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Mamata Banerjee SIR News: SIR केस में नया मोड़, ममता बनर्जी की दलीलों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

Mamata Banerjee On SIR: पश्चिम बंगाल में एसआईआर को चुनौती देने वाली मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका पर चुनाव आयोग के जवाब की आज सुनवाई होने वाली है. सरनेम के आधार पर नाम हटाए जाने का खतरा पर सुप्रीम कोर्ट

Written By: Vipul Tiwary
Last Updated: 2026-02-09 16:04:12

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ममता बनर्जी एसआईआर: ममता बनर्जी एसआईआर पर बीते सप्ताह सर्वोच्च न्यायालय में पेश हुई और एक भाषण में चुनाव आयोग के विरुध अपनी शिकायतें बताते हुए, सुप्रिम कोर्ट से हाथ जोड़कर ‘लोकतंत्र को बचाने’ की मांग की. चुनाव आयोग पर खास आरोप लगाते हुए, ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में तार्किक विसंगति सूची में शामिल 1.36 करोड़ मतदाताओं के नाम को लेकर जमकर विरोध जताया है. 

पश्चिम बंगाल SIR मामले पर SC में सुनवाई जारी

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई जारी है. वरिष्ठ वकील वीवी गिरि ने कहा कि हमने कुछ राहत की मांग करते हुए एक अर्जी दायर की है.

राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने कहा, मंदिरों की देखभाल करने वाले इस आवेदक ने अब यह अर्जी दायर की है.

SG तुषार मेहता ने सवाल उठाया कि मंदिरों के प्रति यह घृणा क्यों है? 

जस्टिस बागची ने कहा कि जो मंदिर जाता है, वह मतदान केंद्र भी जा सकता है

ममता बनर्जी के वकील श्याम दीवान ने क्या कहा

ममता बनर्जी के वकील श्याम दीवान ने कहा, पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया चल रही है. यह प्रक्रिया 14 फरवरी को समाप्त होगी. मांगी गई राहतों के लिए अत्यधिक तत्परता आवश्यक है. कृपया ध्यान दें कि मसौदा मतदाता सूची में 7.08 करोड़ मतदाता हैं . इनमें से 6.75 करोड़ मतदाताओं का मानचित्रण किया गया है . जिसका अर्थ है कि उनका नाम 2002 की सूची में था . या उस सूची से उनकी पहचान की जा सकती है. 32 लाख मतदाता मानचित्रित नहीं थे. मैं मानचित्रित मतदाताओं की सूची में शामिल हूं. 1.36 करोड़ मतदाताओं को तार्किक विसंगति सूची में रखा गया है.

वोटर्स के नाम हटाने का खतरा

ममता बनर्जी ने दावा किया है कि इन वोटर्स के नाम ‘सरनेम की गलत वर्तनी’ या विवाह के बाद बेटियों के पते में बदलाव जैसी त्रुटियों के आधार पर हटाए जाने का खतरा है. साथ ही उन्होंने राज्य में चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त 8,300 सूक्ष्म पर्यवेक्षकों की तैनाती का मुद्दा भी उठाया, जिन्हें उन्होंने केंद्र सरकार के अधिकारी बताया और कहा कि वे बिना किसी अधिकार के असंवैधानिक रूप से वोटर्स  के नाम को हटा रहे हैं.

चुनाव आयोग के वकील डीएस नायडू ने आगे कहा

हमने पांच पत्र लिखकर कहा है कि ERO अर्ध-न्यायिक प्राधिकरण हैं और हमें एसडीएम आदि की आवश्यकता है. उन्होंने केवल 64 ऐसे अधिकारी दिए हैं जो न्यायनिर्णय और निर्णय कर सकते हैं. बाकी उन्होंने वेतन समानता के आधार पर दिए हैं… जैसे इंजीनियर आदि.  वे किसी भी तरह से न्यायनिर्णय प्रक्रिया का संचालन नहीं करते हैं. वे कहते हैं कि अधिकारियों ने चुनावों में काम किया. लेकिन SIR में उन्हें ऐसे निर्णय पारित करने होते हैं जिन्हें अपीलीय मंचों में चुनौती दी जाएगी. हमें यह जानने की आवश्यकता है कि ये 8,500 अधिकारी क्या काम कर रहे थे. CJI सूर्यकांत ने कहा कि हम बाधाएं दूर करेंगे . लेकिन हम SIR के पूरा होने में कोई रुकावट नहीं डालेंगे. इस बारे में बिल्कुल स्पष्ट रहें: CJI सूर्य कांत

विधानसभा चुनाव 2025 की मौजूदा वोटर लिस्ट के आधार पर हो

सुप्रीम कोर्ट से अपील करते हुए ममता बनर्जी ने कहा है कि पश्चिम बंगाल में आने वाले विधानसभा चुनाव 2025 की मौजूदा वोटर लिस्ट के मुताबिक होना चाहिए, नहीं कि एसआईआर के बाद बनी नई लिस्ट के आधार पर. क्योंकि लाखों सही वोर्टर्स के इससे नाम हटाए जाने का खतरा है.

 मतदाताओं के नाम गुप्त रूप से हटाए जा रहे 

ममता बनर्जी ने कहा कि केवल उनके राज्या को निशाना बनाया जा रहा है, चुनाव आयोग को 1.4 करोड़ विवादित मतदाताओं के नाम ऑनलाइन सर्च करने योग्य प्रारूप में उपलब्ध कराने चाहिए. आगे उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अपील की कि चुनाव आयोग को विसंगति के मामलों में आधार कार्ड को पहचान के पर्याप्त प्रमाण के रूप में स्वीकार करने के लिए कहा जाए. उन्होंने आगे आरोप लगाते हुए कहा है कि बल्क फॉर्म-7 आवेदनों के माध्यम से मतदाताओं के नाम गुप्त रूप से सामूहिक रूप से हटाए जा रहे हैं और इसे रोकने की अपील की है.

 सुप्रिम कोर्ट ने नोटिस जारी कर चुनाव आयोग से मांगा जवाब 

इस मामले पर सुप्रिम कोर्ट ने नोटिस जारी कर चुनाव आयोग से जवाब मांगा, जिसकी सुनवाई आज होगी. इसी के साथ ही, भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने उनसे अनुरोध किया था कि वे अपने वकील श्याम दीवान को उनकी ओर से बहस करने की आज्ञा दें.

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