कभी मंच पर निभाया सीता का किरदार, एक बार तो जीने के लिए बेचने पड़े पत्नी के गहने; जानिए खूंखार विलेन प्राण के बारे में 10 अनसुने किस्से
Unknown Facts of Pran: सिनेमाई दुनिया के खतरनाक विलेन में से एक रहे अभिनेता प्राण की आज 12 फरवरी को 106वीं बर्थ एनिवर्सरी है. अभिनेता ने अपने करियर में नायक, खलनायक और सहायक अभिनेता की भूमिकाएं निभाईं. प्राण ने 350 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया और हिंदी सिनेमा में उनके योगदान के लिए उन्हें कई पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हुए. जानिए दिवंगत अभिनेता के बारे में 10 अनसुनी बातें.
पहले फोटोग्राफर बनना चाहते थे प्राण
अभिनेता प्राण का जन्म 12 फरवरी 1920 को हुआ था. वे मूल रूप से पाकिस्तान के रहने वाले थे और एक्टिंग के जुनून के कारण 14 अगस्त 1947 को मुंबई आ गए थे. प्राण का पूरा नाम प्राण कृष्ण सिकंद है. वे फोटोग्राफर बनना चाहते थे, लेकिन किस्मत ने उन्हें फिल्म उद्योग में ला खड़ा किया।
कभी 1 रुपये में की फिल्म
प्राण ने राज कपूर की फिल्म बॉबी पर 1 रुपये की हस्ताक्षर राशि के साथ हस्ताक्षर किए.
प्राण की पहली फिल्म
प्राण की पहली फिल्म पंजाबी भाषा में थी जिसका नाम 'यमला जाट' (1940) था, जिसमें उन्होंने खलनायक की भूमिका निभाई थी। यह फिल्म बहुत बड़ी हिट साबित हुई थी.
प्राण ने बिग बी के लिए की थी सिफारिश
देव आनंद, राज कुमार और धर्मेंद्र द्वारा प्रकाश मेहरा की फिल्म 'जंजीर' को अस्वीकार करने के बाद, प्राण ने ही अमिताभ बच्चन को इस भूमिका के लिए सिफारिश की थी.
सबसे ज्यादा फीस लेने वाले एक्टर
एक समय प्राण, राजेश खन्ना के बाद बॉलीवुड के दूसरे सबसे अधिक वेतन पाने वाले अभिनेताओं में शुमार थे.
जब बेचने पड़े पत्नी के गहने
प्राण ने एक बार एक इंटरव्यू में बताया था जीने के लिए उन्हें पत्नी के गहने बेचने पड़े. उन्होंने कहा, '20 से अधिक फिल्मों में काम करने के बाद मुझे लगा था कि इंडस्ट्री मेरा स्वागत करेगी, लेकिन मैं गलत था. यहां मुझे बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। मैं 6 महीने से अधिक समय तक बेरोजगार रहा. यहां तक कि घर के बिल चुकाने के लिए मुझे अपनी पत्नी के कुछ गहने भी बेचने पड़े.'
फिल्मफेयर पुरस्कार लेने से किया इनकार
2013 में हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि प्राण ने सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता (बेईमान के लिए) का फिल्मफेयर पुरस्कार लेने से इनकार कर दिया था. उनका मानना था कि सर्वश्रेष्ठ संगीत का पुरस्कार गुलाम मोहम्मद को मिलना चाहिए था. उस वर्ष सर्वश्रेष्ठ संगीत का पुरस्कार प्राण की फिल्म 'बेईमान' को ही दिया गया था. उस साल, बेईमान को सात फिल्मफेयर नामांकन मिले.
लाहौर से पहुंचे इंदौर
भारत को आजादी मिलने ही वाली थी, चारों ओर दंगे और सांप्रदायिक साजिशों का माहौल छाया हुआ था. लाहौर में दंगों की भनक लगते ही प्राण ने अपनी पत्नी शुक्ला, साली और लगभग एक साल के बेटे को सुरक्षा के लिए इंदौर भेज दिया. वे वहीं रुक गए. लेकिन उनकी पत्नी ने 11 अगस्त, 1947 को अपने बेटे का पहला जन्मदिन मनाने से इनकार कर दिया, जब तक प्राण इंदौर नहीं आ जाते. लाहौर में ही रहने की इच्छा होने के बावजूद, उन्होंने पत्नी की बात मान ली और 10 अगस्त को इंदौर पहुँच गए.
मंच पर बने थे सीता
प्राण की पहली अभिनय भूमिका शिमला में एक स्थानीय रामलीला में मदन पुरी के राम के सामने सीता की थी.
प्राण ने कई स्कूलों में की पढ़ाई
प्राण के पिता सरकार के साथ एक सिविल ठेकेदार थे, इसलिए प्राण ने कपूरथला (पंजाब), उन्नाव, मेरठ और रामपुर (उत्तर प्रदेश) और देहरादून (उत्तराखंड) के विभिन्न स्कूलों में पढ़ाई की.