Bhagalpur, Bihar: नागरमल बाजोरिया, जिन्हें "धरती पकड़" के नाम से जाना जाता है, का 280 से अधिक चुनाव लड़ने के बाद 96 वर्ष की आयु में निधन हो गया. वो इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और प्रणब मुखर्जी के खिलाफ चुनाव में भी खड़े हुए थे.
नागरमल बाजोरिया
Bihar News: भागलपुर के नागरमल बाजोरिया, जिन्हें चुनाव लड़ने के अपने बेमिसाल रिकॉर्ड के लिए “धरती पकड़” के नाम से जाना जाता था, का 3 सितंबर को पटना में 96 वर्ष की आयु में निधन हो गया. बाजोरिया ने अभी तक 280 से अधिक बार चुनाव लड़ा है, जिनमें ग्राम पंचायत वार्ड चुनाव से लेकर राष्ट्रपति चुनाव तक शामिल थे. वे हर बार हारे, लेकिन उन्होंने इन हारों को कभी भी चुनाव लड़ने से पीछे हटने का कारण नहीं माना. उनका अंतिम संस्कार शुक्रवार को भागलपुर के बरारी स्थित श्मशान घाट में होगा.
उनकी चुनावी यात्रा 1969 में शुरू हुई जब उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति वी.वी. गिरि के खिलाफ नामांकन दाखिल किया. वर्षों से, नागरमल बाजोरिया ने देश के कुछ सबसे बड़े राजनीतिक नामों को भी चुनौती दी. उन्होंने रायबरेली में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और अमेठी में राजीव गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ा, जिससे उनकी असाधारण राजनीतिक यात्रा ने राष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया.
2012 में, उन्होंने प्रणब मुखर्जी के खिलाफ राष्ट्रपति चुनाव लड़कर अपने चुनावी अभियान को उच्चतम स्तर तक पहुंचाया. उनके नामांकन में राजनीतिक व्यवस्था के लगभग हर स्तर शामिल था. बाजोरिया ग्राम पंचायत वार्ड से लेकर राष्ट्रपति पद तक के चुनाव में शामिल थे. बाजोरिया के लिए जीत कभी मुख्य लक्ष्य नहीं थी. वे कहते थे कि उनका उद्देश्य लोकतंत्र में आम आदमी की शक्ति को लोगों तक पहुंचाना था. हर हार के बाद उन्होंने फिर से प्रयास किया और दोबारा चुनाव लड़ने के उनके दृढ़ संकल्प के कारण ही भागलपुर के लोग उन्हें “धरती पकड़” कहने लगे.
बाजोरिया का परिवार 1930 में लाहौर से भागलपुर आया था, और यह शहर दशकों तक उनका कार्यस्थल और सामाजिक एवं चुनावी गतिविधियों का केंद्र बना रहा. राजनीति के साथ-साथ वे सामाजिक सेवा में भी गहराई से जुड़े रहे और लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन से संबंधित रहे. अपने जीवन के अंतिम वर्षों में भी, जब उन्हें वृद्धावस्था संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा, नागरमल बाजोरिया का चुनाव के प्रति जुनून कम नहीं हुआ. वे चुनावी भागीदारी को एक आम नागरिक के लिए लोकतंत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का एक तरीका मानते रहे.
हालांकि उनके प्रतिद्वंद्वी हर चुनाव में उन्हें हराने में कामयाब रहे, लेकिन बाजोरिया ने निराशा के आगे घुटने नहीं टेके बल्कि उन्होंने परिणाम की परवाह किए बिना, बार-बार चुनाव में भाग लेने और संघर्ष जारी रखने का विकल्प चुना. उनका पूरा जीवन इस बात का उदाहरण हो सकता है कि लोकतंत्र की प्रक्रिया में एक आम नागरिक का विश्वास कैसे काम करता है. वास्तव में, नागरमल बाजोरिया के लिए चुनाव कभी भी सिर्फ सीट जीतने का अवसर नहीं थे. उन्होंने लोकतंत्र में आम आदमी को प्रदत्त अधिकार का उपयोग किया और इस बात की मिसाल कायम की कि लोकतंत्र में देश का कोई भी योग्य व्यक्ति चुनाव लड़ सकता है.
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