T20 World Cup: साउथ अफ्रीका से हार के बाद क्या टीम इंडिया सेमीफाइनल से बाहर होगी? जानिए क्वालिफिकेशन का पूरा गणित और 5 दिग्गज क्रिकेटरों की वो 5 कड़वी सलाह, जो सब बदल देगी!
Indian Cricket Team: साउथ अफ्रीका ने T20 वर्ल्ड कप में अपनी पहली सुपर 8 जगह पक्की कर ली है. उन्होंने टीम इंडिया को बुरी तरह हराया, जिससे इंडिया का नेट रन रेट काफी कम हो गया. इस बीच, पहला मैच हारने के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या टीम इंडिया बाहर हो जाएगी या उसके सेमीफाइनल में पहुंचने का चांस अभी भी है. आइए, इक्वेशन पर एक नज़र डालते हैं और यहां से इंडियन टीम का रास्ता समझाते हैं. इंडियन टीम को सुपर 8 में तीन मैच खेलने हैं. पहला मैच पहले ही खेला जा चुका है. अब, दो और मैच बाकी हैं. इंडियन टीम का सामना जिम्बाब्वे और वेस्ट इंडीज से होगा. अब इंडिया के लिए अपने अगले दोनों मैच जीतना बहुत ज़रूरी है. यहां से हार का मतलब है कि खेल खत्म हो जाएगा. इंडियन टीम का अगला मुकाबला 26 फरवरी को जिम्बाब्वे से होगा, उसके बाद 1 मार्च को वेस्ट इंडीज से. सेमीफाइनल में जगह पक्की करने के लिए, इंडिया को ये दोनों मैच जीतने होंगे.
अगर टीम इंडिया ये दोनों मैच जीत जाती है, तो उसके चार पॉइंट्स हो जाएंगे, जो सेमीफाइनल की रेस में बने रहने के लिए ज़रूरी है. हालांकि, ये दोनों मैच जीतने पर भी सेमीफाइनल में जगह पक्की नहीं होगी. इसकी वजह साउथ अफ्रीका से मिली करारी हार है. साउथ अफ्रीका से 76 रन से हारने के बाद इंडिया का नेट रन रेट काफी कम होकर -3,800 हो गया है, जिसे बहुत खराब माना जाना चाहिए. अगर साउथ अफ्रीका ग्रुप में अपने बाकी बचे मैच जीत जाता है और इंडिया भी अपने अगले दो मैच जीत जाता है, तो इंडिया दूसरे नंबर पर रहकर क्वालीफाई कर सकता है.
इस बीच, वेस्टइंडीज और जिम्बाब्वे की टीमें मुश्किल खड़ी कर सकती हैं. अगर वेस्टइंडीज या जिम्बाब्वे अपने दो मैच जीत जाता है, तो उसके भी चार पॉइंट्स हो जाएंगे, और मामला नेट रन रेट पर तय होगा. इसलिए, यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि इंडिया को न सिर्फ जीतना है, बल्कि अपना रन रेट सुधारने के लिए बड़े अंतर से जीतना है। इस हार से जो कमी महसूस हुई है, उसे अगले मैच में पूरा करना होगा. सिर्फ जीत से काम नहीं चलेगा; एक बड़ी जीत की ज़रूरत होगी.
इंडियन टीम अपना पहला मैच साउथ अफ्रीका से हार चुकी है, लेकिन अब इंडिया को उनकी जीत के लिए दुआ करनी चाहिए. साउथ अफ्रीका के अगले मैच वेस्ट इंडीज़ और ज़िम्बाब्वे के खिलाफ़ हैं. अगर साउथ अफ्रीका जीत जाता है, तो इंडिया की आगे की राह आसान हो सकती है. इससे यह पक्का हो जाएगा कि साउथ अफ्रीका टेबल में टॉप पर बना रहे, जिससे बाकी तीन टीमें दूसरे स्थान के लिए लड़ेंगी, जहाँ टीम इंडिया के पास जीतने का मौका है.
अब आइये देखते हैं एक्सपर्ट्स की क्या राय है? इस हार के बाद उन्होंने टीम इंडिया को क्या सलाह दी है और किस एक्सपर्ट्स की राय भारतीय टीम के लिए मददगार साबित हो सकती है...
संजय मांजरेकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ट्वीट करते हुए भारत की हार का विश्लेषण किया और सुधार के लिए तीन मुख्य बिंदु बताए. सॉफ्ट स्किल्स वाले बल्लेबाजों को स्पिन के खिलाफ बैटिंग ऑर्डर में ऊपर भेजना चाहिए. थ्रोडाउन के दौरान भारतीय बल्लेबाजों को लगातार स्लो बॉल खिलाकर प्रैक्टिस कराई जा रही है, जिस पर ध्यान देने की जरूरत है. कुलदीप यादव को टीम में शामिल करना चाहिए ताकि विकेट लेने का एक अतिरिक्त विकल्प मौजूद रहे.
सुनील गावस्कर ने भारतीय बल्लेबाजों के रवैये और ओवरकॉन्फिडेंस पर सवाल उठाए. उनका मानना था कि भारतीय बल्लेबाजों को डेविड मिलर और डेवाल्ड ब्रूइस की पार्टनरशिप से सीखना चाहिए था. गावस्कर ने कहा कि भारतीय टीम ओवरकॉन्फिडेंट होकर आई और हर गेंद पर हिट करने के चक्कर में विकेट गंवाए. उन्होंने सलाह दी कि बल्लेबाजों को अपना ईगो (अहंकार) छोड़कर पिच की कंडीशंस के हिसाब से खेलना चाहिए था, जैसा कि साउथ अफ्रीका ने किया.
आकाश चोपड़ा ने साफ कहा कि सिर्फ 'मैच-अप' के चक्कर में अपने वाइस-कैप्टन अक्षर पटेल को बाहर करना समझ से परे है. उनका तर्क है कि जब भारतीय टीम में खुद 6 लेफ्ट-हैंडर्स थे, तब भी साउथ अफ्रीका ने अपने मुख्य स्पिनर केशव महाराज को ड्रॉप नहीं किया, तो हमने ऐसा क्यों किया? मजे की बात तो ये रही कि जिन लेफ्ट-हैंडर्स को रोकने के लिए ये सारी प्लानिंग हुई, वे जल्दी आउट हो गए और पूरी स्ट्रैटेजी धरी की धरी रह गई. आकाश का मानना है कि बड़े मैचों में आंकड़ों से ज्यादा भरोसे की जरूरत होती है. अगर आप अपने उप-कप्तान को ही प्लेइंग XI में जगह नहीं दे पा रहे, तो इससे टीम के आत्मविश्वास पर गलत असर पड़ता है.
अजिंक्य रहाणे ने टीम सिलेक्शन, खासकर अक्षर पटेल को बाहर रखने पर हैरानी जताई. रहाणे ने कहा कि वॉशिंगटन सुंदर एक अच्छे खिलाड़ी हैं, लेकिन अक्षर पटेल हर सिचुएशन में बेहतर प्रदर्शन करते आए हैं. उनका तर्क था कि सिर्फ विपक्षी टीम में लेफ्ट-हैंडेड बल्लेबाज होने के कारण ऑफ-स्पिनर को लाना हमेशा सही नहीं होता. उन्होंने जोर दिया कि अक्षर पटेल टीम के वाइस-कैप्टन हैं और उनका रिकॉर्ड लेफ्ट-हैंडर्स के खिलाफ अच्छा है, इसलिए उन्हें बाहर रखना गलत फैसला था.
टीम के असिस्टेंट कोच ने अक्षर पटेल को न खिलाने के पीछे की रणनीति साझा की. डोएशेट ने बताया कि साउथ अफ्रीका के टॉप ऑर्डर में क्विंटन डी कॉक, रयान रिकेल्टन और डेविड मिलर जैसे खतरनाक लेफ्ट-हैंडेड बल्लेबाज थे. टीम मैनेजमेंट को लगा कि पावरप्ले में वॉशिंगटन सुंदर, अक्षर पटेल की तुलना में अधिक प्रभावी साबित हो सकते हैं. यह फैसला पूरी तरह से टीम कॉम्बिनेशन और मैच की परिस्थितियों को देखते हुए लिया गया था.
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