दुनिया की सबसे बड़ी टी20 क्रिकेट लीग आईपीएल में सिर्फ खिलाड़ी ही नहीं, अंपायर भी मैच के बहुत अहम हिस्से होते हैं. मैदान पर उनके फैसले कई बार मैच का नतीजा तय कर देते हैं. यही वजह है कि आईपीएल में अंपायरों का चयन बहुत सोच-समझकर किया जाता है. आईपीएल में अंपायरों की नियुक्ति (बीसीसीआई) करता है. बीसीसीआई का अंपायरिंग विभाग और चयन समिति तय करती है कि टूर्नामेंट में कौन-कौन से अंपायर मैच कराएंगे.
आईपीएल में सीधे अंपायर नहीं बना जा सकता. इसके लिए पहले घरेलू क्रिकेट में अंपायरिंग का अनुभव हासिल करना पड़ता है. अंपायरों का चयन उनके अनुभव और योग्यता के आधार पर किया जाता है. इस दौरान यह देखा जाता है कि उन्हें क्रिकेट के नियमों की कितनी अच्छी जानकारी है, उनकी फिटनेस कैसी है और वे मैदान पर सही फैसला लेने में कितने सक्षम हैं. जो अंपायर रणजी ट्रॉफी और दूसरे घरेलू टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन करते हैं, उन्हें आगे चलकर आईपीएल में मौका मिल सकता है.
मैच में अंपायरों की भूमिका
एक आईपीएल मैच में आमतौर पर चार अंपायर होते हैं. इनमें दो ऑन-फील्ड अंपायर होते हैं, जो मैदान पर खड़े होकर फैसले लेते हैं. तीसरा थर्ड अंपायर होता है, जो टीवी रीप्ले देखकर करीबी फैसलों की जांच करता है. चौथा फोर्थ अंपायर होता है, जो मैच से जुड़ी व्यवस्थाओं और अन्य जरूरी कामों में मदद करता है.
आईपीएल अंपायरों की सैलरी
आईपीएल में अंपायरों को अच्छी कमाई होती है. भारतीय अंपायरों को लगभग 40,000 से 1,00,000 रुपये प्रति मैच फीस मिलती है. वहीं इंटरनेशनल या एलीट पैनल के अंपायरों को करीब 2.5 लाख से 4 लाख रुपये प्रति मैच तक मिल सकते हैं. इसके अलावा उन्हें यात्रा, होटल और अन्य सुविधाएं भी दी जाती हैं.
अंपायर बनने की योग्यता
आईपीएल में अंपायर बनने के लिए क्रिकेट के नियमों की अच्छी समझ होना जरूरी है. इसके साथ ही कई साल का अंपायरिंग अनुभव और अच्छी शारीरिक फिटनेस भी जरूरी होती है. अंपायर को मैदान पर दबाव के बीच शांत रहकर सही फैसला लेने में सक्षम होना चाहिए. साथ ही उन्हें तकनीक जैसे DRS और वीडियो रीप्ले सिस्टम की जानकारी भी होनी चाहिए. यही कारण है कि आईपीएल जैसी बड़ी लीग में सिर्फ अनुभवी और योग्य अंपायरों को ही मौका मिलता है.