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Vandana Das Murder: ‘आरोपी को मिले ऐसी सजा…’, बेटी के कातिल को उम्रकैद मिलने के बाद मां ने की भावुक अपील

Vandana Das Murder Case:  42 वर्षीय स्कूल टीचर जी. संदीप को मई 2023 में कोट्टारक्कारा तालुक अस्पताल में डॉ. वंदना दास की सनसनीखेज हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई. इसके अलावा, अदालत ने भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत अन्य अपराधों के लिए कुल 30 साल की सज़ा भी सुनाई, जिसे संदीप हत्या के मामले में आजीवन कारावास शुरू करने से पहले पूरा करेगा.

Written By:
Published: March 21, 2026 15:29:00 IST
Last Updated: 2026-03-21 16:01:01

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Kerala Doctor Murder Case: केरल की एक अदालत ने शनिवार को 42 वर्षीय स्कूल टीचर जी. संदीप को मई 2023 में कोट्टारक्कारा तालुक अस्पताल में डॉ. वंदना दास की सनसनीखेज हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई. इसके अलावा, अदालत ने भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत अन्य अपराधों के लिए कुल 30 साल की सज़ा भी सुनाई, जिसे संदीप हत्या के मामले में आजीवन कारावास शुरू करने से पहले पूरा करेगा. यह जानकारी विशेष लोक अभियोजक प्रताप जी पडिकल ने दी. ऐसे में चलिए विस्तार से जानें कि यह पूरा मामला क्या था 

क्या था पूरा मामला?

जानकारी के मुताबिक, डॉ. दास (23), जो कोट्टायम ज़िले के कडुथुरुथी की रहने वाली थीं और अपने माता-पिता की इकलौती संतान थीं, एक हाउस सर्जन थीं; 10 मई 2023 की सुबह-सवेरे उन पर सर्जिकल कैंची से हमला किया गया था. संदीप को पुलिस उसके घर के पास हुई कथित कहासुनी में पैर में लगी चोट के इलाज के लिए अस्पताल लाई थी; उसने पहले पुलिसकर्मियों और उसके साथ आए एक आम नागरिक पर हमला किया, और उसके बाद इस युवा डॉक्टर को चाकू मारकर मौत के घाट उतार दिया.
 
डॉ. दास ने तिरुवनंतपुरम के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. अदालत ने, जिसने 17 मार्च को संदीप को दोषी ठहराया था, उसे IPC की कई धाराओं के तहत दोषी पाया जिनमें हत्या, सबूत मिटाना और गलत तरीके से रोकना शामिल है साथ ही उसे ‘केरल स्वास्थ्य सेवा कर्मी और स्वास्थ्य सेवा संस्थान (हिंसा और संपत्ति को नुकसान से रोकथाम) अधिनियम, 2012’ के तहत भी दोषी पाया.

संदीप ने हमले की योजना पहले से बनाई थी

अदालत ने बचाव पक्ष के इस दावे को खारिज कर दिया कि संदीप ‘सिज़ोफ्रेनिया’ (मानसिक बीमारी) से पीड़ित था, और यह फैसला सुनाया कि संदीप अपने किए गए कामों के बारे में पूरी तरह से सचेत था और उसने इस हमले की पहले से ही योजना बनाई थी.
200 से ज्यादा दस्तावेजों की जांच की गई
मुकदमे की सुनवाई के दौरान, 70 से ज़्यादा गवाहों ने गवाही दी और 200 से ज़्यादा दस्तावेज़ों, जिनमें मेडिकल और फोरेंसिक रिपोर्ट भी शामिल थीं, की जांच की गई. मानसिक स्वास्थ्य जांचों से इस बात की पुष्टि हुई कि घटना के समय आरोपी मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ था.

फैसले में सजा को लेकर असतुष्टि जाहिर की

 इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए, डॉ. वंदना के माता-पिता ने राहत तो महसूस की, लेकिन साथ ही सज़ा को लेकर अपनी असंतुष्टि भी ज़ाहिर की; उन्होंने संकेत दिया कि वे इस मामले में मौत की सज़ा (मृत्युदंड) की मांग करते हुए ऊपरी अदालत में अपील दायर करेंगे. अभियोजन पक्ष ने इस बात की पुष्टि की है कि वह आजीवन कारावास की सज़ा को बढ़ाकर मृत्युदंड में बदलने के लिए अपील दायर करने की सिफारिश करेगा, और यह तर्क देगा कि यह हमला “दुर्लभतम से भी दुर्लभ” (rarest-of-rare) श्रेणी का मामला है.

आरोपी को मिले मौत की सजा- डॉ. वदना की मां

 डॉ. वंदना की मां ने नम आँखों से कहा कि उनका परिवार आरोपी के लिए अधिकतम सज़ा चाहता है, और उन्होंने इस बात का ज़िक्र किया कि इस हमले के दौरान उनकी बेटी पर 27 बार चाकू से वार किए गए थे. इस घटना ने पूरे केरल में भारी आक्रोश पैदा कर दिया था, जिसके चलते चिकित्सा समुदाय ने स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को और मज़बूत बनाने की मांग करते हुए जगह-जगह विरोध प्रदर्शन किए थे.

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Published: March 21, 2026 15:29:00 IST
Last Updated: 2026-03-21 16:01:01

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Kerala Doctor Murder Case: केरल की एक अदालत ने शनिवार को 42 वर्षीय स्कूल टीचर जी. संदीप को मई 2023 में कोट्टारक्कारा तालुक अस्पताल में डॉ. वंदना दास की सनसनीखेज हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई. इसके अलावा, अदालत ने भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत अन्य अपराधों के लिए कुल 30 साल की सज़ा भी सुनाई, जिसे संदीप हत्या के मामले में आजीवन कारावास शुरू करने से पहले पूरा करेगा. यह जानकारी विशेष लोक अभियोजक प्रताप जी पडिकल ने दी. ऐसे में चलिए विस्तार से जानें कि यह पूरा मामला क्या था 

क्या था पूरा मामला?

जानकारी के मुताबिक, डॉ. दास (23), जो कोट्टायम ज़िले के कडुथुरुथी की रहने वाली थीं और अपने माता-पिता की इकलौती संतान थीं, एक हाउस सर्जन थीं; 10 मई 2023 की सुबह-सवेरे उन पर सर्जिकल कैंची से हमला किया गया था. संदीप को पुलिस उसके घर के पास हुई कथित कहासुनी में पैर में लगी चोट के इलाज के लिए अस्पताल लाई थी; उसने पहले पुलिसकर्मियों और उसके साथ आए एक आम नागरिक पर हमला किया, और उसके बाद इस युवा डॉक्टर को चाकू मारकर मौत के घाट उतार दिया.
 
डॉ. दास ने तिरुवनंतपुरम के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. अदालत ने, जिसने 17 मार्च को संदीप को दोषी ठहराया था, उसे IPC की कई धाराओं के तहत दोषी पाया जिनमें हत्या, सबूत मिटाना और गलत तरीके से रोकना शामिल है साथ ही उसे ‘केरल स्वास्थ्य सेवा कर्मी और स्वास्थ्य सेवा संस्थान (हिंसा और संपत्ति को नुकसान से रोकथाम) अधिनियम, 2012’ के तहत भी दोषी पाया.

संदीप ने हमले की योजना पहले से बनाई थी

अदालत ने बचाव पक्ष के इस दावे को खारिज कर दिया कि संदीप ‘सिज़ोफ्रेनिया’ (मानसिक बीमारी) से पीड़ित था, और यह फैसला सुनाया कि संदीप अपने किए गए कामों के बारे में पूरी तरह से सचेत था और उसने इस हमले की पहले से ही योजना बनाई थी.
200 से ज्यादा दस्तावेजों की जांच की गई
मुकदमे की सुनवाई के दौरान, 70 से ज़्यादा गवाहों ने गवाही दी और 200 से ज़्यादा दस्तावेज़ों, जिनमें मेडिकल और फोरेंसिक रिपोर्ट भी शामिल थीं, की जांच की गई. मानसिक स्वास्थ्य जांचों से इस बात की पुष्टि हुई कि घटना के समय आरोपी मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ था.

फैसले में सजा को लेकर असतुष्टि जाहिर की

 इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए, डॉ. वंदना के माता-पिता ने राहत तो महसूस की, लेकिन साथ ही सज़ा को लेकर अपनी असंतुष्टि भी ज़ाहिर की; उन्होंने संकेत दिया कि वे इस मामले में मौत की सज़ा (मृत्युदंड) की मांग करते हुए ऊपरी अदालत में अपील दायर करेंगे. अभियोजन पक्ष ने इस बात की पुष्टि की है कि वह आजीवन कारावास की सज़ा को बढ़ाकर मृत्युदंड में बदलने के लिए अपील दायर करने की सिफारिश करेगा, और यह तर्क देगा कि यह हमला “दुर्लभतम से भी दुर्लभ” (rarest-of-rare) श्रेणी का मामला है.

आरोपी को मिले मौत की सजा- डॉ. वदना की मां

 डॉ. वंदना की मां ने नम आँखों से कहा कि उनका परिवार आरोपी के लिए अधिकतम सज़ा चाहता है, और उन्होंने इस बात का ज़िक्र किया कि इस हमले के दौरान उनकी बेटी पर 27 बार चाकू से वार किए गए थे. इस घटना ने पूरे केरल में भारी आक्रोश पैदा कर दिया था, जिसके चलते चिकित्सा समुदाय ने स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को और मज़बूत बनाने की मांग करते हुए जगह-जगह विरोध प्रदर्शन किए थे.

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