T-20 World Cup 2024: न जादू, न किस्मत! रोहित और कोहली से लेकर बुमराह तक, जानें उन 5 भारतीय हीरोज के बारे में जिन्होंने भारत को T20 वर्ल्ड कप 2024 का चैंपियन बनाया. पूरी कहानी यहाँ पढ़ें.
भारतीय टीम ने साल 2024 में T20 वर्ल्ड कप फाइनल में साउथ अफ्रीका को हराकर 11 साल का सूखा खत्म किया था. रोहित शर्मा की कप्तानी वाली टीम ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया, ग्रुप स्टेज से लेकर फाइनल तक उनकी टीम ने अपना दम दिखाया. फाइनल में एक समय भारतीय टीम अच्छी स्थिति में नहीं थी, लेकिन गेंदबाजों ने आखिर में मैच का रुख पलट दिया और चैंपियनशिप जीतने में अहम भूमिका निभाई. हालांकि क्रिकेट एक टीम गेम है जहां जीत किसी एक खिलाड़ी के प्रदर्शन पर नहीं, बल्कि पूरे टीम के सामूहिक प्रयास पर निर्भर करती है, लेकिन वर्ल्ड कप जैसे टूर्नामेंट में हर टीम में कुछ ऐसे खिलाड़ी होते हैं जो अपने बेहतरीन प्रदर्शन से सबको प्रभावित करते हैं. आइये आज इस आर्टिकल में 2024 वर्ल्ड कप की यादें फिर ताजा करते हैं और उन खिलाड़ियों को गहराई से पढ़ते हैं जिन्होंने इस ट्रॉफी को भारत के नाम करने में अहम भूमिका निभाई.
बुमराह इस वर्ल्ड कप के किंग में से एक थे. उन्होंने सिर्फ विकेट ही नहीं लिए, बल्कि रनों की रफ़्तार पर ऐसा ब्रेक लगाया कि विपक्षी बल्लेबाज घुटने टेकने पर मजबूर हो गए. उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में सिर्फ 4.17 की इकॉनमी से रन दिए, जो T20 में मुश्किल माना जाता है. बुमराह ने वो सब करके दिखाया है जो एक बेहतरीन गेंदबाज से उम्मीद की जाती है. पाकिस्तान के खिलाफ हारा हुआ मैच जिताना हो या फाइनल में साउथ अफ्रीका के जबड़े से जीत छीनना. उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ भी चुना गया.
रोहित ने इस बार बल्लेबाजी के अपने पुराने अंदाज़ को बदला और ‘सेल्फलेस’ क्रिकेट खेली थी. उन्होंने कप्तानी और बैटिंग दोनों से टीम को लीड किया, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उनकी 92 रनों की पारी खेली और इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में अर्धशतक ने टीम को एक बड़े स्कोर तक पहुंचाया. रोहित ने पावरप्ले में आक्रामक बैटिंग करके मिडिल ऑर्डर के बल्लेबाजों का काम आसान कर दिया था और यही वजह रही की वर्ल्ड कप 2024 भारतीय टीम के नाम रही.
IPL के बाद हार्दिक के लिए यह वर्ल्ड कप किसी वापसी से कम नहीं था. उन्होंने बैट और बॉल दोनों से बैलेंस बनाया. पूरे टूर्नामेंट में 144 रन बनाए और 11 विकेट लिए. फाइनल का आखिरी ओवर कौन भूल सकता है? जब साउथ अफ्रीका को 16 रन चाहिए थे, तब हार्दिक ने डेविड मिलर का कैच आउट कराकर भारत की जीत पक्की कर दी.
अर्शदीप ने बुमराह के साथ मिलकर गेंदबाजी में ऐसी दीवार खड़ी की जिसे तोड़ना मुश्किल था. उन्होंने टूर्नामेंट में भारत के लिए सबसे ज्यादा 17 विकेट चटकाए. नई गेंद से विकेट चटकाना और डेथ ओवर्स में बुमराह का साथ देना अर्शदीप की सबसे बड़ी ताकत रही.
विराट के लिए पूरा टूर्नामेंट खराब जा रहा था, लेकिन उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन सबसे जरूरी दिन के लिए बचा कर रखा था. फाइनल में जब टीम 34/3 पर मुश्किल में थी, तब उनकी 76 रनों की संयमित पारी ने भारत को एक सम्मानजनक स्कोर (176) तक पहुँचाया. अगर विराट उस दिन टिककर नहीं खेलते, तो भारत के पास डिफेंड करने के लिए रन ही नहीं होते. उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ दिया गया.
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