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कौन हैं नंदन नीलेकणि? जिन्हें PM मोदी ने सौंपी देश की परीक्षाओं को ‘लीक-प्रूफ’ बनाने की कमान

NEET-UG और UGC-NET पेपर लीक पर PM मोदी का बड़ा फैसला. नंदन नीलेकणि संभालेंगे लीक-प्रूफ सिस्टम की कमान, दोषियों को 8 साल की जेल व 10Cr का जुर्माना.

हाल के दिनों में NEET-UG और UGC-NET जैसी बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक के मामलों ने देशभर के छात्रों और अभिभावकों का भरोसा तोड़ दिया था. इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर युवाओं से संवाद करते हुए एक अहम ऐलान किया है.

सार्वजनिक परीक्षाओं को पूरी तरह पारदर्शी और लीक-प्रूफ बनाने के लिए सरकार ने इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अगुवाई में एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है. यह टास्क फोर्स आधुनिक तकनीक की मदद से ऐसा डिजिटल ढांचा तैयार करेगी, जिससे परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे.

इसके साथ ही, सरकार संसद में कानून को और सख्त करने के लिए विधेयक लाने की तैयारी में है.

कौन हैं नंदन नीलेकणि?

2 जून 1955 को बेंगलुरु में जन्मे नंदन मोहनराव नीलेकणि भारत के सबसे प्रभावशाली टेक दिग्गजों में गिने जाते हैं. IIT बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग करने के बाद उन्होंने 1978 में पटनी कंप्यूटर सिस्टम्स से अपने करियर की शुरुआत की.

1981 में उन्होंने एन. आर. नारायणमूर्ति और अन्य 5 साथियों के साथ मिलकर इंफोसिस की स्थापना की. 2002 से 2007 तक सीईओ रहते हुए उन्होंने कंपनी का राजस्व 6 गुना बढ़ाकर लगभग 3 अरब डॉलर पहुंचा दिया. 2017 में संकट के समय वे दोबारा इंफोसिस में नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के रूप में लौटे.

UPI और डिजिटल इंडिया

नीलेकणि की सबसे बड़ी पहचान भारत के बायोमेट्रिक पहचान पत्र ‘आधार’ के जनक के रूप में है. 2009 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उन्हें UIDAI (भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण) का प्रमुख बनाया था. आज आधार भारत की डिजिटल शासन प्रणाली, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर और वित्तीय समावेशन का आधार स्तंभ बन चुका है.

भारत में डिजिटल पेमेंट की क्रांति लाने वाले UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) के ढांचे को आकार देने में भी उनकी बेहद अहम भूमिका रही है.

राजनीतिक सफर

2014 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर बेंगलुरु दक्षिण से लोकसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन बीजेपी के अनंत कुमार से हार गए. इसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली और अपना पूरा ध्यान तकनीक, सार्वजनिक नीति और समाज सेवा पर केंद्रित किया.

पीएम मोदी ने नीलेकणि को ही क्यों चुना?

सार्वजनिक परीक्षाओं पर देश के करोड़ों युवाओं का भरोसा फिर से कायम करने के लिए सरकार को एक ऐसे विशेषज्ञ की जरूरत थी जो बड़े पैमाने पर सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार कर सके. आधार और UPI जैसे विशाल राष्ट्रीय डिजिटल प्रोजेक्ट्स को सफलतापूर्वक लागू करने का उनका अनुभव उन्हें इस काम के लिए सबसे उपयुक्त बनाता है.

10 करोड़ जुर्माना, 8 साल तक की जेल

तकनीकी सुधारों के साथ-साथ सरकार सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में कड़े संशोधन करने जा रही है, ताकि दोषियों को जल्द और कड़ी सजा दिलाई जा सके.

प्रस्तावित कानून के मुख्य बिंदु

गंभीर अपराधों के लिए जुर्माना बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये तक और जेल की सजा 8 साल तक करने का प्रस्ताव है.
परीक्षा से जुड़ी धांधली की जांच के लिए विशेष एसटीएफ का गठन किया जाएगा.
FIR दर्ज होने के बाद जांच को 2 महीने के भीतर पूरा करना अनिवार्य होगा.
चार्जशीट दाखिल होने के बाद रोजाना सुनवाई होगी और 3 महीने के भीतर मुकदमा पूरा करना होगा.
हाई कोर्ट को फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसलों के खिलाफ अपील का निपटारा 3 महीने में करना होगा.

Shivani Singh

शिवानी सिंह पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया में सब-एडिटर, एंकर और कंटेंट स्ट्रैटेजिस्ट के रूप में सक्रिय हैं. उन्होंने पत्रकारिता में हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा, महाराष्ट्र से एमए की पढ़ाई पूरी की है. 'Chakde Cricket', 'InKhabar' और 'Bihari News' जैसे प्रमुख मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ काम करने के बाद वर्तमान में 'इंडिया न्यूज़' में अपनी सेवाएं दे रही हैं. क्रिकेट से जुड़ी खबरों के साथ-साथ राजनीति, बिजनेस, सरकारी योजनाओं, पर्सनल फाइनेंस और मनोरंजन से जुड़े विषयों पर लेखन और कंटेंट तैयार करने का अनुभव है. ट्रेंडिंग खबरों पर भी उनकी खास नजर रहती है. जटिल विषयों को आसान और स्पष्ट भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है.

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