देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी है इन आमों का जलवा, एक के पास तो है GI टैग भी, देखें Photos
भारत में मिलने वाले ये आम सिर्फ स्वादिष्ट नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र की विशेष पहचान भी रखते हैं. उनकी अलग-अलग पहचान भी उन्हें बेजोड़ बनाती है. इनकी मिठास व सुगंध के देश में तो लोग दीवाने हैं ही, विदेशों में भी ये आम बेहद पसंद किये जाते हैं. इनमें से कुछ प्रजातियों को तो GI टैग भी मिला है. आइये जानते हैं इन खास प्रजातियों के बारे में जिनके बेमिसाल स्वाद गर्मियों की शान हैं:
लंगड़ा आम
'लंगड़ा' आम' को बनारसी लंगड़ा के नाम से भी जाना जाता है, यह आम की एक किस्म है जिसकी खेती सबसे पहले वर्तमान उत्तर प्रदेश, बनारस में 250 से 300 साल पहले की गई थी. उत्तर प्रदेश के अलावा, यह बिहार और पश्चिम बंगाल राज्यों में भी उगाया जाता है. इसकी गुठली काफी पतली होती है.
दशहरी आम
दशहरी आम एक किस्म का आम है जिसकी उत्पत्ति लखनऊ जिले के मलिहाबाद के पास एक गांव में हुई थी. इस प्रजाति को GI टैग भी मिल चुका है. यह बेहद मीठा होता है और इसका गूदा मक्खन जैसा मुलायम होता है.
चौसा आम
यह आम हरदोई जिले में उगाया जाता है. इस आम का नाम शेरशाह सूरी ने चौसा का युद्ध जीतने के बाद चौसा के नाम पर रखा था. यह जुलाई के अंत तक बाजार में आ जाता है और इसमें रेशा बिल्कुल नहीं होता.
हुस्नआरा आम
यह आम भी लखनऊ में उगाया जाता है. इसके खूबसूरत आकार और रंग की वजह से इसका नाम हुस्नआरा पड़ा. इसका छिल्का हल्के लाल और सुनहरे रंग का होता है, जो देखने में बहुत सुंदर लगता है.
हापुस आम
यह आम की वो किस्म है जिसे सबसे ज्यादा निर्यात किया जाता है. 2012 में यूके में, इसे सबसे कीमती आमों में से एक माना जाता था. इसका गूदा केसरिया रंग का होता है और यह बेहद मीठा होता है.
रटौल आम
रटौल आम (विशेषकर 'अनवर रटौल') उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के रटौल गाँव में विकसित आम की एक अत्यंत सुगंधित और मीठी किस्म है, जो 1912 के आसपास पैदा हुई। यह छोटा, सुनहरा-पीला और फाइबर रहित आम अपनी अनूठी खुशबू के लिए प्रसिद्ध है, जिसे 2022 में जीआई (GI) टैग मिला है.