Lionel Messi: भारतीय फुटबॉल के दिग्गज बाइचुंग भूटिया ने इसे 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया और देश में 'VIP कल्चर' की आलोचना की.
Lionel Messi
Lionel Messi: अर्जेंटीना के दिग्गज फुटबॉल खिलाड़ी लियोनेल मेसी इस समय GOAT इंडिया टूर पर हैं. कोलकाता से शुरू हुए लियोनेल मेसी के GOAT इंडिया टूर का आज तीसरा दिन है. कोलकाता के साल्ट लेक स्टेडियम में मेसी के लिए जबरदस्त क्रेज था, जो बाद में अफरा-तफरी में बदल गया. लियोनेल मेसी की एक झलक पाने के लिए हजारों फैंस महंगे टिकट खरीदकर साल्ट लेक स्टेडियम पहुंचे थे, लेकिन उन्हें मेसी की एक झलक भी नहीं मिल पाई. गुस्साए फैंस बेकाबू हो गए और कुछ दर्शकों ने कुर्सियां तोड़ दीं और मैदान में भी घुस गए.कोलकाता में इस अफरा-तफरी पर रिएक्शन देते हुए, भारतीय फुटबॉल के दिग्गज बाइचुंग भूटिया ने इसे ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ बताया और देश में ‘VIP कल्चर’ की आलोचना की.
ANI से बात करते हुए उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि यह बहुत बुरा है. मुझे लगता है कि ऑर्गनाइज़र ने अपनी पूरी कोशिश की लेकिन कभी-कभी यह कंट्रोल से बाहर हो जाता है, खासकर VIP कल्चर ऑर्गनाइज़र के लिए भी बहुत मुश्किल हो जाता है कि वे बहुत सारे VIPs को रोक सकें जिन्हें वहां नहीं होना चाहिए, मुझे लगता है कि वे अंदर आ गए और भीड़ लगा दी. असली फैंस को मेसी को देखने का मौका नहीं मिला.”
उन्होंने आगे कहा “तो, मुझे लगता है कि यहीं पर फैंस बहुत परेशान थे. उम्मीद है मुझे लगता है कि इस तरह की गलतियां नहीं होंगी. मैंने सुना है कि 80,000 लोग मेसी को देखने आए थे. यह जानते हुए कि कोलकाता और भारत में मेसी की पूजा की जाती है, जब वे इतनी ज़्यादा कीमत देकर और इतनी दूर से आकर निराश होते हैं, तो मुझे लगता है कि यह बहुत निराशाजनक है. मुझे लगता है कि सरकार ने कुछ कदम उठाए हैं. मेरा बस यही सुझाव है कि मुझे लगता है कि भविष्य में इसे बहुत अच्छे से ऑर्गनाइज़ किया जाना चाहिए और साथ ही, बहुत सारे अनचाहे VIPs को आसपास आने से बचना चाहिए”, .
लियोनेल मेसी का कोलकाता आना एक बड़े स्टेडियम शो की तरह प्लान किया गया था. एक एग्ज़िबिशन मैच, “GOAT Tour” का खास पल और मैदान पर उनकी मौजूदगी — यही इस कार्यक्रम का आकर्षण था. एक एग्ज़िबिशन मैच, एक “GOAT Tour” स्टेज मोमेंट, और दोपहर को खत्म करने के लिए एक छोटी सी ऑन-ग्राउंड अपीयरेंस. इन सब के उलट सॉल्ट लेक स्टेडियम में यह आयोजन अव्यवस्था का शिकार हो गया.
मेसी का मैदान पर समय बहुत कम था थोड़ा घूमना, हाथ हिलाना और दर्शकों का अभिवादन. ज़्यादातर लोग सिर्फ उसी “एक पल” के लिए आए थे. ऐसे में अगर देरी हो या समय कम लगे, तो लोगों को निराशा होना तय है.
कई लोगों ने बताया कि मेसी के चारों तरफ कड़ी सुरक्षा और अधिकारी मौजूद थे. स्टेडियम में देखने का अनुभव बहुत मायने रखता है. जब मेसी साफ़ न दिखें, तो माहौल “खुला जश्न” नहीं, बल्कि “VIP कॉरिडोर” जैसा लगने लगता है.
टिकट काफी महंगे थे. महंगे टिकट का मतलब सिर्फ एंट्री नहीं, बल्कि पूरा अनुभव होता है. जब लोगों को लगा कि अनुभव उम्मीद के मुताबिक नहीं मिला, तो नाराज़गी जल्दी बढ़ी.
कार्यक्रम में पहले एग्ज़िबिशन मैच था, फिर मेसी का खास सेगमेंट. ऐसा फॉर्मेट बहुत नाज़ुक होता है. अगर टाइमिंग बिगड़े या स्टेडियम में सही जानकारी न मिले, तो भीड़ का सब्र जवाब दे देता है.
जब चीज़ें मैदान में फेंकी जाने लगीं और लोग बैरिकेड तोड़ने की कोशिश करने लगे, तो साफ हो गया कि भीड़ नियंत्रण व्यवस्था कमजोर पड़ गई थी. साथ ही यह सवाल भी उठा कि स्टेडियम के अंदर क्या-क्या ले जाने दिया गया.
इसके बाद का नतीजा जल्द ही खेल से आगे बढ़ गया. अधिकारियों ने “मिसमैनेजमेंट” की जांच की घोषणा की, जो इस गड़बड़ी के बड़े लेवल को दिखाता है. आसान शब्दों में कहें तो, कोलकाता में “फैन प्रॉब्लम” से ज़्यादा एग्जीक्यूशन प्रॉब्लम देखी गई. एक बहुत ज़्यादा उम्मीदों वाला इवेंट जो प्रेशर बढ़ने पर अपने डायनामिक्स को कंट्रोल नहीं कर सका.
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