Fatty Liver Diet: फैटी लिवर में आलू खाएं या नहीं, डाइट में कैसे करें शामिल, किन चीजों से रहें दूर
Fatty Liver Diet: फैटी लिवर का मतलब है, लिवर के अंदर जरूरत से ज्यादा फैट जमा हो जाना है. लिवर से जुड़ी समस्याएं मोटापा, टाइप 2 डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल की वजह से हो सकती हैं. लिवर की बीमारी का एक आम कारण है, शराब का बहुत ज्यादा सेवन. हालांकि, इस स्थिति को खान-पान और जीवनशैली में बदलाव करके काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है. आइए जानते हैं, ओनली माय हेल्थ के आधार पर फैटी लिवर से पीड़ित व्यक्ति को आलू खाना चाहिए या नहीं और ऐसे में किन चीजों से दूर रहें.
आलू खा सकते हैं या नहीं
डायटीशियन और न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन के मुताबिक, फैटी लिवर के मरीज सीमित मात्रा में आलू का सेवन कर सकते हैं. अपनी डाइट से आलू को पूरी तरह से हटाने की कोई जरूरत नहीं है. आलू में कई तरह के पोषक तत्व होते हैं जैसे पोटैशियम, विटामिन C और फाइबर लेकिन इन्हें सही मात्रा में और सही तरीके से खाना जरूरी है.
ज्यादा खाने से बचें
ज्यादा मात्रा में आलू का सेवन करने से शरीर में कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बढ़ सकती है, जो फैटी लिवर के लिए नुकसानदायक है.
कैसे खाएं
यदि आप फैटी लिवर के मरीज हैं तो आपको आलू उबालकर या ग्रिल करके खाना चाहिए, क्योंकि इससे नुकसान होने की संभावना कम होती है.
डीप फ्राई से बचें
आलू के चिप्स और बहुत ज्यादा तेल में बने आलू के पकवानों से बचना चाहिए. इसके अलावा, एक और चीज जीसे हमको ध्यान में रखना होगा, वह है कि आलू का सेवन हमेशा फाइबर के साथ ही करना चाहिए.
फाइबर लें
आलू का सेवन फाइबर के साथ करने से ग्लूकोज धीरे-धीरे रिलीज होता है और आलू से जुड़े किसी भी संभावित बुरे असर को कम करने में मदद मिलती है.
फैटी लिवर ग्रेड 1
इस स्टेज में, लिवर में थोड़ी मात्रा में फैट जमा हो जाता है, जिसे सही खान-पान और जीवनशैली से नियंत्रित किया जा सकता है. इस दौरान, अपनी डाइट से आलू को पूरी तरह से हटाना ज़रूरी नहीं है. आप हफ़्ते में 2-3 बार सीमित मात्रा में इनका सेवन कर सकते हैं.
फैटी लिवर ग्रेड 2
ऐसी स्थिति में, आलू का सेवन बहुत कम मात्रा में और केवल कभी-कभार ही करें. उबला हुआ या ठंडा आलू अन्य की तुलना में ज्यादा अच्छा माना जाता है. इसके अलावा, उच्च-कार्बोहाइड्रेट वाले आहार से बचना चाहिए.
फैटी लिवर ग्रेड 3
इस दौरान, आलू का सेवन बहुत ही सीमित मात्रा में, या फिर पूरी तरह से डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह के अनुसार ही किया जाना चाहिए. तले हुए, मसालेदार और ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थों से पूरी तरह से बचना चाहिए. इस स्टेज में, मुख्य रूप से कम कार्बोहाइड्रेट और ज्यादा फाइबर वाले आहार पर ध्यान देना चाहिए.