Patiayala House Court: दिल्ली में जब दुनिया भर के दिग्गज ग्लोबल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) समिट में भविष्य की तकनीक पर चर्चा कर रहे थे, ठीक उसी वक्त वहां पर एक ऐसा मंजर दिखा जिसने सत्ता के गलियारों में हलचल मचा दी. इंडियन यूथ कांग्रेस के नेशनल प्रेसिडेंट उदय भानु चिब की अगुवाई में हुआ यह विरोध प्रदर्शन सिर्फ नारों तक सीमित नहीं था यह एक ऐसा ‘सिंबॉलिक वार’ था जिसने पुलिस और प्रशासन की नींद उड़ा दी. आइए जानते हैं उस विवादित प्रदर्शन की पूरी इनसाइड स्टोरी और उन 10 चेहरों के बारे में जिन्हें कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. दरअसल दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने इंडियन यूथ कांग्रेस के नेशनल प्रेसिडेंट उदय भानु चिब और उनके नौ साथियों को बड़ी राहत देते हुए जेल से रिहा करने का आदेश दिया है. इन एक्टिविस्ट को हाल ही में राजधानी में हुए AI समिट के दौरान हुए एक विवादित प्रोटेस्ट के बाद हिरासत में लिया गया था और वे अभी तिहाड़ जेल में बंद हैं.
क्या है पूरा मामला?
जब दिल्ली में ग्लोबल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समिट चल रहा था, तब यूथ कांग्रेस के एक्टिविस्ट ने बेरोज़गारी और युवाओं पर टेक्नोलॉजी में बदलाव के असर के खिलाफ प्रोटेस्ट शुरू किया। प्रोटेस्ट के दौरान, उदय भानु चिब की लीडरशिप में एक्टिविस्ट शर्टलेस हो गए और सरकार के खिलाफ नारे लगाए। पुलिस ने प्रोटेस्ट को सिक्योरिटी के लिए खतरा और नियमों का उल्लंघन बताते हुए चिब और दूसरे नेताओं को गिरफ्तार कर लिया. इन लोगों के लिए रिलीज़ वारंट (कृष्णा हरि, कुंदन यादव, नरसिम्हा यादव, अजय सिंह, सौरभ, अरबाज़ खान, अजय कुमार, विमल, राजा गुर्जर, जितेंद्र यादव)
पॉलिटिक्स और लीगल प्रोसेस का टकराव
यह मामला सिर्फ़ एक सिंपल प्रोटेस्ट के लिए अरेस्ट करने का नहीं है; इसके कई पॉलिटिकल मतलब भी हैं, यूथ कांग्रेस का ‘शर्टलेस’ प्रोटेस्ट बेरोज़गारी के मुद्दे को हाईलाइट करने के मकसद से एक सिंबॉलिक प्रोटेस्ट था. हालांकि, AI समिट जैसे इंटरनेशनल इवेंट के दौरान सिक्योरिटी घेरा तोड़ना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती थी. कोर्ट का रिलीज़ ऑर्डर बताता है कि प्रोटेस्ट के इस तरीके को लंबे समय तक सीरियस क्राइम की कैटेगरी में नहीं रखा जा सकता. उदय भानु चिब की अरेस्ट के बाद, कांग्रेस की टॉप लीडरशिप ने इसे डेमोक्रेसी पर हमला बताया था। जेल से उनकी रिहाई से बेशक यूथ कांग्रेस के वर्कर्स में नया जोश आएगा, जो आने वाले चुनावों और पॉलिटिकल कैंपेन के लिए बहुत ज़रूरी है. फैक्ट्स की जांच करने के बाद, पटियाला हाउस कोर्ट ने माना कि इन एक्टिविस्ट्स को और हिरासत में रखने की ज़रूरत नहीं है. इस ऑर्डर को शांतिपूर्ण (यहां तक कि हिंसक) प्रोटेस्ट के अधिकार को कानूनी सुरक्षा देने के तौर पर देखा जा रहा है.