लिए ‘एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड (भाग-2)’ नाम से एक सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक प्रकाशित की थी. इस किताब में ‘हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ नाम का एक पाठ शामिल था. जिसमें न्यायिक व्यवस्था के बारे में विवादित सामग्री थी. नतीजतन इस अध्याय को लेकर कई हलकों से आपत्तियां उठाई गईं. खुद सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर अपनी आपत्ति जताई थी.

जब सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे का संज्ञान लिया तो NCERT ने अपनी गलती मानी और उस अध्याय को वापस ले लिया. एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए NCERT के निदेशक और परिषद के सदस्यों ने इस अध्याय के कारण पैदा हुई स्थिति के लिए बिना शर्त और पूरी तरह से सार्वजनिक माफी मांगी. अपने बयान में NCERT ने स्पष्ट किया कि विवादित अध्याय वाली पूरी पाठ्यपुस्तक वापस ले ली गई है और अब कहीं भी उपलब्ध नहीं है. परिषद ने इस अध्याय के कारण हुई असुविधा के लिए खेद व्यक्त किया और संबंधित सभी पक्षों द्वारा दिखाई गई समझ की सराहना की.

पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि फिर से लिखे गए अध्याय को तब तक प्रकाशित न किया जाए जब तक कि विशेषज्ञों की एक समिति द्वारा उसकी समीक्षा न कर ली जाए. इसके बाद कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस मामले को देखने के लिए ऐसी ही एक विशेषज्ञ समिति गठित करने का आदेश दिया था. 

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Published: March 20, 2026 19:00:00 IST
Last Updated: 2026-03-20 19:15:18

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NCERT द्वारा प्रकाशित कक्षा 8 की पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका से संबंधित अध्याय को फिर से लिखने के लिए तीन सदस्यों वाली एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है. केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को यह जानकारी दी. शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि तीन सदस्यों वाली एक समिति बनाई गई है. इस समिति में पूर्व अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल, जस्टिस इंदु मल्होत्रा ​​और जस्टिस अनिरुद्ध बोस शामिल हैं.

सरकार ने यह फैसला NCERT की पाठ्यपुस्तक के एक खास हिस्से को लेकर उठे विवाद के बाद लिया जिसमें न्यायपालिका के भीतर भ्रष्टाचार का ज़िक्र किया गया था. समिति के गठन के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपनी ओर से शुरू की गई कार्यवाही को समाप्त कर दिया.

सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर अपनी आपत्ति जताई थी

NCERT ने हाल ही में कक्षा 8 के लिए ‘एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड (भाग-2)’ नाम से एक सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक प्रकाशित की थी. इस किताब में ‘हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ नाम का एक पाठ शामिल था. जिसमें न्यायिक व्यवस्था के बारे में विवादित सामग्री थी. नतीजतन इस अध्याय को लेकर कई हलकों से आपत्तियां उठाई गईं. खुद सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर अपनी आपत्ति जताई थी.

जब सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे का संज्ञान लिया तो NCERT ने अपनी गलती मानी और उस अध्याय को वापस ले लिया. एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए NCERT के निदेशक और परिषद के सदस्यों ने इस अध्याय के कारण पैदा हुई स्थिति के लिए बिना शर्त और पूरी तरह से सार्वजनिक माफी मांगी. अपने बयान में NCERT ने स्पष्ट किया कि विवादित अध्याय वाली पूरी पाठ्यपुस्तक वापस ले ली गई है और अब कहीं भी उपलब्ध नहीं है. परिषद ने इस अध्याय के कारण हुई असुविधा के लिए खेद व्यक्त किया और संबंधित सभी पक्षों द्वारा दिखाई गई समझ की सराहना की.

पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि फिर से लिखे गए अध्याय को तब तक प्रकाशित न किया जाए जब तक कि विशेषज्ञों की एक समिति द्वारा उसकी समीक्षा न कर ली जाए. इसके बाद कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस मामले को देखने के लिए ऐसी ही एक विशेषज्ञ समिति गठित करने का आदेश दिया था. 

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