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Dhruv Jurel: मां ने गहने बेचे, बिना बताए घर छोड़ा, कोच ने लिखी जिंदगी की इबारत, सोचने पर मजबूर कर देगा ध्रुव जुरेल का संघर्ष

Dhruv Jurel: क्रिकेट जगत को एक नया सितारा ध्रुव के रूप में मिल गया है. लेकिन, उनके संघर्ष की कहानी बहुत ही कम लोग जानते हैं. उन्होंने 13 साल की उम्र में घर छोड़ दिया था. नोएडा पहुंचे इस खिलाड़ी के जीवन में असली मोड़ यहीं से शुरू हुआ.

Dhruv Jurel: अगर दृढ़ संकल्प और सच्ची लगन से कोई काम किया जाए तो इंसान हमेशा एक नई इबारत लिखता है. ऐसा ही कुछ कर दिखाया है क्रिकेटर जुरेल ने जिनकी चर्चा हर तरफ हो रही है. मेहनत की एक कहानी में भारत के नवीनतम टेस्ट क्रिकेटर ध्रुव जुरेल ने बहुत ही साधारण शुरुआत से अपने क्रिकेटिंग सफर की शुरुआत की. साल 2014 में सिर्फ़ 14 साल की उम्र में जुरेल अकेले ही आगरा में अपना घर छोड़कर चले गए और वे नोएडा में एक क्रिकेट अकादमी के सामने जाकर खड़े हो गए.

यहां उन्हें उम्मीद थी कि वे अपने क्रिकेट के सपनों को पूरा कर पाएंगे. जाने-माने कोच फूल चंद की अकादमी के बाहर जुरेल अकेले खड़े थे. इसके बावजूद, उनका दृढ़ संकल्प साफ दिख रहा था जब उन्होंने अनुरोध किया, “सर मेरा नाम ध्रुव जुरेल है और कृपया मुझे अपनी अकादमी में ले लीजिए.” उस किशोर के शांत आत्मविश्वास से प्रभावित होकर चंद ने उसे अकादमी में शामिल कर लिया, जो एक शानदार सफ़र की शुरुआत थी.

पिता हैं रिटायर्ड हवलदार

जुरेल के पिता नेम चंद कारगिल युद्ध में सेवा दे चुके एक रिटायर्ड हवलदार हैं. शुरू में अपने बेटे की क्रिकेट की आकांक्षाओं को स्वीकार करने में वे हिचकिचा रहे थे. हालांकि, जब जुरेल ने अपने क्रिकेटिंग सफर की शुरुआत की, तो उन्हें अपने पिता की मृत्यु का शोक मनाने के लिए पीछे रहना पड़ा. उनकी अनुपस्थिति ने जुरेल को नहीं रोका, जो क्रिकेट के प्रति अपने जुनून को पूरा करने के लिए दृढ़ थे. 

फूल चंद ने उस खास दिन को याद करते हुए कहा, “मैंने उसके साथ किसी माता-पिता को नहीं देखा. एक 13 साल के लड़के को अकेले यात्रा करते देखकर मुझे पता था कि यह लड़का खास है.” शुरुआती चुनौतियों का सामना करने के बावजूद, जिसमें रहने की जगह और वित्तीय सहायता शामिल थी, जुरेल के समर्पण और प्रतिभा ने उन्हें आगे बढ़ाया.

शिक्षक ने थामा हाथ

“एक शिक्षक के लिए, अपने छात्र को उत्कृष्ट प्रदर्शन करते देखने से बड़ा दिन और क्या हो सकता है. वह मेरे छात्रों में से पहला है जो टेस्ट क्रिकेट खेलेगा और तेज़ गेंदबाज़ शिवम मावी के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने वाला दूसरा खिलाड़ी है.” फूल चंद नोएडा के सेक्टर 71 में अपनी अकादमी चलाते हैं. उन्होंने एक न्यूज एजेंसी से बात करते हुए कहा कि “मैं जानना चाहता था कि क्या बच्चा क्रिकेट खेलने के लिए घर से भागा था और मैंने उससे उसके पिता का नंबर मांगा. जब उसके पिता ने फोन उठाया, तो उन्होंने कन्फर्म किया कि वह आना चाहता था लेकिन उसके दादाजी की तेरहवीं (श्राद्ध) थी और बच्चे ने अपने पिता से कहा, चिंता मत करो, मैं आगरा से दिल्ली के लिए ट्रेन ले लूंगा.

फूल चंद ने पहचानी प्रतिभा

जुरेल का सीनियर टीम तक का सफर धीरे-धीरे लेकिन असरदार रहा. उन्होंने 2020 वर्ल्ड कप में रनर-अप रही इंडिया अंडर-19 टीम के वाइस-कैप्टन बनने से पहले एज-ग्रुप क्रिकेट में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया. उनके टैलेंट को और पहचान तब मिली जब उन्हें 2022 IPL ऑक्शन में राजस्थान रॉयल्स ने चुना और उन्होंने पिछले साल डेब्यू किया. कोच ने बताया कि 14 साल की उम्र से ही मैंने ध्रुव को दिल्ली और NCR के आसपास लोकल टूर्नामेंट में सैकड़ों मैच खिलाए और जितना ज़्यादा वह खेला, उतना ही बेहतर होता गया. मुझे याद है कि वैभव शर्मा मेमोरियल नाम का एक टूर्नामेंट था और मैंने ध्रुव के लिए एक क्लब ढूंढ लिया था, लेकिन क्योंकि वह छोटा था इसलिए वे उसे निचले क्रम में खिला रहे थे.

ध्रुव ने दिलाई जीत

उन्होंने आगे कहा कि “मैं टीम के मालिक के पास गया और उनसे रिक्वेस्ट की कि उसे ऊपरी क्रम में बैटिंग करने का एक मौका दें और उन्होंने मेरी बात मानी. जुरेल ने 38 गेंदों में 86 रन बनाकर अपनी क्लब को फाइनल जिताया.” जैसे ही जुरेल को टेस्ट कैप मिली तो फूल चंद के लिए भावनाएं उमड़ पड़ीं, जिन्होंने उसके शुरुआती विकास में अहम भूमिका निभाई थी. “एक टीचर के लिए, अपने स्टूडेंट को सफल होते देखने से बड़ा दिन और क्या हो सकता है?” जुरेल की सफलता की कहानी सिर्फ टैलेंट के बारे में नहीं है बल्कि उसे अपने परिवार और कोचों से मिले सपोर्ट के बारे में भी है. उसकी मां ने अटूट सपोर्ट दिखाते हुए उसे पहली क्रिकेट किट खरीदने के लिए अपने सोने के गहने गिरवी रख दिए. आर्थिक चुनौतियों के बावजूद जुरेल का दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत कभी कम नहीं हुई.

कोच ने जताया भरोसा

जुरेल के सफर पर सोचते हुए फूल चंद ने उसके भविष्य की सफलता पर भरोसा जताते हुए कहा, “मैंने उसे सुबह-सुबह मैसेज किया था कि इस दिन को यादगार बनाना और उसने कहा ‘मैं अपना बेस्ट दूंगा, सर.” राजकोट में इंग्लैंड के खिलाफ चल रहे तीसरे टेस्ट में जुरेल के डेब्यू परफॉर्मेंस ने उनकी शांति और स्किल को दिखाया, जिससे उनके कोच का उन पर भरोसा और पक्का हो गया. ध्रुव जुरेल का तेरहवीं के दुख से टेस्ट डेब्यू तक का प्रेरणादायक सफर उनकी सहनशक्ति, कड़ी मेहनत और पक्के इरादे का सबूत है. उनकी कहानी साधारण बैकग्राउंड वाले उभरते क्रिकेटरों के लिए उम्मीद की किरण है, जो दिखाती है कि लगन और मेहनत से सपने सच हो सकते हैं.

धोनी ने ध्रुव जुरेल से क्या कहा?

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया था जिसमें ध्रुव जुरेल की MS धोनी के प्रति दीवानगी और IPL 2021 के दौरान उनके बीच हुई खास बातचीत को दिखाया गया था. जुरेल ने धोनी की सलाह पर जोर दिया कि गेंद और खेल पर ध्यान दें, जिससे उनके क्रिकेटिंग सफर पर धोनी की गाइडेंस का गहरा असर पता चलता है. IPL 2021 के दौरान अपनी पहली मुलाकात को याद करते हुए जुरेल ने बताया कि वह धोनी को देखकर हैरान रह गए थे.

“मैं चुपचाप उन्हें देख रहा था, तभी अचानक मैं खड़ा हो गया यह सोचते हुए, ‘क्या यह MS धोनी मेरे सामने खड़े हैं?’ यह हमारी पहली बातचीत थी इसलिए मुझे खुद से कन्फर्म करना पड़ा ‘क्या यह सच है?’ धोनी के पास जाकर जुरेल ने पूछा “क्या मैं आपके साथ एक फोटो ले सकता हूँ?” फोटो के बाद धोनी ने उन्हें सलाह दी “बस बाहर जाओ, गेंद देखो और खेलने पर ध्यान दो.”

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