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शादी में सिंदूरदान की रस्म…आखिर क्यों नहीं देख सकती कुंवारी कन्याएं? जानें इस अनोखी मान्यता का रहस्य

Sindoor Daan Ceremony: हिंदू विवाह में हर रस्म अपने भीतर परंपरा, आस्था और भावनाओं की एक अलग कहानी समेटे होती है. इन्हीं में सिंदूरदान वह खास पल है, जब दूल्हा दुल्हन की मांग में सिंदूर भरकर वैवाहिक जीवन की शुरुआत का संकल्प लेता है. बिहार की कुछ पारंपरिक मान्यताओं में इस रस्म को बेहद गोपनीय रखा जाता है और कुंवारी कन्याओं को इसे देखने से मना किया जाता है. आखिर इसके पीछे क्या वजह है? आइए जानते हैं.

Last Updated: August 16, 2026 | 2:04 PM IST
Sindoor Daan Ceremony - Photo Gallery
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सिंदूरदान से शुरू होता है दांपत्य जीवन

सिंदूरदान को हिंदू विवाह की सबसे भावुक और महत्वपूर्ण रस्मों में गिना जाता है. दूल्हे द्वारा दुल्हन की मांग में सिंदूर भरना विवाह के सामाजिक और धार्मिक रूप से पूर्ण होने का प्रतीक माना जाता है. इसी क्षण से दोनों के नए जीवन की शुरुआत मानी जाती है.

sindoor ceremony - Photo Gallery
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सिंदूर को माना जाता है सौभाग्य का प्रतीक

हिंदू परंपरा में सिंदूर को सुहाग, सौभाग्य और वैवाहिक सुख से जोड़ा जाता है. मान्यता है कि विवाहित महिला की मांग का सिंदूर उसके पति की लंबी आयु और दांपत्य जीवन की मंगलकामना का प्रतीक होता है. इसलिए सिंदूरदान को विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है.

sindoor ceremony rules - Photo Gallery
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क्यों रखी जाती है यह रस्म गोपनीय?

बिहार की कुछ लोकपरंपराओं में सिंदूरदान को चारदीवारी के भीतर सीमित लोगों की मौजूदगी में कराने की मान्यता है. इस दौरान सिन्होरा और अखरा सिंदूर जैसे पारंपरिक सामानों का इस्तेमाल किया जाता है. माना जाता है कि गोपनीयता रस्म की पवित्रता और गंभीरता बनाए रखती है.

sindoor wedding ceremony - Photo Gallery
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कुंवारी कन्याओं को देखने से क्यों रोका जाता है?

पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, सिंदूरदान के समय कुंवारी कन्याओं की मौजूदगी शुभ नहीं मानी जाती. ऐसी धारणा है कि यह रस्म वर-वधु के वैवाहिक जीवन से जुड़ी अत्यंत निजी और पवित्र प्रक्रिया है. इसलिए कुछ परिवारों में अविवाहित लड़कियों को उस समय वहां जाने से रोका जाता है.

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देवी-देवताओं की मौजूदगी से जुड़ी मान्यता

धार्मिक विश्वासों में विवाह को देवी-देवताओं की साक्षी में संपन्न होने वाला संस्कार माना जाता है. सिंदूरदान के समय भी दैवी शक्तियों की उपस्थिति मानी जाती है. इसी आस्था के चलते कुछ समुदाय इस रस्म को बेहद पवित्र, शांत और सीमित लोगों के बीच संपन्न करने की परंपरा निभाते हैं.

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क्या कुंवारी कन्या के देखने से सौभाग्य प्रभावित होता है?

लोकमान्यताओं में यह भी कहा जाता है कि सिंदूरदान के दौरान कुंवारी कन्या की उपस्थिति नवविवाहिता के सौभाग्य पर असर डाल सकती है. हालांकि यह धार्मिक आस्था और क्षेत्रीय परंपरा का हिस्सा है, इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. अलग-अलग समुदायों में इसे लेकर मान्यताएं अलग हो सकती हैं.

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