Live
Search
Home > राज्य > बिहार > अगर बिहार में जमीन खरीद रहे हैं, तो हो जाएं सावधान!

अगर बिहार में जमीन खरीद रहे हैं, तो हो जाएं सावधान!

बिहार में जमीन खरीदते समय खाता-प्लॉट जांच, म्यूटेशन और लगान रसीद की पुष्टि, जमीन पर बैंक लोन न होना, नक्शा व नापी से वास्तविक प्लॉट मिलान, बाउंड्री व जेसीबी से छिपे दावों की पहचान, परिवार के गवाह और तुरंत दाखिल-खारिज जैसी सावधानियां भविष्य के विवादों से बचाती हैं.

Written By: Shivangi Shukla
Last Updated: 2025-12-10 17:21:56

Mobile Ads 1x1

Bihar: हाल के कुछ वर्षों में बिहार में भूमि विवाद लगातार बढ़ रहे हैं, खासकर दाखिल-खारिज, फर्जी कागजात और कब्जे से जुड़े मामलों में. राज्य सरकार भूमि सुधार और पारदर्शिता पर जोर दे रही है, लेकिन सुरक्षित सौदा करने की जिम्मेदारी खरीददार पर भी है.

बीते कुछ सालों में बिहार में भूमि-विवाद से संबंधित मुकदमों की बढ़ोत्तरी होती जा रही है, इसलिए भूमि खरीद-फरोख्त मामले में सावधान होने की आवश्यकता है. 

सरकारी सख्ती 

भूमि राजस्व विभाग के मंत्री विजय सिन्हा ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जमीन से जुड़े सभी आवेदनों का समय पर निपटारा हो और फर्जी कागजात पर कड़ी कार्रवाई की जाए. इसके लिए निरीक्षण हेतु विशेष उड़न दस्ते भी बनाए गए हैं, जो जमीन माफियाओं के साथ विभागीय मिलीभगत पर भी कार्रवाई कर सकते हैं.

पहला कदम: खाता और प्लॉट की पूरी जांच

जमीन खरीदने से पहले विक्रेता से खाता संख्या और प्लॉट संख्या अवश्य लें. किसी भरोसेमंद वेंडर या रजिस्ट्री कार्यालय के माध्यम से यह जांचना जरूरी है कि जमीन सरकारी, आम उपयोग की या विवादित तो नहीं है. खाता और प्लॉट की पूरी जांच से पहले भूमि की खरीद के लिए किसी तरह की कोई जमानत राशि देने की भूल न करें. 

म्यूटेशन और लगान रसीद देखे बिना सौदा नहीं

सुरक्षित सौदे के लिए यह देखना जरूरी है कि जिस व्यक्ति से आप खरीद रहे हैं, उसके नाम पर म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) हो चुका है या नहीं. नवीनतम लगान रसीद मांगकर यह सुनिश्चित करें कि राजस्व अभिलेखों में उसी के नाम दर्ज है, ताकि भविष्य में स्वामित्व पर सवाल न उठें. ​

बैंक लोन और ओरिजिनल कागजात की पुष्टि

कई बार जमीन पर पहले से बैंक लोन होता है और खरीदार को पता ही नहीं चलता. सुरक्षित रहने के लिए ओरिजिनल रजिस्ट्री पेपर देखने पर जोर दें, क्योंकि आम तौर पर बैंक लोन होने पर यही दस्तावेज अपने पास रखता है; अगर मूल कागज उपलब्ध नहीं हैं तो सतर्क हो जाएं. 

नक्शा, नापी और मौके की हकीकत

जमीन का आधिकारिक नक्शा जरूर लें और राजस्व अमीन से नपवाएं कि जो प्लॉट आपको दिखाया जा रहा है, वही कागजों में दर्ज है या नहीं. कई बार दलाल एक प्लॉट की रजिस्ट्री कराते हैं और कब्जा किसी दूसरे स्थान पर दिलाते हैं, जो आगे चलकर बड़े विवाद की वजह बन सकता है.​

बाउंड्री और जेसीबी से छिपे दावों का खुलासा

रजिस्ट्री से पहले जमीन की बाउंड्री कराना और वहां जेसीबी मशीन चलवाना एक व्यावहारिक सावधानी मानी जा रही है. यदि किसी और का इस जमीन पर दावा है या छिपा हुआ कब्जा है, तो वह अक्सर इसी चरण में सामने आ जाता है और आप समय रहते सौदा रोक सकते हैं.​

परिवार के गवाह क्यों जरूरी हैं?

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि विक्रेता के परिवार के बालिग बेटे-बेटी, पति या पत्नी को रजिस्ट्री में गवाह बनाना बहुत जरूरी है. इससे बाद में उत्तराधिकार या हिस्सेदारी के नाम पर नया दावा खड़ा होना कठिन हो जाता है, क्योंकि परिवार ने खुद लेन-देन की पुष्टि की होती है.​

रजिस्ट्री के तुरंत बाद दाखिल-खारिज

केवल रजिस्ट्री करा लेना ही पर्याप्त नहीं है; उसके तुरंत बाद अपने नाम से म्यूटेशन या दाखिल-खारिज कराना भी उतना ही जरूरी है. इससे राजस्व रिकॉर्ड में आप वैधानिक स्वामी के रूप में दर्ज हो जाते हैं और भविष्य में टैक्स, मुआवजा या सरकारी योजनाओं से जुड़े अधिकार सुरक्षित रहते हैं.

कमजोर कागज दिखें तो सौदा रोक दें

यदि विक्रेता कागजात अधूरे दिखाए, पुरानी रसीदें दे, या मूल दस्तावेज देने में बहाने करे, तो इसे खतरे की घंटी मानें. सतर्क खरीददार सही दस्तावेज, स्पष्ट स्वामित्व और पूरी कानूनी प्रक्रिया पर जोर देकर न केवल अपनी जमीन सुरक्षित करता है, बल्कि जीवन भर चलने वाली कानूनी लड़ाइयों से भी बच सकता है.

MORE NEWS

Home > राज्य > बिहार > अगर बिहार में जमीन खरीद रहे हैं, तो हो जाएं सावधान!

Written By: Shivangi Shukla
Last Updated: 2025-12-10 17:21:56

Mobile Ads 1x1

MORE NEWS