Delhi Liquor Scam: दिल्ली शराब नीति मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में आज सुनवाई हुई. जहां अरविंद केजरीवाल ने खुद अपनी दलीलें पेश की. इसके अलावा, उन्होंने जज के खिलाफ रिक्यूज़ल की अर्जी दाखिल की.
दिल्ली शराब नीति मामले में अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट में खुद अपनी दलीलें पेश की.
Delhi Liquor Scam: दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े सीबीआई से मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है. दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल व अन्य की अर्जी पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू हुई है. जानकारी सामने आ रही है कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है.
बताया जा रहा है कि केजरीवाल ने हाईकोर्ट में खुद पेश होकर अपनी दलीलें पेश की. इस दौरान उन्होंने कहा कि मैंने जज को केस अलग करने की अर्जी दायर की है. इसे रिकॉर्ड में लिया जाए.
हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल से पूछा कि क्या आप अपना मामला खुद रखेंगे? तो इस पर जवाब देते हुए केजरीवाल ने कहा कि मैं खुद बहस करूंगा. केजरीवाल ने कोर्ट में जज के खिलाफ रिक्यूज़ल (hearing से अलग होने) की अर्जी दाखिल की. इस पर जवाब देते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कोर्ट में मर्यादा होनी चाहिए, यह मेरी याचिका है. इसके अलावा, उन्होंने कहा कि अब तक 7 रिक्यूज़ल आवेदन आ चुके हैं, यह बेहद गंभीर मामला है. कुछ लोग आरोप लगाकर करियर बनाते हैं, हम संस्था का समर्थन करेंगे. अब इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई 13 अप्रैल, दोपहर 2:30 बजे तय की.
यह याचिका प्रवर्तन निदेशालय की एक अपील के जवाब में दायर की गई है, जिसमें उसने निचली अदालत द्वारा जारी एक आदेश को चुनौती दी थी. केजरीवाल और अन्य लोगों को एक ऐसे मामले में बरी कर दिया गया था, जिसमें उन पर शराब नीति की जांच के दौरान जारी समन का कथित तौर पर पालन न करने का आरोप था. 22 जनवरी को दिए अपने फैसले में राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने केजरीवाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था और जांच एजेंसी के काम करने के तरीके पर सवाल उठाए थे. इसके बाद, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने उच्च न्यायालय का रुख किया.
इससे पहले, केजरीवाल ने मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय से संपर्क कर मामले को किसी दूसरे जज को सौंपने की मांग की थी. हालांकि, न्यायमूर्ति उपाध्याय ने इस अनुरोध को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि किसी मामले से खुद को अलग करने का फैसला पूरी तरह से संबंधित जज का होता है. उन्होंने कहा कि इस मामले से खुद को अलग करने का फैसला संबंधित जज को ही लेना होगा.
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