IPL के वो 2 ‘बदनसीब’ कप्तान, रनों का लगाया ‘अंबार’ फिर भी टीम इंडिया में नहीं मिली जगह!
IPL 2026: क्रिकेट की दुनिया में कभी-कभी सिर्फ रन बनाना ही काफी नहीं होता. श्रेयस और शुभमन, दो ऐसे नाम जिन्होंने पिछले IPL में अपने बल्ले से आग उगली, रिकॉर्ड्स की झड़ी लगा दी, लेकिन जब टीम इंडिया की बारी आई तो उन्हें किनारे कर दिया गया. आखिर इन दो कप्तानों के इस अनकहे दर्द के पीछे की असल कहानी क्या है?
PBKS vs GT
आईपीएल 2026 के शुरुआती दौर में मंगलवार को न्यू चंडीगढ़ (मुल्लांपुर) के महाराज यदविंद्र इंटरनेशनल स्टेडियम में प्रीति जिंटा की पंजाब किंग्स का मुकाबला गुजरात टाइटंस से हुआ जिसमें पंजाब ने 3 विकेट से यह मुकाबला जीता भी.
चर्चा में दो सबसे बड़े 'सुपरस्टार'
मैच से कहीं ज्यादा चर्चा पंजाब के कप्तान श्रेयस अय्यर और गुजरात के कप्तान शुभमन गिल की हो रही है. ये दोनों ही मॉडर्न इंडियन क्रिकेट के सबसे बड़े नामों में शुमार हैं लेकिन फिलहाल टीम इंडिया के टी20 सेटअप से बाहर हैं.
IPL 2025 में मचाया था बल्ले से 'गदर'
पिछले साल आईपीएल के 18वें सीजन में इन दोनों कप्तानों ने रनों की बारिश की थी. गिल और अय्यर दोनों ही सबसे ज्यादा रन बनाने वाले टॉप-6 बल्लेबाजों की लिस्ट में शामिल थे.
शुभमन गिल का 'तूफानी' रिकॉर्ड
पिछले सीजन में गिल ने 15 मैचों में 50 की शानदार औसत और 155.87 के स्ट्राइक रेट से 650 रन कूटे थे. इस दौरान उनके बल्ले से 6 अर्धशतक भी निकले थे.
श्रेयस अय्यर का 'खतरनाक' अवतार
श्रेयस अय्यर ने भी पीछे मुड़कर नहीं देखा. उन्होंने 17 मैचों में 50.33 की औसत और 175.07 के अविश्वसनीय स्ट्राइक रेट के साथ 604 रन बनाए थे, जिसमें 6 अर्धशतक शामिल थे.
वर्ल्ड कप टीम से क्यों हुए बाहर?
इतने शानदार प्रदर्शन के बावजूद दोनों को टी20 वर्ल्ड कप में जगह नहीं मिली. शुभमन गिल उप-कप्तान के तौर पर वापसी के बाद 15 मैचों में एक भी अर्धशतक नहीं लगा पाए थे, जिससे चयनकर्ताओं का भरोसा डगमगा गया.
सेलेक्टर्स की नई 'विकेटकीपर-बल्लेबाज'
पॉलिसी टीम इंडिया की रणनीति बदल चुकी है. अब ओपनिंग के लिए 140 नहीं बल्कि 170-180 के स्ट्राइक रेट वाले खिलाड़ी की तलाश थी, जो विकेटकीपिंग भी कर सके. इसी वजह से संजू सैमसन और ईशान किशन को प्राथमिकता दी गई.
मिडल ऑर्डर में जगह की तंगी
श्रेयस अय्यर के लिए नंबर-3 और 4 पर जगह ही नहीं बची थी. नंबर-3 पर ईशान किशन और नंबर-4 पर खुद कप्तान सूर्या का कब्जा था. बेंच पर बैठाने के बजाय सेलेक्टर्स ने उन्हें टीम से बाहर रखना ही बेहतर समझा.