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1937 में अपनी पहली बैठक से लेकर बदलते चुनावी रुझानों तक, कैसा है असम विधानसभा का इतिहास?

Assam Legislative Assembly: 9 अप्रैल 2026 को असम विधानसभा में चुनाव होने वाले हैं. ये चुनाव एक ही चरण में होंगे. ऐसे में असम विधानसभा चुनाव का इतिहास जानना भी बहुत जरूरी है. दरअसल असम विधानसभा का इतिहास भारत के लोकतांत्रिक विकास की एक महत्वपूर्ण कहानी है. इसकी पहली बैठक 1937 में ब्रिटिश शासन के दौरान हुई थी. उस दौरान प्रांतीय स्वशासन की शुरुआत हुई थी. उस समय सीमित मताधिकार हुआ करता था ये संस्था जनता की आवाज को राजनीतिक मंच देने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हुई. स्वतंत्रता के बाद असम विधानसभा ने नए भारत के निर्माण में अहम भूमिका निभाई. संविधान लागू होने के बाद चुनाव प्रणाली अधिक समावेशी बनी और धीरे-धीरे इसमें आम जनता की भागीदारी बढ़ी. 

एक समय जहां पर सीमित वर्ग ही मतदान कर सकता था, वहीं बाद में हर वयस्क नागरिक को मतदान का अधिकार मिला, जिससे लोकतंत्र मजबूत हुआ. समय के साथ असम में चुनावी रुझानों में कई बदलाव देखने को मिले. शुरुआती सालों में एक ही पार्टी का दबदबा था, लेकिन बाद में क्षेत्रीय दलों और गठबंधन राजनीति का उदय हुआ. मतदाताओं की जागरूकता बढ़ने के साथ मतदान प्रतिशत में भी वृद्धि हुई, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया की मजबूती को दर्शाता है. ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोगों की भागीदारी लगातार बढ़ी है. असम की राजनीति को आकार देने में कई मुख्यमंत्रियों का योगदान रहा है.

Last Updated: March 21, 2026 | 3:03 PM IST
Gopinath Bordoloi - Photo Gallery
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गोपीनाथ बोरदोलोई

गोपीनाथ बोरदोलोई भारत के स्वतंत्रता संग्राम के मुख्य नेताओं में से एक था. उन्हें प्यार से लोकप्रिय कहा जाता था. वे भारतीय नेशनल कांग्रेस के नेता थे और असम के पहले मुख्यमंत्री बने. उन्होंने विभाजन के दौरान असम को भारत में बनाए रखने के लिए अहम भूमिका निभाई. उनकी कोशिशों के कारण ही गुवाहाटी विश्वविद्यालय की स्थापना हुई थी. मरने के बाद उन्हें सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिया गया.

Bimala Prasad Chaliha - Photo Gallery
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बिमला प्रसाद चालिहा

कांग्रेस नेता बिमला प्रसाद चालिहा सादगी, ईमानदारी और प्रशासनिक सख्ती के लिए जाने जाते थे. वे साल 1957 से 1970 तक असम के सीएम रहे. उन्होंने असम में लंबे समय तक स्थिर और मजबूत शासन चलाया. उन्होंने कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और उग्रवाद पर नियंत्रण करने के लिए कड़े कदम उठाए. उस दौरान आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए कई योजनाएं शुरू की गईं.

Mahendra Mohan Choudhury - Photo Gallery
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महेंद्र मोहन चौधरी

कांग्रेस नेता महेंद्र मोहन चौधरी 1970 से 1972 के बीच असम के सीएम रहे. उन्होंने प्रशासनिक सुधारों और विकास के लिए काम किया. उन्होंने राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखने और शासन को स्थिर रखने में अहम भूमिका निभाई.

Golap Borbora - Photo Gallery
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गोलाप बोरबोरा

गोलाप बोरबोरा 1978 से 1979 के बीच असम के सीएम रहे. वे असम के ऐसे पहले सीएम थे, जो कांग्रेस के अलावा दूसरी पार्टी यानी जनता पार्टी से सत्ता में आए थे. उन्होंने प्रशासन में पारदर्शिता और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने की कोशिश की.

Anwara Taimur - Photo Gallery
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अनवरा तैमूर

कांग्रेस नेता अनवरा तैमुर असम की अब तक की पहली और इकलौती महिला सीएम थीं. उन्होंने असम में महिला नेतृत्व की नई मिसाल पेश की. उनके कार्यकाल में असम ने कई राजनीतिक और सामाजिक चुनौतियां झेलीं. वे 1980 से 1981 तक सीएम रहीं.

Hiteswar Saikia - Photo Gallery
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हितेश्वर सैकिया

कांग्रेस नेता हितेश्वर सैकिया एक नहीं दो बार असम के सीएम बने. वे पहली बार 1983 से 1985 के बीच और दूसरी बार 1991 से 1996 के बीच सीएम रहे. उन्होंने असम में उग्रवाद और अस्थिरता के दौर में राज्य का नेतृत्व किया. उन्होंने कानून व्यवस्था को सुधारने के लिए कई अहम कदम उठाए.

Prafulla Kumar Mahanta - Photo Gallery
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प्रफुल्ल कुमार महंत

प्रफुल्ल कुमार महंत भी एक नहीं बल्कि दो बार सीएम रहे. वे पहली बार 1985 से 1990 के बीच और दूसरी बार 1996 से 2001 के बीच सीएम रहे. उनके नेतृत्व में पहली बार किसी क्षेत्रीय पार्टी की सरकार बनी. वे असोम गाना परिषद के नेता थे. वे 1985 में सबसे युवा मुख्यमंत्री बने. उन्होंने विकास के साथ ही क्षेत्रीय पहचान को मजबूत किया.

Tarun Gogoi - Photo Gallery
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तरूण गोगोई

तरूण गोगोई भारतीय नेशनल कांग्रेस के नेता थे. वे 2001 से 2016 के बीच असम के मुख्यमंत्री रहे. उन्होंने लगातार तीन कार्यकाल के बीच असम सरकार का नेतृत्व किया. उन्होंने आर्थिक विकास और निवेश को बढ़ावा देने के लिए अहम कदम उठाए.

Sarbananda Sonowal - Photo Gallery
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सर्बानंद सोनोवाल

सर्बानंद सोनोवाल भारतीय जनता पार्टी के नेता है, जो 2016 से 2021 के बीच असम के सीएम रहे. उनके नेतृत्व में पहली बार भाजपा की सरकार बनी. उन्होंने अवैध प्रवास के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया. उन्होंने खेल और युवा कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की पहल की.

Himanta Biswa Sarma - Photo Gallery
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हिमंत बिस्वा सरमा

हिमंत बिस्वा सरमा 2015 में भाजपा में शामिल हुए. उन्होंने 2021 में असम के मुख्यमंत्री पद के लिए शपथ ली. वे तब से अब तक असम के सीएम हैं. उन्होंने कोविड-19 के दौरान राज्य में सक्रिय भूमिका निभाई. उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर दिया. उन्होंने कानून व्यवस्था और प्रशासनिक सुधारों को मजबूत करने के लिए लगातार काम किया और उसे मजबूत करने की दिशा में काम किया.

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