<
Categories: मनोरंजन

राज कपूर से ‘नफरत’ 38 साल कमरे में गुजारे, भारत की सबसे खूबसूरत एक्ट्रेस ने ऐसा क्यों किया

Suchitra Sen Controversy: एक्ट्रेस सुचित्रा सने ने हिंदी सिनेमा के महान शो-मैन राज कपूर संग काम करने से इन्कार कर दिया था. फिर ऐसी 'आंधी' आई कि जिंदगी का दुखद अंत हो गया. 38 साल तक पब्लिक को चेहरा तक नहीं दिखाया.

Suchitra Sen Controversy: बड़ी और मोहक आंखों को देखने के बाद दर्शक सुचित्रा सेन का खूबसूरत चेहरा देखते तो दीवाने हो जाते थे. आंखों में नमी के साथ जब वह लरजती आवाज में डायलॉग बोलती थीं तो दर्शक एक टक उन्हें देखने को मजबूर हो जाता और नजरें हटना करीब-करीब असंभव. यह एक जादू था जो सुचित्रा सेन आसानी से कर लेती थीं. बंगला भाषा में अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाने वालीं सुचित्रा सेन ने वर्ष 1965 में हिंदी फिल्मों में पदार्पण किया.  वर्ष 1955 में आई फिल्म ‘देवदास’ में उन्होंने पारो का रोल इतनी शिद्दत से निभाया कि दूसरी अभिनेत्री उनके कद तक नहीं पहुंच पाई. 11 साल बाद 1966 में उन्होंने ‘ममता’ और फिर 11 वर्ष बाद ही 1974 संजीव कुमार के साथ’आंधी’ फिल्म में कमाल कर दिया. राजनीतिक विषय पर बनी यह फिल्म जितनी अच्छी थी उतनी ही विवादित थी. खैर, सुचित्रा सेन की ज्यादातर हिंदी फिल्में सुपर हिट साबित हुईं.

एक समय ऐसा आया कि जब अपने अभिनय के दम पर एक्ट्रेस किसी बड़े हीरो से भी ज्यादा फीस लेने लगीं. वह अपनी शर्तों पर काम करने वाली एक्ट्रेस बन गईं. यहां तक उन्होंने बड़े-बड़े हीरो और फिल्म निर्देशकों की फिल्मों को ठुकराना शुरू कर दिया. सुचित्रा सेन ने तो बॉलीवुड के पहले शोमैन राज कपूर के साथ फिल्में करने से साफ मना किया. एक्ट्रेस को उनका गुलदस्ता देने का अंदाज पसंद नहीं आया. उन्होंने राजकपूर के साथ कोई फिल्म नहीं की. इस स्टोरी में हम बात करेंगे एक्ट्रेस सुचित्रा सेन की निजी जिंदगी, फिल्मी करियर, परिवार-बच्चे और विवाद के बारे में. 

अपनी आंखों से देखा था बंगाल का बंटवारा

6 अप्रैल, 1931 को सुचित्रा सेन का जन्म सिराजगंज ज़िले के भंगा बारी गांव में हुआ. यह बंगाल (अब बांग्लादेश में) है. बंटवारे के बाद परिवार पश्चिम बंगाल आ गया. करुणमय दासगुप्ता (पिता) और इंदिरा देवी (मां) ने नाम रखा रोमा दासगुप्ता. बहुत कम लोग जानते होंगे कि सुचित्रा सेन दरअसल, मशहूर बंगाली कवि रजनीकांत सेन की पोती थीं. सुचित्रा ने अपनी शुरुआती पढ़ाई पाबना गवर्नमेंट गर्ल्स हाई स्कूल से पूरी की. इसके बाद बंगाल का बंटवारा हुआ तो सुचित्रा का परिवार पश्चिम बंगाल आ गया. इस दौरान सुचित्रा की उम्र 15 साल के आसपास थी. उन्होंने बंटवारा अपनी आंखों से देखा. यह दौर परिवार के लिए भी मुश्किल था. इस दौर और उम्र में सुचित्रा ने अपने करियर के बारे में कुछ भी तय नहीं किया था. एक साल बाद यानी 16 वर्ष की उम्र में उन्होंने देबनाथ सेन से शादी कर ली. देबनाथ सेन पश्चिम बंगाल के उद्योगपति  आदिनाथ सेन के बेटे थे. वर्ष 1947 में शादी हुई ओर 7 साल बाद 28 मार्च, 1954 को उनके पहले बच्चे का जन्म हुआ. 

पति ने पहचानी सुचित्रा की प्रतिभा

सुचित्रा ने सिर्फ 16 साल की उम्र में दिबानाथ सेन से शादी की. दिबानाथ सेन और सुचित्रा सेन की शादीशुदा जिंदगी बहुत ही अच्छी चल रही थी. इस बीच पति दिबानाथ सेन को पत्नी की एक्टिंग प्रतिभा के बारे में पता चला. बताया जाता है कि वह पत्नी से बहुत प्यार करते थे. जब पत्नी की प्रतिभा के बारे में पता चला तो  वह बहुत खुश हुए. इसके बाद उन्होंने सुचित्रा को फ़िल्मों में काम करने के लिए कहा. कोलकाता (तब कलकत्ता) में  दिबानाथ सेन का अच्छा खासा रुतबा था. हर पेशे से जुड़े प्रतिष्ठित लोगों का परिवार में आना-जाना भी था.  पति दिबानाथ सेन फ़िल्ममेकर बिमल रॉय के भी संपर्क में थे. बतौर निर्माता बिमल रॉय जब दिबानाथ की पत्नी सुचित्रा से मिले तो बहुत प्रभावित हुए. बिमल दा ने तुरंत उस दौर के मशहूर निर्देशक सुकुमार दासगुप्ता से संपर्क किया. इसके बाद वर्ष 1953 में सुचिता की बांग्ला फिल्म इंडस्ट्री में एंट्री हो गई. यह फ़िल्म थी ‘सात नंबर कैदी’. इस फिल्म से बंगाली सिनेमा में सुचित्रा लॉन्च हुईं. फिल्म अच्छी खासी चली. इसके साथ ही बांग्ला सिनेमा को एक नया और कामयाब चेहरा मिल गया.

कभी नहीं ली एक्टिंग की ट्रेनिंग

क्रिटिक्स की मानें तो सुचित्रा अपनी बड़ी-बड़ी मोहक आंखों और लरजती आवाज से दर्शकों को प्रभावित करती थीं. सुचित्रा सेन की मुस्कान में भी एक दर्द था, जो ‘देवदास’ ‘ममता’ और ‘आंधी’ में नजर आता है. ये तीनों फिल्में ट्रैजिडी से भरपूर हैं. इन तीनों ही फिल्मों में सुचित्रा ने ऐसी महिला/युवती की भूमिका निभाई है, जो प्यार से महरूम रह जाती है.  वह अविश्वसनीय रूप से सुंदर और शालीन भी थीं. एक्टिंग में कोई औपचारिक ट्रेनिंग न मिलने के बावजूद सुचित्रा सेन कैसे बांग्ला ही नहीं बल्कि भारतीय सिनेमा के इतिहास की महानतम अभिनेत्रियों में से एक बन गईं, क्रिटिक्स के लिए आज भी ताज्जुब की बात है. 

आंखों से करती थीं अभिनय

क्रिटिक्स भी मानते हैं कि सुचित्रा सेन जो काम आंखों, चेहरों और गहरी मुस्कान के साथ लंबी सांसों से कर जाती थीं वह एक पेज के डायलॉग भी नहीं कर पाते हैं. उनका अभिनय भी एक रहस्य बना हुआ है. सुचित्रा सेन के दौर में कई और खूबसूरती अभिनेत्रियां आईं और उन्होंने अच्छा काम भी किया. हैरत है कि प्रतिभा की बराबरी करने वाले कलाकार उनकी ‘स्टार’ शख्सियत के करीब भी नहीं पहुंच पाए. उनकी प्रतिभा थी कि उन्होंने हिंदी की जिन फिल्मों में काम किया करीब-करीब सारी कामयाब रहीं. सुचित्रा सेन ने पहले बंगाली सिनेमा में अपनी छाप छोड़ी फिर  ‘देवदास’ फिल्म से बॉलीवुड अपने अभिनय की शुरुआत की.  ‘आंधी’, ‘खामोशी’, ‘ममता’ ‘मुसाफ़िर’, ‘बंबई का बाबू’ और कई अन्य जैसी कई मशहूर फ़िल्मों में काम किया.  इंडियन सिनेमा में ज़बरदस्त योगदान के लिए सुचित्रा सेन को 1972 में प्रतिष्ठित ‘पद्म श्री’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

नहीं भाया राज कपूर का अंदाज

सुचित्रा सेन की खूबसूरती और एक्टिंग के कायल शो मैन राज कपूर भी थे. राज कपूर खुद उन्हें अपनी फिल्म में लेने के लिए उनके पास गए थे, लेकिन सुचित्रा ने उनके साथ काम करने से साफतौर पर इन्कार कर दिया था. इसका खुलासा भी खुद एक्ट्रेस ने अपने एक इंटरव्यू में किया. सुचित्रा ने दिल से स्वीकार किया था कि एक्टर राज कपूर उन्हें अच्छे नहीं लगते थे. इसका जिक्र अमिताभ चौधरी की किताब ‘आमार बंधु सुचित्रा सेन’ में भी है.

राज कपूर के साथ फिल्म करने से इन्कार

पुस्तक के मुताबिक, एक्ट्रेस सुचित्रा का मानना है कि वह पुरुष की हैंडसमनेस नहीं बल्कि उनकी इंटेलिजेंसी और गहरी सोच-समझ को प्राथमिकता देती हैं. एक्ट्रेस की मानें तो फिल्म में लीड  रोल का ऑफर लेकर राज कपूर एक दिन सुचित्रा सेन के  घर आए. सुचित्रा चेयर पर बैठी थीं और राज कपूर आकर पैरों में बैठ गए. इसके साथ ही उन्होंने सुचित्रा को गुलाब का गुलदस्ता दिया. इसके बाद सुचित्रा ने आवभगत तो की, लेकिन राज कपूर के साथ काम करने से इन्कार कर दिया. 

किसने दिया सुचित्रा नाम

बहुत कम लोग जानते हैं कि सुचित्रा सेन फिल्म नाम है. उनका असली नाम-रोमा दासगुप्ता है. पूरा किस्सा यह है कि सुचित्रा सेन ने अपनी पहली फ़िल्म’सात नंबर कैदी’ की थी. इसमें उनके अपोजिट समर रॉय थे. निर्देशक थे सुकुमार दासगुप्ता. ‘द टाइम्स ऑफ़ इंडिया’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, शूटिंग के दौरान निर्देशक सुकुमार के असिस्टेंट्स ने इस युवा अभिनेत्री को उनका मशहूर स्क्रीन नाम ‘सुचित्रा’ दिया. इस दौरान सुचित्रा 22 साल की थी. 

क्यों ठुकराया था ऑफर?

एक्ट्रेस ने इस बात का खुलासा अपने एक इंटरव्यू में किया था. उन्होंने कहा था कि उन्हें राज कपूर अच्छे नहीं लगते थे. यह बात वह अमिताभ चौधरी की किताब ‘आमार बंधु सुचित्रा सेन’  में बोल चुकी हैं. इस किताब के मुताबिक, सुचित्रा का मानना है कि वह पुरुष की हैंडसमनेस नहीं बल्कि उनकी इंटेलिजेंसी और गहरी सोच-समझ को तवज्जो देती थीं. यही कारण है कि उन्होंने राज कपूर की फिल्म का ऑफर तुरंत ठुकरा दिया था. एक्ट्रेस ने बताया था, ‘एक दिन राज कपूर मेरे घर आए थे, वह मुझे अपनी फिल्म में लीड एक्ट्रेस लेना चाहते थे, जैसी ही मैं चेयर पर बैठी वो मेरे पैरों में आकर बैठ गये और फिर गुलाब का गुलदस्ता दिया और कहा मेरी फिल्म में काम कीजिए, मैंने मना कर दिया, क्योंकि मुझे उनका व्यवहार ठीक नहीं लगा’.

‘प्रणय पाशा’ हुई फ्लॉप तो टूट गईं सुचित्रा

नवंबर 1969 में पति दिबानाथ सेन की अमेरिका में एक कार दुर्घटना में मौत हो गई, यह सुचित्रा सेन के लिए सदमे की तरह था. वह महीनों तक इस दर्द के साथ खामोश रहीं. आखिरकार उन्होंने सिनेमा में वापसी तो की, लेकिन  वह जादू नहीं रहा जो पूर्व में था. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पति दिबानाथ के निधन के बाद सुचित्रा सेन ने करीब एक दर्जन फ़िल्मों में अभिनय किया. कलाकार इस बात से अनजान होता है या फिर वह इस सच को देखना-समझना ही नहीं चाहता है कि वह उस जादू कम या खत्म हो रहा है.  वर्ष 1978 में सुचित्रा सेन की आखिरी फ़िल्म ‘प्रणय पाशा’ आई.

फिल्म बुरी तरह से फ्लॉप हुई. एक ओर पति की मौत का ग़म था तो दूसरी ओर फ्लॉप फिल्म का सदमा, सुचित्रा सेन एक झटके में ग्लैमर और चकाचौंध की दुनिया से दूर हो गईं. उन्होंने अभिनय से दूरी बना ली.  कहा तो यह भी जाता है कि सुचित्रा सेन 1963 में पति दिबानाथ सेन से अलग हो गई थीं.  अमेरिका ने हादसे में वर्ष 1970 में उनकी मौत हो गई. उस समय उनकी बेटी मुन मुन सेन सिर्फ 16 साल की थी. एक दौर ऐसा आया जब  सुचित्रा 1978 से अकेले रहने लगीं. फिल्मों से दूरी बनाने के बाद सुचित्रा कभी स्पॉट नहीं होती थी.

JP YADAV

जेपी यादव डेढ़ दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. वह प्रिंट और डिजिटल मीडिया, दोनों में समान रूप से पकड़ रखते हैं. मनोरंजन, साहित्य और राजनीति से संबंधित मुद्दों पर कलम अधिक चलती है. अमर उजाला, दैनिक जागरण, दैनिक हिंदुस्तान, लाइव टाइम्स, ज़ी न्यूज और भारत 24 जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं.कई बाल कहानियां भी विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हैं. सामाजिक मुद्दों पर 'रेडी स्टडी गो' नाटक हाल ही में प्रकाशित हुआ है. टीवी और थिएटर के प्रति गहरी रुचि रखते हुए जेपी यादव ने दूरदर्शन पर प्रसारित धारावाहिक 'गागर में सागर' और 'जज्बा' में सहायक लेखक के तौर पर योगदान दिया है. इसके अलावा, उन्होंने शॉर्ट फिल्म 'चिराग' में अभिनय भी किया है. वर्तमान में indianews.in में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत हैं.

Recent Posts

अगर साथ जी नहीं सकते तो… मांग में सिंदुर भर प्रेमी जोड़े ने खाया जहर; वीडियो बना मां को भेजा

Bhagalpur Couple Suicide Case: भागलपुर में एक प्रेमी जोड़े ने लव मैरिज कर जहर खा…

Last Updated: May 16, 2026 23:08:25 IST

Maruti Breeza vs Toyota Hyryder: लेना चाहते हैं बड़े साइज की Compact SUV? क्या है वेल्यू फॉर मनी

परफॉर्मेंस, फीचर्स, बजट में फिट बैठने के साथ ही यह दोनों कारें लुक्स में भी…

Last Updated: May 16, 2026 22:14:46 IST

Honor 400 vs Oppo Find X9 Ultra: फीचर्स से लेकर बैटरी तक क्या है अंतर? कौन सा फोन ज्यादा किफायती

कुछ ही हजार की कीमत में आप एक अच्छा स्मार्टफोन ले सकते है, जो वास्तव…

Last Updated: May 16, 2026 22:12:26 IST

Silver Import Rules Change: सोने के बाद अब चांदी को लेकर सरकार ने बदल दिया नियम, जानें क्या पड़ेगा असर

Silver Import Rules Change: चांदी के व्यापार पर बड़ा फैसला लेते हुए केंद्र सरकार ने…

Last Updated: May 16, 2026 21:29:03 IST

दरवाजे के पीछे भूलकर भी न रखें ये 5 चीजें,  छोटी आदतें बन सकती हैं आर्थिक और मानसिक तनाव की वजह

Vastu Tips: वास्तु शास्त्र में घर के हर हिस्से को खास महत्व दिया गया है.…

Last Updated: May 16, 2026 20:36:07 IST

आंध्र प्रदेश के सीएम ने आखिर क्यों कि ज्यादा बच्चे करने की मांग? वजह जान चौंक जाएंगे

Andhra Pradesh Population Scheme: आंध्र प्रदेश के सीएम एन. चंद्रबाबू नायडू ने शनिवार को श्रीकाकुलम…

Last Updated: May 16, 2026 20:24:34 IST