T20 World Cup: विश्व कप के फॉर्मेट में पिछले कई सालों से लगातार बदलाव किया जा रहा है. अक्सर वर्ल्ड कप के क्वालीफाइंग स्ट्रक्चर में कोई न कोई खामी पाई जाती है. ऐसे में आइए जानते हैं कि वर्ल्ड कप में बदलाव के पिछले 50 सालों का इतिहास...
टी20 वर्ल्ड कप 2026.
T20 World Cup 2026: टी20 वर्ल्ड कप 2026 का लीग स्टेज खत्म हो चुका है. अब अगले राउंड यानी सुपर-8 के मुकाबले खेले जाएंगे. इस राउंड में 2 ग्रुप बनाए गए हैं. इनमें से ग्रुप-1 में भारत, वेस्टइंडीज, साउथ अफ्रीका और जिम्बाब्वे शामिल हैं. ये सभी टीमें अपने-अपने लीग स्टेज ग्रुप के टेबल टॉपर्स हैं. वहीं, ग्रुप स्टेज में दूसरे नंबर पर आने वाली सभी टीमों को ग्रुप-2 में रखा गया है. इसको लेकर इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) की आलोचना की जा रही है कि आखिर सभी नंबर-1 टीमें एक ग्रुप में क्यों रखी गई हैं. इसकी साफ वजह है प्री-सीडिंग. दरअसल, ICC ने टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ही टॉप टीमों को स्लॉट (जैसे ए1, बी1, सी1 और डी1) दे दिए थे. ऐसा इसलिए किया गया, जिससे सुपर-8 के मैचों के लिए वेन्यू में बदलाव न करना पड़े. टी20 वर्ल्ड कप 2026 भारत और श्रीलंका की मेजबानी में खेला जा रहा है. पाकिस्तान का कहना है कि वह भारत में कोई भी मैच खेलने के लिए नहीं जाएगी.
ऐसे में पाकिस्तान के सभी मुकाबले श्रीलंका में भी शेड्यूल किए गए हैं. इसके अलावा श्रीलंका टूर्नामेंट का सह-मेजबान है, जिससे सभी मैच अपने देश में खेलना उनका हक है. ऐसे में ICC ने सुपर-8 के लिए प्री-सीडिंग की. हालांकि इससे सुपर-8 में असंतुलन पैदा हो गया. ग्रुप-स्टेज में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली सभी 4 टीमें एक ही ग्रुप में आ गईं. अब इनमें से सिर्फ 2 ही टीमें सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई करेंगी, जिससे 2 टीमों को बाहर होना पड़ेगा. वहीं, ग्रुप-2 में दूसरे स्थान पर रहने वाली टीमें शामिल हैं, जिन्हें सेमीफाइनल में जाने का आसान रास्ता मिल जाएगा.
अब सवाल आता है कि आखिर प्री-सीडिंग क्यों की जाती है. इसकी वजह है कि पहले से वेन्यू तय करना. प्री-सीडिंग के जरिए ब्रॉडकास्टर महीनों पहले ही शेड्यूल तय कर सकते हैं. इससे ग्रुप स्टेज के रिजल्ट की परवाह नहीं करनी पड़ती है. खासकर इससे भारत-पाकिस्तान जैसे बड़े मैचों की गारंटी मिल जाती है. साथ ही प्री-सीडिंग से यह भी पहले ही सुनिश्चित हो जाता है कि भारत के सुपर 8 मैचों के फिक्स्चर विज्ञापनदाताओं को बेचे जा सकें.
ICC ने वनडे विश्व कप और टी20 वर्ल्ड कप के इतिहास में बार-बार फॉर्मेट में बदलाव किया है. ऐसे में आइए जानते हैं कि वर्ल्ड कप फॉर्मेट का इतिहास…
साल 1987 वनडे क्रिकेट वर्ल्ड कप तक सिंपल फॉर्मेट था. इसमें कुल 8 टीमों को 2 ग्रुप में बांटा गया था, जिसमें टॉप-2 टीमें सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई करती थीं, लेकिन इससे हर टीम एक-दूसरे के खिलाफ मैच नहीं खेल पाती थी. इसका रिजल्ट रहा कि 1992 तक वनडे वर्ल्ड कप में भारत और पाकिस्तान का आमना-सामना नहीं हुआ. 1975, 1979, 1983 और 1987 वनडे वर्ल्ड के दौरान भारत-पाकिस्तान को अलग-अलग ग्रुपों में रखा गया.
साल 1992 के वनडे वर्ल्ड कप के लिए ICC ने बदलाव किया. इस बार कुल 9 टीमों के बीच राउंड-रॉबिन फॉर्मेट में मुकाबला खेला गया. इसमें टॉप-4 टीमों ने सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई किया. इस फॉर्मेट में सभी टीमों ने एक-दूसरे के खिलाफ मैच खेला. इसे अभी तक का सबसे निष्पक्ष वनडे वर्ल्ड कप भी माना जाता है.
इस साल 12 टीमों को 2 ग्रुप में बांटा गया. इनमें से हर ग्रुप से 4 टीमों ने क्वार्टर फाइनल के लिए क्वालीफाई किया. इससे एक ग्रुप में सभी टीमों को 2 मैच हारने के बाद भी क्वालीफाई करने का मौका मिला. इस वनडे वर्ल्ड कप में क्वार्टरफाइनल में भारत ने पाकिस्तान को हराया, जिसके बाद सेमीफाइनल में श्रीलंका ने भारत को हरा दिया.
1999 वनडे विश्व कप में सुपर सिक्स सिस्टम शुरू किया गया. हर ग्रुप से टॉप-3 टीमें अगले राउंड में गईं, जहां पर उन्हें अन्य क्वालीफायर टीमों के खिलाफ खेलकर आगे जाने का मौका मिला. इससे फैंस को टीमों की रैंकिंग पता लगाने में भी परेशानी होती थी. साथ ही इस फॉर्मेट में यह कमी भी थी कि सेमीफाइनल टाई होने के बाद रन रेट के आधार पर किसी टीम को टूर्नामेंट से बाहर किया जा सकता था.
इस वनडे वर्ल्ड कप में कुल 14 टीमें शामिल थीं, जिनके बीच सुपर-6 के फॉर्मेट में मुकाबला खेला गया. ऐसे में एक बार फिर रैंकिंग को लेकर उलधन होने लगी. पाकिस्तान, इंग्लैंड, वेस्ट इंडीज और साउथ अफ्रीका जैसी टीमें टूर्नामेंट के शुरुआती दौर में भी बाहर हो गईं. केन्या ने सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई किया, जहां पर उसका मुकाबला भारत से हुआ. हालांकि कई फैंस इस उलधन में पड़ गए कि आखिर केन्या ने सेमीफाइनल के लिए कैसे क्वालीफाई किया.
साल 2007 के वनडे विश्व कप में कुल 16 टीमें थीं, जिन्हें 4-4 के ग्रुप में बांटा गया. हर ग्रुप में से टॉप-2 टीमों ने सुपर-8 के लिए क्वालीफाई किया. इसके बाद सुपर-8 में हर ग्रुप से टॉप-2 टीमें ने सेमीफाइनल में अपनी जगह बनाई. इस साल भारत और पाकिस्तान ग्रुप स्टेज से ही बाहर हो गए.
साल 2011 के वनडे विश्व कप में एक बार फिर फॉर्मेट में बदलाव किया गया. इस बार 2 ग्रुप बनाए गए, जिसमें क्वार्टरफाइनल और फिर सेमीफाइनल का प्रावधान रखा गया. इससे फैंस को रैंकिंग समझने में आसानी हुई. 2015 वनडे वर्ल्ड कप में भी यही फॉर्मेट लागू रहा.
फिर साल 2019 में एक बार फिर राउंड रॉबिन फॉर्मेट में टूर्नामेंट का आयोजन किया गया. टॉप-4 टीमों ने सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई किया. साल 2019 में फाइनल का मैच टाई होने का बाद सुपर ओवर हुआ. इसके बाद सुपर ओवर टाई हुआ, तो बाउंड्री की संख्या के आधार पर फैसला किया गया. फिर साल 2023 में भी इसी फॉर्मेट में टूर्नामेंट का आयोजन किया गया, जो सही फैसला साबित हुआ.
साल 2007 में टी20 वर्ल्ड कप शुरू हुआ. 2007 से लेकर 2016 तक इस टूर्नामेंट में सुपर-8 और सुपर-4 फॉर्मेट लागू किया गया. इससे फैंस को रैंकिंग आसानी से समझ में आ जाती थी. हालांकि साल 2027 में बॉल-आउट का नियम थोड़ा संदिग्ध था, लेकिन फैंस को समझने में मुश्किल नहीं हुआ.
फिर साल 2021 और 2022 में सुपर-12 फॉर्मेट आया. इसमें कुल 16 टीमें शामिल की गईं, जिन्हें क्वालीफाइंग राउंड के बाद 6-6 टीमों के 2 ग्रुप में बांटा गया. इनमें से दोनों ग्रुप में से टॉप-2 टीमें सेमीफाइनल में गईं.
साल 2024 के टी20 वर्ल्ड कप में बदलाव किया गया. इस टूर्नामेंट में कुल 20 टीमों को शामिल किया गया. साथ ही सुपर-8 की शुरुआत हुई. इसी बीच ICC ने वर्ल्ड कप के सिस्टम में प्री-सीडिंग को शामिल कर लिया. सुपर एट ग्रुप का ICC रैंकिंग के आधार पर टीमें तय की गईं. इस साल भारत ने फाइनल का मुकाबला जीता और ट्रॉफी अपने नाम की.
टी20 वर्ल्ड कप 2026 में सुपर-8 फॉर्मेट लागू किया गया. हालांकि इसमें खामी भी सामने आई. इसकी वजह थी कि ICC ने प्री-सीडिंग की थी. इससे टॉप करने वाली टीमें एक ही ग्रुप में शामिल हो गईं, जिससे उनकी राह मुश्किल हो गई.
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