दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत (Late Actor Sushant Singh Rajput) के जन्मदिन पर आज भी उनके सैकड़ों फैन्स उन्हें याद कर रहे हैं और साथ ही उनके लिए लगातार इंसाफ भी मांग रहे हैं. बिहार के एक छोटे शहर से लेकर मायानगरी मुंबई में आकर अपनी एक्टिंग (Acting) से लाखों लोगों का दिल जीत लिया.
सुशांत सिंह राजपूत
Sushant Singh Rajput’s Journey: दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के जन्मदिन पर आज भी लाखों फैन्स उनको याद कर रहे हैं. अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत का सफर किसी फिल्मी पटकथा से बिल्कुल भी कम नहीं था, जिसमें एक छोटे शहर का लड़का अपनी आंखों में हजारों सपने लेकर निकलता है और अपनी कड़ी मेहनत के दम पर सफलता के शिखर को छूता है. तो वहीं, दूसरी तरफ उनका जीवन प्रेरणा और त्रासद मोड़ का एक ऐसा मिश्रण है, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था.
सुशांत सिंह राजपूत सिर्फ एक बेहतरीन अभिनेता ही नहीं थे, बल्कि एक असाधारण छात्र भी थे. उन्हें पढ़ने लिखने का शुरू से शौक था. साल 2003 में AIEEE में उन्होंने भारतीय इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में 7वीं रैंक हासिल कर अपने परिवार का नाम रोशन किया था. इतना ही नहीं, वे भौतिकी (Physics) में नेशनल ओलंपियाड के विजेता भी रह चुके हैं. इसके अलावा दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में दाखिला लेने के बाद भी, उनकी रुचि कला की तरफ तेजी से बढ़ने लगई, वहीं, से ही उन्होंने बॉलीवुड में एक्टर बनने का सपना देखा था. हालांकि, उनके पिता यह नहीं चाहते थे कि बेटा इंजीनियरिंग से फिल्मी दुनिया में कदम रखे.
सुशांत को ज्यादातर ‘दूसरा शाहरुख खान’ भी कहा जाता था. इसके पीछे की वजह यह थी कि शाहरुख की तरह सुशांत का भी फिल्म इंडस्ट्री में कोई ‘गॉडफादर’ या पारिवारिक कनेक्शन नहीं था. इतना ही नहीं, उन्होंने अपनी शुरुआत छोटे पर्दे के धारावाहिक ‘किस देश में है मेरा दिल’ से की, लेकिन उन्हें असली पहचान ‘पवित्र रिश्ता’ के ‘मानव’ के रूप में मिली, जिससे लाखों लोग ने खूब पसंद भी किया. तो वहीं, दूसरी तरफ उनकी प्रतिभा टीवी तक सीमित नहीं रही. साल 2013 में उन्होंने बॉलीवुड में अपना पहला कदम फिल्म ‘काय पो छे!’ से किया. इसके साथ ही उन्होंने ‘एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’, ‘छिछोरे’ और ‘सोनचिड़िया’ जैसी फिल्मों से साबित कर दिया कि वे एक मंझे हुए कलाकार हैं. वे सितारों, ब्रह्मांड और क्वांटम फिजिक्स में गहरी रुचि रखते थे, जो उन्हें अन्य अभिनेताओं से सबसे ज्यादा अलग बनाता था.
14 जून साल 2020 को ऐसी खबर आई जिसके बारे में किसी ने कभी सोचा ही नहीं था. सुशांत सिंह राजपूत अपने मुंबई स्थित फ्लैट में मृत पाए गए. उनकी मृत्यु की खबर ने न केवल बॉलीवुड बल्कि पूरे देश में शोक की लहर दौड़ा दी. उनकी मौत की खबर सामने आते ही लोगों के पैरों तले ज़मीन खिसक गई थी. भारतीय मीडिया और जांच एजेंसियों के इतिहास में एक नया अध्याय लिखा गया. उनकी मौत के बाद फिल्म इंडस्ट्री में ‘भाई-भतीजावाद’ और बाहरी लोगों के साथ होने वाले भेदभाव पर एक उग्र बहस छिड़ गई थी. इतना ही नहीं, इस मामले की जांच में CBI, ED और NCB जैसी बड़ी एजेंसियों तक को शामिल किया गया. सुशांत के प्रशंसकों ने ‘Justice for SSR’ मुहिम के जरिए महीनों तक सोशल मीडिया पर दबाव बनाए रखा
सुशांत सिंह राजपूत का जाना सिर्फ एक अभिनेता का खोना नहीं था, बल्कि उन करोड़ों युवाओं के सपनों का टूटना था जो बिना किसी सिफारिश के अपनी जगह बनाना चाहते हैं. वे आज भी अपनी फिल्मों और अपनी उन अधूरी डायरियों के जरिए लोगों के दिलों में जीवित हैं, जिनमें उन्होंने अपने 50 सपनों की सूची लिखी थी.
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