Delhi Tree Census: दिल्ली में पहली बार पेड़ों की गिनती की जाएगी. जिसके लिए केंद्र सरकार ने 2.9 करोड़ रुपये जारी किए हैं. यह काम 4 साल की अवधि में 3 चरणों में पूरा किया जाएगा. ध्यान देने वाली बात है कि ये गणना गैर वन क्षेत्रों तक सीमित होगी.
Delhi Tree Census: राजधानी दिल्ली में पेड़ों की गिनती करने और उन्हें टैग करने के लिए अपनी पहली आधिकारिक और पूरी तरह से गणना करने के लिए तैयार है. इस मामले से जुड़े अधिकारियों ने जानकारी देते हुए बताया कि केंद्र सरकार ने इस काम के लिए वन अनुसंधान संस्थान (FRI) को ₹2.9 करोड़ जारी किए हैं. यह काम चार साल की अवधि में तीन चरणों में पूरा किया जाएगा और इसके जल्द ही शुरू होने की उम्मीद है.
हालांकि, पूरे शहर के लिए पेड़ों की गणना करना ‘दिल्ली वृक्ष संरक्षण अधिनियम 1994’ के तहत अनिवार्य है, लेकिन इस अधिनियम के लागू होने के बाद से अब तक कोई आधिकारिक गणना नहीं हुई है.
दिसंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने ‘दिल्ली वृक्ष प्राधिकरण’ (DTA) को राजधानी में पेड़ों की गणना करने का निर्देश दिया था. बाद में उसने देहरादून स्थित FRI को इस गणना की देखरेख करने के लिए कहा था. इस योजना के बारे में दिल्ली सरकार के अधिकारियों ने जानकारी देते हुए बताया कि इस गणना में केवल गैर-वन क्षेत्रों को शामिल किया जाएगा. यह जनगणना दिल्ली के पेड़ों के बारे में एक आधारभूत और दीर्घकालिक डेटाबेस उपलब्ध कराएगी, जिसमें मूल रूप से सभी शहरी क्षेत्र शामिल होंगे.
मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से जानकारी सामने आ रही है कि यह पूरा सर्वेक्षण तीन विशेषज्ञ सदस्यों सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी सुनील लिमाये और एमडी सिन्हा और वृक्ष विशेषज्ञ प्रदीप कृष्ण के मार्गदर्शन में किया जाएगा.
अधिकारी ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि पहले चरण (Phase-1) को पूरा करने का प्रस्ताव स्वीकृत कर लिया गया है. जिसमें गणना की कार्यप्रणाली तैयार की जाएगी. इसके लिए 2.9 करोड़ रुपये की राशि भी जारी कर दी गई है. इसके अलावा, उन्होंने आगे बताया कि यह चरण एक वर्ष के भीतर पूरा कर लिया जाएगा. हालांकि यहां ये ध्यान देने वाली बात है कि ये गणना केवल गैर-वन क्षेत्रों तक ही सीमित रहेगी.
सरकार द्वारा कराई जाने वाली गणना के अभाव में पिछले कुछ सालों में दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में नागरिकों की पहल पर पेड़ों की कई स्थानीय जनगणनाएं की गई हैं. साल 2011 में दक्षिण दिल्ली के सर्वोदय एन्क्लेव में नागरिकों की पहल पर पेड़ों का एक सर्वे किया गया था. पेड़ों के लिए काम करने वाली कार्यकर्ता और वहीं की रहने वाली पद्मावती द्विवेदी की अगुवाई में और इलाके के 20 अन्य स्वयंसेवकों की मदद से इस जनगणना को पूरा होने में एक साल का समय लगा.
इस समूह ने कुल 1,112 पेड़ों की गिनती की, जिसमें से उन्होंने पाया कि 394 पेड़ एक तरफ झुके हुए थे, 75 पेड़ों को ‘ट्री गार्ड’ या कीलों से जकड़ दिया गया था, 293 (यानी 41%) पेड़ों के तने के चारों ओर कंक्रीट जमा होने के कारण उनका दम घुट रहा था, और सिर्फ 172 पेड़ों के चारों ओर दो फ़ीट की जगह में मिट्टी मौजूद थी.
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