गुस्से में आकर लिखा था JRD टाटा को पत्र, आखिर कौन है पहली महिला इंजीनियर? जिसके कारण बदला नियम
Sudha Murty: अपने पति एन नारायणमूर्ति के साथ आईटी कंपनी इंफोसिस की नींव रखने वाली सुधा मूर्ति को उनकी सादगी और सरल स्वभाव के कारण जाना जाता है. उन्होंने अपनी पहचान बनाने के लिए कड़ी लड़ाई लड़ी. ये उस समय की बात है जब महिलाओं को घर से निकलने के लिए भी चुनौतियों का सामना किया. उन्होंने महिलाओं की बराबरी के हक के लिए आवाज उठाई और टाटा जैसी कंपनियों को नियम बदलने के लिए सोचने पर मजबूर कर दिया. उनकी एक कोशिश ने भविष्य में जुझारू महिलाओं के लिए रोजगार के दरवाजे खोले.
कपिल शर्मा के शो में सुनाया किस्सा
कुछ समय पहले सुधा मूर्ति ने 'द कपिल शर्मा शो' में अपने जीवन से जुड़े कई किस्सों के बारे में बताया. इस दौरान उन्होंने अपनी जिंदगी से जुड़ा किस्सा बताते हुए कहा कि उन्होंने एक पत्र लिखकर जेआरडी टाटा को टाटा ग्रुप की कंपनी टेल्को में नौकरी देने के लिए मनाया था.
पढ़ाई के बाद नौकरी की तलाश
बता दें कि सुधा मूर्ति ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस से ग्रेजुएशन किया. इसके बाद वे नौकरी की तलाश कर रही थीं. इसी दौरान टाटा ग्रुप की कंपनी टेल्को में इंजीनियर की नौकरी के लिए आवेदन मांगे गए. इसके लिए एक विज्ञापन छापा गया.
विज्ञापन में क्या था?
इस विज्ञापन के तहत पुरुषों से आवेदन मांगे गए थे. इसे देखकर 23 साल की सुधा मूर्ति को बहुत गुस्सा आया. उन्होंने नोटिस पढ़ने के बाद जेआरडी टाटा को पत्र लिखने का निश्चय किया. उन्होंने इस पत्र में उनके विज्ञापन के लिए आपत्ति दर्ज कराई.
जेआरडी टाटा को लिखा था पत्र
उन्होंने अपने पत्र में जेआरडी टाटा को लिखा कि आपने देश के कई क्षेत्रों में बेहतरीन काम किया है. इस काम को देखकर मुझे गर्व होता है. मैंने आपका विज्ञापन देखा, जिसे देखकर मुझे हैरानी हुई कि टाट जैसी कंपनियों में भी लिंग के आधार पर भेदभाव किया जा रहा है. इस तरह के भेदभाव के कारण महिलाओं को मौका नहीं मिलेगा और वो आगे नहीं बढ़ पाएंगी. इस पत्र को भेजने के कुछ दिनों बाद टाटा की तरफ से उन्हें इंटरव्यू के लिए बुलाया गया.
टाटा कंपनी ने बदला नियम
सुधा मूर्ति ने इस इंटरव्यू को गंभीरता से लेकर तैयारी की और उनका चयन हुआ. इसके बाद वे पहली महिला इंजीनियर बनीं. सुधा मूर्ति के लिखे गए पत्र के कारण टाटा कंपनी ने अपना नियम बदला.
महिलाओं को भी मिलीं इंजीनियर की नौकरी
सुधा मूर्ति से पहले केवल पुरुष इंजीनियर को ही इंजीनियर के पद पर नौकरी दी जाती थी. उस पत्र के बाद पुरुषों ही नहीं महिलाओं के लिए भी नौकरियां निकलने लगीं और महिलाओं को भविष्य के लिए एक नया मौका मिला.
मिले ये सम्मान
उनकी इस कोशिश और समाजसेवा के कारण उन्हें पद्म भूषण, पद्म श्री, साहित्य अकादमी बाल साहित्य पुरस्कार, गलोबल इंडियन अवॉर्ड, लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड, रजा-लक्ष्मी अवार्ड और न्यायमूर्ति के.एस. हेगड़े फाउंडेशन अववॉर्ड से भी नवाजा गया.