World Best Nuclear Submarines: सबमरीन सिर्फ़ पानी के अंदर गायब होने वाले जहाज़ से कहीं ज़्यादा हैं. सबसे अच्छी नावें क्रूज़ मिसाइल लॉन्च कर सकती हैं, पूरे समुद्र में दुश्मन के जंगी जहाज़ों को ट्रैक कर सकती हैं, स्पेशल फ़ोर्स तैनात कर सकती हैं, और कई महीनों तक छिपी रह सकती हैं.
दुनिया की 7 सबसे ताकतवर सबमरीन
World Top Nuclear Submarine: सबमरीन सिर्फ़ पानी के अंदर गायब होने वाले जहाज़ से कहीं ज़्यादा हैं. सबसे अच्छी नावें क्रूज़ मिसाइल लॉन्च कर सकती हैं, पूरे समुद्र में दुश्मन के जंगी जहाज़ों को ट्रैक कर सकती हैं, स्पेशल फ़ोर्स तैनात कर सकती हैं, और कई महीनों तक छिपी रह सकती हैं.
सबमरीन की पावर सिर्फ़ साइज़ या फ़ायरपावर से नहीं मापी जाती. स्टेल्थ, सेंसर, एंड्योरेंस और मिशन फ़्लेक्सिबिलिटी भी उतने ही मायने रखते हैं. इसे ध्यान में रखते हुए, आज चल रही सात सबसे मज़बूत सबमरीन के बारे में यहाँ बताया गया है.
आजकल की अटैक सबमरीन के लिए बेंचमार्क मानी जाने वाली वर्जीनिया-क्लास ब्लॉक V में जबरदस्त स्टेल्थ, एडवांस्ड सोनार सिस्टम और बेजोड़ मिशन फ़्लेक्सिबिलिटी है. लेटेस्ट नावें वर्जीनिया पेलोड मॉड्यूल को शामिल करती हैं, जो क्लास की इंटेलिजेंस इकट्ठा करने और स्पेशल ऑपरेशन की क्षमताओं को बनाए रखते हुए क्रूज़ मिसाइल की क्षमता को काफ़ी बढ़ाती हैं.
टॉमहॉक मिसाइलों और Mk 48 टॉरपीडो से लैस, वर्जीनिया सबमरीन का शिकार कर सकती है, जमीनी टारगेट पर हमला कर सकती है, और गुप्त ऑपरेशन में मदद कर सकती है. इसके लगातार अपग्रेड और बड़े प्रोडक्शन रन ने इसे आज के समय में शायद सबसे ज़्यादा काबिल और हर तरह से इस्तेमाल होने वाली सबमरीन बना दिया है.
रूस की यासेन-M अब तक बनी सबसे ज़्यादा हथियारों से लैस अटैक सबमरीन में से एक है. इसे मल्टीरोल प्लेटफॉर्म के तौर पर डिज़ाइन किया गया है, यह वर्टिकल लॉन्च ट्यूब से कैलिब्र क्रूज़ मिसाइल, ओनिक्स एंटी-शिप मिसाइल और ज़िरकॉन हाइपरसोनिक हथियार लॉन्च कर सकती है. इस क्लास में लंबी दूरी की स्ट्राइक कैपेबिलिटी के साथ एडवांस्ड सेंसर और पहले की रूसी सबमरीन के मुकाबले बेहतर स्टेल्थ है. हालांकि वर्जीनिया क्लास की तुलना में कम बनाई गई हैं, यासेन-M अभी भी सर्विस में सबसे मजबूत अंडरसी कॉम्बैट प्लेटफॉर्म में से एक है.
सफ़्रेन-क्लास, जिसे बाराकुडा क्लास के नाम से भी जाना जाता है, फ़्रांस की सबसे एडवांस्ड अटैक सबमरीन है. इसे इंटेलिजेंस इकट्ठा करने, एंटी-सबमरीन वॉरफेयर, ज़मीन पर हमला करने और स्पेशल फ़ोर्स मिशन के लिए डिज़ाइन किया गया है, इसमें एक कॉम्पैक्ट न्यूक्लियर रिएक्टर के साथ एडवांस्ड अकूस्टिक स्टेल्थ मेज़र हैं. यह क्लास क्रूज़ मिसाइल, हेवीवेट टॉरपीडो और नेवल कमांडो को तैनात कर सकती है, जबकि इसका पता लगाना बहुत मुश्किल होता है. इसका एडवांस्ड सेंसर सूट और मॉडर्न डिज़ाइन इसे यूरोप के सबसे काबिल अंडरवाटर कॉम्बैट सिस्टम में से एक बनाता है.
एस्ट्यूट-क्लास रॉयल नेवी के लिए बनाई गई अब तक की सबसे एडवांस्ड अटैक सबमरीन है. अपने शांत ऑपरेशन और पावरफुल सोनार सूट के लिए जानी जाने वाली, यह कथित तौर पर अच्छे हालात में सैकड़ों मील दूर जहाजों का पता लगा सकती है. टॉमहॉक क्रूज़ मिसाइल और स्पीयरफ़िश हेवीवेट टॉरपीडो से लैस, यह क्लास ब्रिटेन को लंबी दूरी तक हमला करने की ताकत देती है. इसका रिएक्टर सबमरीन की पूरी सर्विस लाइफ में बिना रीफ्यूलिंग के काम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिससे मेंटेनेंस की जरूरत कम होती है और अवेलेबिलिटी बढ़ती है.
अटैक सबमरीन के उलट, बोरेई-ए एक स्ट्रेटेजिक न्यूक्लियर डिटरेंट का काम करती है. बुलावा सबमरीन से लॉन्च होने वाली बैलिस्टिक मिसाइल ले जाने वाली, हर सबमरीन इंटरकॉन्टिनेंटल दूरियों तक कई न्यूक्लियर वॉरहेड पहुंचा सकती है.
बेहतर Borei-A डिज़ाइन में पहले की रूसी बैलिस्टिक मिसाइल सबमरीन के मुकाबले कम आवाज़ वाला प्रोपल्शन, बेहतर इलेक्ट्रॉनिक्स और बेहतर सर्वाइवेबिलिटी शामिल है. रूस के समुद्र-आधारित न्यूक्लियर डिटरेंट की रीढ़ होने के नाते, यह क्लास देश की स्ट्रेटेजिक डिफेंस पोजीशन में अहम भूमिका निभाती है.
जापान की ताइगेई-क्लास अब तक बनी सबसे एडवांस्ड पारंपरिक रूप से चलने वाली सबमरीन में से एक है. इसमें नेक्स्ट-जेनरेशन लिथियम-आयन बैटरी टेक्नोलॉजी है, जो पारंपरिक डीज़ल-इलेक्ट्रिक सबमरीन के मुकाबले ज़्यादा देर तक पानी के अंदर टिकने और बेहतर परफॉर्मेंस देती है. मुख्य रूप से इंडो-पैसिफिक में ऑपरेशन के लिए डिज़ाइन की गई, इस क्लास में एडवांस्ड सेंसर, कम अकूस्टिक सिग्नेचर और शक्तिशाली टॉरपीडो हथियार शामिल हैं. कई नेवी एनालिस्ट इसे दुनिया की सबसे काबिल नॉन-न्यूक्लियर सबमरीन में से एक मानते हैं.
हालांकि बहुत कुछ अभी भी क्लासिफाइड है, लेकिन उम्मीद है कि टाइप 095 चीन की सबसे एडवांस्ड न्यूक्लियर-पावर्ड अटैक सबमरीन बनेगी. एनालिस्ट का मानना है कि इसमें पिछले चीनी डिज़ाइन के मुकाबले स्टेल्थ, सेंसर और मिसाइल कैपेसिटी में काफी सुधार किए गए हैं. सैटेलाइट इमेजरी और डिफेंस असेसमेंट से पता चलता है कि इस क्लास का मकसद पश्चिमी और रूसी सबमरीन के साथ सीधे मुकाबला करना है. जैसे-जैसे चीन के नेवल एम्बिशन बढ़ रहे हैं, टाइप 095 के पीपल्स लिबरेशन आर्मी नेवी की अंडरसी फोर्स का एक अहम हिस्सा बनने की संभावना है.
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