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Annual Delhi Health Report: दिल्ली का दिल हो रहा कमजोर, किस बीमारी से सबसे ज्यादा मर रहे दिल्ली के लोग?

Annual Delhi Health Report: दिल्ली सरकार की ओर से जारी आधिकारिक डेटा के अनुसार, राजधानी में सांस से संबंधित बीमारियों से होने वाली मौतों की संख्या बढ़ती जा रही है.

Written By: Pushpendra Trivedi
Last Updated: January 16, 2026 07:50:44 IST

Annual Delhi Health Report: दिल्ली सरकार की ओर से जारी आधिकारिक डेटा के अनुसार, राजधानी में सांस से संबंधित बीमारियों से होने वाली मौतों की संख्या बढ़ती जा रही है. साल 2024 के डेटा पर नजर डालें तो दिल्ली में सांस से जुड़ी  बीमारियों से 9,211 मौतें दर्ज की गईं, जो 2023 में 8,801 थीं. मतलब बीते कुछ सालों में ही इन बीमारियों से मौतों में वृध्दि दर्ज की गई, जो एक गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है. 

सांस से जुड़ी बीमारियों के सामान्य तौर पर अस्थमा, निमोनिया, फेफड़ों का कैंसर और तपेदिक हैं. इन बीमारियों में अक्सर सांस लेने में तकलीफ होती है. साल 2024 में मौत की सबसे बड़ी वजह हार्ट और ब्लड सर्कुलेशन से जुड़ी बीमारियां थीं. इसके बाद संक्रामक और परजीवी रोग थे. साल 2005 से 2024 के बीच राजधानी में कुल 3,29,857 लोगों की मौत हार्ट अटैक और हार्ट से जुड़ी बीमारियों के कारण हुईं. दूसरी तरफ दिल्ली में निमोनिया भी तेजी से बढ़ रहा है. यह बच्चों और बुजुर्गों के लिए बहुत खतरनाक होता है. 

शिशु मृत्यु दर में हुआ मामूली सुधार

दिल्ली में कुल मौतों के आंकड़े 2024 में बढ़कर 1,39,480 हो गए. जबकि, यह संख्या बीते साल 1,32,391 रही. इनमें से 85,391 पुरुष, 54,051 महिलाएं और 38 अन्य जेंडर के लोग शामिल थे. इनमें से 90,883 मौतों को चिकित्सकीय तौर पर प्रूफ किया गया था. राजधानी में शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) में मामूली सुधार हुआ है, जो प्रति 1000 जीवित जन्मों पर 22.4 दर्ज की गई. जबकि, 2023 में यह 23.61 फीसदी थी. IMR सालभर से छोटे उम्र के शिशुओं की मृत्यु का माप होता है.

दिल की बीमारियों से हुई ज्यादा मौतें

ताजा आंकड़ों पर नजर डालें तो दिल्ली दिल के रोग से पीड़ित हो रही है. दिल्ली में 21,262 मौतें रक्त संचार संबंधी बीमारियों की वजह से हुईं. इनमें आम तौर पर आर्टरी ब्लॉकेज होना, स्ट्रोक और हार्ट अटैक को ज्यादातर पाया गया. साल 2023 में यह संख्या 15,714 थी. राजधानी में मृत्यु का दूसरा सबसे आम कारण 16,060 संक्रामक और परजीवी रोग थे, जो आमतौर पर बैक्टीरिया, वायरस और फंगस की वजह से फैलते हैं. यह अक्सर दूषित भोजन और पानी के माध्यम से फैलते हैं. इस प्रकार की मौतों में पिछले साल दर्ज की गई 20,781 की तुलना में कमी देखने को मिली.

99.1 प्रतिशत लोगों के पास जन्म प्रमाण पत्र

डॉक्यूमेंट में यह भी बताया गया है कि 2024 में शहर में कुल 3,06,459 जीवित जन्म दर्ज किए गए, जो पिछले साल की तुलना में 8,628 कम थे. आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में जन्म दर 14 दर्ज की गई, जो 2023 के 14.66 से कम है. जबकि, मृत्यु दर 2023 के 6.16 से बढ़कर 2024 में 6.37 हो गई है. बता दें के बर्थ एंड डेथ रेट की कैलकुलेशन किसी स्थान के प्रति 1,000 व्यक्तियों पर तय होती है. अनुमान है कि अगले 10 सालों में 2036 तक दिल्ली की जनसंख्या बढ़कर 2.65 करोड़ हो सकती है. आंकड़ों के मुताबिक, पांच साल से कम उम्र के 99.1 फीसदी लोगों के पास बर्थ सर्टिफिकेट हैं.

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Annual Delhi Health Report: दिल्ली का दिल हो रहा कमजोर, किस बीमारी से सबसे ज्यादा मर रहे दिल्ली के लोग?

Annual Delhi Health Report: दिल्ली सरकार की ओर से जारी आधिकारिक डेटा के अनुसार, राजधानी में सांस से संबंधित बीमारियों से होने वाली मौतों की संख्या बढ़ती जा रही है.

Written By: Pushpendra Trivedi
Last Updated: January 16, 2026 07:50:44 IST

Annual Delhi Health Report: दिल्ली सरकार की ओर से जारी आधिकारिक डेटा के अनुसार, राजधानी में सांस से संबंधित बीमारियों से होने वाली मौतों की संख्या बढ़ती जा रही है. साल 2024 के डेटा पर नजर डालें तो दिल्ली में सांस से जुड़ी  बीमारियों से 9,211 मौतें दर्ज की गईं, जो 2023 में 8,801 थीं. मतलब बीते कुछ सालों में ही इन बीमारियों से मौतों में वृध्दि दर्ज की गई, जो एक गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है. 

सांस से जुड़ी बीमारियों के सामान्य तौर पर अस्थमा, निमोनिया, फेफड़ों का कैंसर और तपेदिक हैं. इन बीमारियों में अक्सर सांस लेने में तकलीफ होती है. साल 2024 में मौत की सबसे बड़ी वजह हार्ट और ब्लड सर्कुलेशन से जुड़ी बीमारियां थीं. इसके बाद संक्रामक और परजीवी रोग थे. साल 2005 से 2024 के बीच राजधानी में कुल 3,29,857 लोगों की मौत हार्ट अटैक और हार्ट से जुड़ी बीमारियों के कारण हुईं. दूसरी तरफ दिल्ली में निमोनिया भी तेजी से बढ़ रहा है. यह बच्चों और बुजुर्गों के लिए बहुत खतरनाक होता है. 

शिशु मृत्यु दर में हुआ मामूली सुधार

दिल्ली में कुल मौतों के आंकड़े 2024 में बढ़कर 1,39,480 हो गए. जबकि, यह संख्या बीते साल 1,32,391 रही. इनमें से 85,391 पुरुष, 54,051 महिलाएं और 38 अन्य जेंडर के लोग शामिल थे. इनमें से 90,883 मौतों को चिकित्सकीय तौर पर प्रूफ किया गया था. राजधानी में शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) में मामूली सुधार हुआ है, जो प्रति 1000 जीवित जन्मों पर 22.4 दर्ज की गई. जबकि, 2023 में यह 23.61 फीसदी थी. IMR सालभर से छोटे उम्र के शिशुओं की मृत्यु का माप होता है.

दिल की बीमारियों से हुई ज्यादा मौतें

ताजा आंकड़ों पर नजर डालें तो दिल्ली दिल के रोग से पीड़ित हो रही है. दिल्ली में 21,262 मौतें रक्त संचार संबंधी बीमारियों की वजह से हुईं. इनमें आम तौर पर आर्टरी ब्लॉकेज होना, स्ट्रोक और हार्ट अटैक को ज्यादातर पाया गया. साल 2023 में यह संख्या 15,714 थी. राजधानी में मृत्यु का दूसरा सबसे आम कारण 16,060 संक्रामक और परजीवी रोग थे, जो आमतौर पर बैक्टीरिया, वायरस और फंगस की वजह से फैलते हैं. यह अक्सर दूषित भोजन और पानी के माध्यम से फैलते हैं. इस प्रकार की मौतों में पिछले साल दर्ज की गई 20,781 की तुलना में कमी देखने को मिली.

99.1 प्रतिशत लोगों के पास जन्म प्रमाण पत्र

डॉक्यूमेंट में यह भी बताया गया है कि 2024 में शहर में कुल 3,06,459 जीवित जन्म दर्ज किए गए, जो पिछले साल की तुलना में 8,628 कम थे. आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में जन्म दर 14 दर्ज की गई, जो 2023 के 14.66 से कम है. जबकि, मृत्यु दर 2023 के 6.16 से बढ़कर 2024 में 6.37 हो गई है. बता दें के बर्थ एंड डेथ रेट की कैलकुलेशन किसी स्थान के प्रति 1,000 व्यक्तियों पर तय होती है. अनुमान है कि अगले 10 सालों में 2036 तक दिल्ली की जनसंख्या बढ़कर 2.65 करोड़ हो सकती है. आंकड़ों के मुताबिक, पांच साल से कम उम्र के 99.1 फीसदी लोगों के पास बर्थ सर्टिफिकेट हैं.

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