मीराबाई चानू ने CWG 2026 में रचा इतिहास! 190kg वजन उठाकर महिलाओं की 48kg कैटेगरी में जीता लगातार तीसरा गोल्ड मेडल और लगाई 'गोल्डन हैट्रिक'. पढ़ें पूरी खबर.
मीराबाई चानू ने रविवार (26 जुलाई 2026) को एक बार फिर साबित कर दिया कि उन्हें भारतीय वेटलिफ्टिंग की बेताज रानी क्यों कहा जाता है. महिलाओं के 48 किलोग्राम भारवर्ग में एक चैंपियन की तरह शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने लगातार तीसरी बार कॉमनवेल्थ गेम्स (Commonwealth Games) में स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया.
मुकाबले का नतीजा लगभग पहले से तय माना जा रहा था; सवाल बस इतना था कि मीराबाई जीत के इस आंकड़े को कितना आगे ले जाती हैं. मणिपुर की इस स्टार एथलीट ने अपनी ताकत और धैर्य के दमदार प्रदर्शन से न केवल सभी सवालों का जवाब दिया, बल्कि रिकॉर्ड बुक्स में एक नया इतिहास दर्ज कर दिया.
31 वर्षीय मीराबाई ने स्नैच (Snatch) वर्ग में राष्ट्रमंडल और राष्ट्रमंडल खेल (CWG) दोनों के पुराने रिकॉर्ड्स को ध्वस्त कर दिया. इसके साथ ही उन्होंने ‘क्लीन एंड जर्क’ और ‘टोटल लिफ्ट’ में भी नए सीडब्ल्यूजी रिकॉर्ड बनाए. उन्होंने स्नैच में 85 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 105 किलोग्राम का सर्वश्रेष्ठ प्रयास करते हुए कुल 190 किलोग्राम भार उठाया.
मीराबाई का दबदबा ऐसा था कि नाइजीरिया की सिल्वर मेडल विजेता रुथ असुकवो नियोंग (Ruth Asuquo Nyong) कुल 168 किग्रा वजन उठाकर काफी पीछे दूसरे स्थान पर रहीं. वह मीराबाई के विजयी स्कोर से पूरे 22 किग्रा पीछे थीं. देखा जाए तो जब बाकी सभी एथलीट्स का मुकाबला खत्म हो चुका था, तब चानू ने अपने अभियान की शुरुआत की थी.
हालांकि, इस स्वर्णिम सफर की शुरुआत थोड़ी घबराहट भरी रही. मीराबाई स्नैच के अपने पहले प्रयास में 82 किलोग्राम भार उठाने में चूक गईं. लेकिन एक सच्चे चैंपियन के मिजाज के मुताबिक, उन्होंने तुरंत अपनी लय हासिल की और वही जज्बा व क्लास दिखाया जिसके लिए उनका शानदार करियर जाना जाता है.
क्लीन एंड जर्क में भी मीराबाई को शुरुआत में थोड़ा झटका लगा, जब वह अपने पहले प्रयास को पूरा नहीं कर सकीं. हालांकि, इस ओलंपिक पदक विजेता ने पलटवार करते हुए अपने दूसरे प्रयास में 105 किलोग्राम वजन को बड़ी आसानी से उठा लिया.
इस लिफ्ट के साथ ही उन्होंने न केवल स्वर्ण पदक पक्का किया, बल्कि क्लीन एंड जर्क वर्ग और कुल लिफ्ट के कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड को भी अपने नाम कर लिया.
गोल्ड मेडल पक्का होने के बाद मीराबाई ने कोई गैर-जरूरी जोखिम नहीं उठाया और अपना तीसरा प्रयास छोड़ दिया. उनका पूरा ध्यान दो महीने से भी कम समय में आयोजित होने वाले एशियन गेम्स पर है, जिसके लिए उन्होंने खुद को सुरक्षित रखना बेहतर समझा.
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