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‘हम सचिन नाम के शख्स से हार गए’, किसने और क्यों कही थी ये ऐतिहासिक लाइन, क्या है इसके पीछे की कहानी?

Sachin Tendulkar Historic Century: साल 1998 में सचिन तेंदुलकर ने शारजाह में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ऐतिहासिक शतकीय पारी खेली थी. इसके दम पर भारत ने फाइनल के लिए क्वालीफाई किया था. फिर फाइनल में सचिन तेंदुलकर के शतक के दम पर भारत ने ऑस्ट्रेलिया को हरा दिया था.

Ind vs AUS, 1998: ‘हम किसी टीम से नहीं हारे, हम सचिन नाम के एक व्यक्ति से हारे.’ ये ऐतिहासिक लाइन क्रिकेट फैंस के लिए काफी यादगार है. यह लाइन ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान मार्क टेलर ने भारत के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) के लिए कही थी. उस समय ऐसा लगा जैसे कोई कप्तान ड्रेसिंग रूप में मैच की हार का सटीक कारण बता रहा है. इसके पीछे की वजह थी कि भारत के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर की ऐतिहासिक 143 रनों की पारी. सचिन तेंदुलकर की यह पारी साल 1998 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ आई थी. इस पारी को रेतीली तूफान का पारी भी कहा जाता है.

दरअसल, 1998 में शारजाह क्रिकेट स्टेडियम में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच कोका-कोला कप का मैच खेला जा रहा था. इस मुकाबले में सचिन तेंदुलकर अकेले पूरी ऑस्ट्रेलियाई टीम पर भारी पड़े थे. उन्होंने 131 गेंदों पर 143 रनों बेहतरीन पारी खेली थी. हालांकि इसके बावजूद भारतीय टीम यह मुकाबला हार गई थी, लेकिन भारत ने फाइनल के लिए क्वालीफाई कर लिया था. आइए जानते हैं इस मैच की पूरी स्टोरी…

ऑस्ट्रेलिया ने दिया था 285 का टारगेट

22 अप्रैल 1998 को भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच कोका कोला कप का मैच खेला गया. इस मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवरों में 7 विकेट के नुकसान पर 284 रन बनाए. ऑस्ट्रेलिया के सलामी बल्लेबाज मार्क वॉ ने 81 रनों की शानदार पारी खेली. वहीं, माइकल बेवन ने 101 रनों की शतकीय पारी खेली. इसके दम पर ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 285 रनों का टारगेट दिया. इसके बाद मोहम्मद अजहरुद्दीन की कप्तानी वाली भारतीय टीम टारगेट चेज करने के लिए उतरी. भारत की पारी के दौरान रेतीला तूफान आ गया, जिसके चलते 25 मिनट तक खेल को रोक दिया गया. इसके चलते ओवरों में कटौती हुई और भारत को खेलने के लिए 46 ओवर मिले. ऐसे में भारत को टारगेट का पीछा करते हुए 2 चीजों की जरूरत थी. पहला कि भारत को जीत के लिए 46 ओवर में 276 रन चाहिए, जबकि दूसरा फाइनल में क्वालीफाई करने के लिए 46 ओवर्स में 237 रन.

सचिन ने खेली ऐतिहासिक पारी

भारत की ओर से सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुल पारी की शुरुआत करने उतरे. 38 के स्कोर पर भी भारत ने सौरव गांगुली (17) का विकेट गंवा दिया. इसके बाद नयन मोंगिया और सचिन तेंदुलकर के बीच अच्छी साझेदारी हुई, लेकिन 107 रन के स्कोर पर नयन (35)  भी आउट हो गए. इससे भारतीय टीम पर दबाव बढ़ने लगा, लेकिन सचिन तेंदुलकर ने एक छोर संभाले रखा. उन्होंने ऑस्ट्रेलिया को हावी नहीं होने दिया. उस मैच में ऑस्ट्रेलिया की ओर से माइकल कास्प्रोविच, डेमियन फ्लेमिंग और शेन वार्न जैसे दिग्गज गेंदबाज गेंदबाजी कर रहे थे, जिनके सामने टारगेट चेज करना बेहद मुश्किल था. हालांकि सचिन तेंदुलकर ने किसी भी गेंदबाज को खुद पर हावी नहीं होने दिया. सचिन तेंदुलकर 131 गेंदों पर 143 रन बनाकर आउट हुए. इसके दम पर भारत ने 46 ओवर में 250 रन बना लिए. भारत भले ही यह मैच हार गया, लेकिन फाइनल के लिए क्वालीफाई कर गया.

फाइनल में सचिन ने जड़ा दूसरा शतक

इसके 2 दिन बार फाइनल में भारत और ऑस्ट्रेलिया का आमना-सामना हुआ. इस मैच में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 6 विकेट से हरा दिया. ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 9 विकेट खोकर 272 रन बनाए थे. ऑस्ट्रेलिया की ओर से स्टीव वॉ और डैरेन लेहमैन ने 70-70 रनों की शानदार पारी खेली. इससे भारत को 273 रनों का टारगेट मिला. इस बार ऑस्ट्रेलिया टीम को उम्मीद थी कि वे सचिन तेंदुलकर को जल्दी आउट कर लेंगे, लेकिन ऐसा करने में नाकाम रहे. भारत ने टारगेट का पीछा करते हुए एक बार फिर 39 रनों पर सौरव गांगुली (23) का विकेट गंवा दिया था. वहीं, सचिन तेंदुलकर ने मोर्चा संभाला हुआ था. सचिन ने 131 गेंदों पर 134 रनों की ऐतिहासिक पारी खेली. इसके अलावा कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन ने 58 रनों की शानदार पारी खेली. इसकी बदौलत भारत ने 48.3 ओवर में ही टारगेट चेज कर लिया.

सचिन ने 3 दिन में 2 बार ऑस्ट्रेलिया को हराया

सचिन तेंदुलकर के 2 ऐतिहासिक शतक के दम पर भारत ने ऑस्ट्रेलिया को सिर्फ 3 दिनों के अंदर दो बार हराया था. सचिन की बल्लेबाजी के आगे ऑस्ट्रेलियाई टीम घुटने टेकने पर मजबूर हो गई थी. इसको लेकर ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान ने कहा था, ‘हम किसी टीम से नहीं हारे, हम सचिन नाम के एक आदमी से हारे’. साल 2000 में जिम्बाब्वे क्रिकेट टीम के तत्कालीन कप्तान एलिस्टेयर कैंपबेल ने भी कुछ ऐसा ही कहा था, जब सचिन तेंदुलकर ने अकेले के दम पर उनकी टीम को हरा दिया था. इसके अलावा साल 2003 में शोएब अख्तर ने भी ऐसा ही बयान दिया था, जब 2003 क्रिकेट वर्ल्ड कप के दौरान भारत ने पाकिस्तान को शिकस्त दी थी.

Ankush Upadhyay

अंकुश उपाध्याय युवा पत्रकार हैं. उन्होंने चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी (CCS) से अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई की है. फिलहाल वह इंडिया न्यूज डिजिटल के साथ जुड़कर स्पोर्ट्स के लिए लेखन का काम कर रहे हैं. इससे पहले वह हरिभूमि डिजिटल डिपार्टमेंट में बतौर लेखक अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

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