बीसीसीआई के हेड सेलेक्टर अजीत अगरकर और उनकी पत्नी फातिमा अगरकर 29 जुलाई को ACE जूनियर्स नाम से नया अर्ली लर्निंग सेंटर शुरू करने जा रहे हैं. यह संस्थान बच्चों में रचनात्मकता, भावनात्मक समझ, संचार कौशल और नेतृत्व क्षमता विकसित करने पर जोर देगा. शुरुआत प्री-स्कूल से होगी और आने वाले वर्षों में इसे किंडरगार्टन से 12वीं कक्षा तक के पूर्ण शैक्षणिक संस्थान के रूप में विकसित किया जाएगा.
अजीत अगरकर ने शुरू किया लर्निंग प्रोग्राम.
भारत के हेड सेलेक्टर अजीत अगरकर और उनकी पत्नी फातिमा अगरकर 29 जुलाई को ACE जूनियर्स नाम से एक आधुनिक अर्ली लर्निंग सेंटर की शुरुआत करने जा रहे हैं. इस संस्थान का उद्देश्य बच्चों को केवल किताबों तक सीमित शिक्षा देना नहीं, बल्कि उनमें रचनात्मक सोच, भावनात्मक समझ, बेहतर संवाद क्षमता और समस्या का समाधान करने जैसे महत्वपूर्ण जीवन कौशल विकसित करना है. यह पहल छोटे बच्चों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.
ACE जूनियर्स का पाठ्यक्रम दुनिया की कई प्रसिद्ध शिक्षा प्रणालियों से प्रेरित है. इसमें कैम्ब्रिज अर्ली ईयर्स, रेज्जियो एमिलिया, स्टाइनर एजुकेशन, अल्बर्टा करिकुलम और न्यूजीलैंड करिकुलम फ्रेमवर्क जैसे मॉडल शामिल किए गए हैं. साथ ही, इस पाठ्यक्रम को भारतीय संस्कृति, मूल्यों और बच्चों के विकास की आवश्यकताओं के अनुसार तैयार किया गया है ताकि उन्हें वैश्विक सोच के साथ भारतीय संस्कार भी मिल सकें.
बच्चों के सर्वांगीण विकास पर रहेगा विशेष जोर
फातिमा अगरकर, जो शिक्षाविद और अगरकर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की संस्थापक हैं, का कहना है कि आज की दुनिया में बच्चों के लिए केवल अच्छी पढ़ाई ही पर्याप्त नहीं है. उन्हें बदलते समय के अनुसार खुद को ढालने, दूसरों की भावनाओं को समझने, कठिन परिस्थितियों का सामना करने और आत्मविश्वास के साथ निर्णय लेने की क्षमता भी विकसित करनी होगी. उन्होंने बताया कि ACE जूनियर्स में बच्चों को खोज, प्रयोग और अनुभव आधारित शिक्षा के माध्यम से सीखने का अवसर मिलेगा.
प्री-स्कूल से शुरू होकर बनेगा K-12 शिक्षा संस्थान
शुरुआत में ACE जूनियर्स एक प्री-स्कूल के रूप में कार्य करेगा, लेकिन आने वाले वर्षों में इसे किंडरगार्टन से 12वीं कक्षा तक के पूर्ण शैक्षणिक संस्थान के रूप में विकसित किया जाएगा. अजीत अगरकर ने कहा कि क्रिकेट ने उन्हें सिखाया है कि सफलता केवल प्रतिभा से नहीं मिलती, बल्कि लगातार सीखने, टीमवर्क, परिस्थितियों के अनुसार खुद को बदलने और असफलताओं से उबरने की क्षमता से मिलती है. उनका मानना है कि ये जीवन कौशल बचपन से ही विकसित किए जाने चाहिए और ACE जूनियर्स इसी सोच के साथ बच्चों को बेहतर भविष्य देने का प्रयास करेगा.
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