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ट्रेन के फ्यूल टैंक में आता है इतना डीजल! माइलेज जानकर रह जायेंगे दंग, जानिये इससे जुड़े रोचक तथ्य

भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में से एक है. हर दिन करोड़ों लोग ट्रेन से सफर करते हैं. आपने भी कई बार ट्रेन से यात्रा की होगी, लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा है कि ट्रेन के फ्यूल टैंक में आखिर कितने लीटर डीजल भरा जाता होगा, जिससे ये हमेशा यात्रियों को बिना रुके गंतव्य स्थान तक पहुंचा देती है. कहने का आशय ये है कि आपने नोटिस किया होगा कि ट्रेन स्टेशनों पर रुकती है, पर कभी ये नहीं सुना होगा कि डीजल ख़त्म हो गया इसलिए ट्रेन रुक गयी. ये लोहे के दर्जनों डिब्बे, सैकड़ों यात्री और हजारों टन वजन लेकर भी बिना रुके मीलों तक दौड़ती रहती है. ऐसा कैसे होता है, इसका राज क्या है? आइए आसान तरीके से इसे समझते हैं.

Last Updated: March 23, 2026 | 12:10 PM IST
What is the capacity of a train's fuel tank? - Photo Gallery
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ट्रेन के फ्यूल टैंक की क्षमता कितनी होती है?

भारतीय रेलवे के डीजल लोकोमोटिव (इंजन) में लगने वाला फ्यूल टैंक आमतौर पर बहुत बड़ा होता है. ज्यादातर इंजनों में 5,000 से 6,000 लीटर तक डीजल आ सकता है, जबकि कुछ यात्री ट्रेनों (जैसे पैसेंजर, शताब्दी, राजधानी) और मालगाड़ियों के इंजनों में लगभग 6,000–6,100 लीटर डीजल की क्षमता होती है.

Tank Capacities of Different Types of Trains - Photo Gallery
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अलग‑अलग प्रकार की ट्रेनों के टैंक की क्षमता

अलग‑अलग मॉडल और इंजन के हिसाब से टैंक की क्षमता बदलती है. पुराने लोकोमोटिव इंजनों में लगभग 5,000 लीटर डीजल आता है, जबकि अधिकांश आधुनिक पैसेंजर और एक्सप्रेस ट्रेनों में 6,000–6,100 लीटर की क्षमता वाले टैंक लगे हुए हैं. मालगाड़ियों के डीजल इंजन में भी लगभग 6,000 लीटर डीजल भरा जाता है, ताकि भारी भार के साथ लंबी दूरी तय की जा सके.

What is the mileage of a train? - Photo Gallery
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ट्रेन का माइलेज क्या है?

माइलेज का अर्थ है कि 1 किलोमीटर में कितना डीजल खर्च होता है? ट्रेन का माइलेज उसके भार, डिब्बों की संख्या और स्टॉपेज पर निर्भर करता है. 12 डिब्बों वाली पैसेंजर ट्रेनें अक्सर प्रति किलोमीटर लगभग 6 लीटर डीजल खर्च करती हैं, क्योंकि वे बार‑बार रुकती हैं और फिर से तेज़ गति पर आती हैं. वहीं एक्सप्रेस ट्रेनें जिनमें स्टॉपेज कम होते हैं और चुस्त गति होती है, वे 1 किलोमीटर में लगभग 4.5 लीटर डीजल से काम चला लेती हैं.

How far can a train travel on a full tank? - Photo Gallery
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फुल टंकी में ट्रेन कितनी दूर जा सकती है?

अगर ट्रेन के टैंक में लगभग 6,000 लीटर डीजल भरा हुआ हो, तो उसके साथ ट्रेन कई सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा पूरी कर सकती है. एक सामान्य पैसेंजर ट्रेन फुल टंकी पर लगभग 800 से 1,000 किलोमीटर तक जा सकती है, जबकि एक्सप्रेस‑टाइप ट्रेनें इसी डीजल से लगभग 1,200 से 1,500 किलोमीटर दूरी तय कर सकती हैं. रुक‑रुककर चलने वाली ट्रेनों में माइलेज कम होता है, इसलिए उनकी फुल‑टैंक दूरी भी कम होती है.

Why is a tank so big? - Photo Gallery
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टैंक इतना बड़ा क्यों होता है?

ट्रेन के फ्यूल टैंक इतने बड़े इसलिए बनाए जाते हैं, ताकि लगातार चलने वाली लंबी दूरी की यात्रा के दौरान हर स्टेशन पर डीजल भरने की ज़रूरत घट सके.  इससे ट्रेन की गति और शेड्यूल दोनों बनी रहती हैं और रुकावटों पर खर्च होने वाला समय भी कम होता है. इसके अलावा भारी भार और अलग‑अलग भू‑भाग (ढलान, समतल आदि) को ध्यान में रखकर टैंक की क्षमता तय की जाती है.

Establishment of Indian Railways - Photo Gallery
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भारतीय रेलवे की स्थापना

भारत की पहली यात्री ट्रेन, जिसका संचालन ग्रेट इंडियन पेनिनसुला रेलवे द्वारा किया गया था और जिसे तीन स्टीम इंजनों साहिब, सिंध और सुल्तान द्वारा खींचा गया था. इस ट्रेन ने 16 अप्रैल 1853 को बोरी बंदर (मुंबई) और ठाणे के बीच 1,676 मिमी चौड़े गेज ट्रैक पर 14 डिब्बों में 400 लोगों के साथ 34 किलोमीटर की दूरी तय की. ठाणे वायडक्ट, भारत के पहले रेलवे पुल, ठाणे क्रीक पर तब बनाए गए थे जब मई 1854 में मुंबई-ठाणे लाइन को कल्याण तक बढ़ाया गया था।

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