NFPRC की कार्यशाला में सांसदों, विधायकों और नीति विशेषज्ञों ने जलवायु-अनुकूल कृषि, डिजिटल संचार और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण पर विचार साझा किए, ताकि जनहितकारी शासन को और प्रभावी बनाया जा सके.
विकसित भारत 2047 की दिशा में बड़ा कदम
Political News: देश में प्रभावी और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नेशन फर्स्ट पॉलिसी रिसर्च एंड चेंज फाउंडेशन (NFPRC) ने नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में सांसदों और विधायकों के लिए एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया. इस कार्यक्रम में लोकसभा, राज्यसभा और विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं के जनप्रतिनिधियों के साथ नीति विशेषज्ञों ने जलवायु-अनुकूल कृषि, फसल बीमा, सिंचाई, डिजिटल संचार और विधायी क्षमता निर्माण जैसे अहम विषयों पर विस्तृत चर्चा की.
कार्यशाला का उद्देश्य जनप्रतिनिधियों को ऐसा साझा मंच उपलब्ध कराना था, जहां वे विशेषज्ञों के साथ संवाद कर नीति निर्माण को अधिक प्रभावी, व्यावहारिक और जनहितकारी बनाने के उपायों पर विचार कर सकें.
कार्यक्रम में NFPRC Foundation के अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद तरुण चुघ ने संगठन की शोध-आधारित नीति संवाद और जनप्रतिनिधियों की क्षमता निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई. उन्होंने अपने संबोधन में फसल विविधीकरण, जल संरक्षण, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और फसल बीमा कवरेज को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया. साथ ही उन्होंने कहा कि डिजिटल मीडिया और आधुनिक संचार माध्यमों का प्रभावी उपयोग कर जनप्रतिनिधि सरकारी योजनाओं की जानकारी अधिक लोगों तक पहुंचा सकते हैं. उन्होंने विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए बेहतर संस्थागत समन्वय और जन-केंद्रित शासन व्यवस्था को जरूरी बताया.
कार्यशाला के एक महत्वपूर्ण सत्र में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के कृषि आयुक्त डॉ. प्रवीण कुमार सिंह और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के उप महानिदेशक डॉ. राजबीर सिंह ने जलवायु-अनुकूल कृषि मॉडल पर अपने विचार साझा किए. उन्होंने बताया कि बदलती जलवायु परिस्थितियों को देखते हुए मोटे अनाज, दलहन, तिलहन, बागवानी फसलों और जलवायु-अनुकूल किस्मों को बढ़ावा देना समय की जरूरत है.
साथ ही वर्षा जल संचयन, वाटरशेड विकास, खेत तालाब, भूजल पुनर्भरण, ड्रिप सिंचाई, स्प्रिंकलर सिस्टम और सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों के महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की गई. विशेषज्ञों ने कहा कि प्रभावी जल प्रबंधन से किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ कृषि को अधिक टिकाऊ बनाया जा सकता है.
ICRIER के विशिष्ट प्रोफेसर और नीति आयोग के पूर्व सदस्य प्रो. रमेश चंद ने कृषि क्षेत्र में तकनीक की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि भारत तेजी से Artificial Intelligence (AI), Internet of Things (IoT), ड्रोन तकनीक और डिजिटल सप्लाई चेन जैसी आधुनिक तकनीकों को कृषि से जोड़ रहा है. उनके अनुसार, पिछले एक दशक में तकनीकी नवाचारों और सरकारी योजनाओं के कारण भारतीय कृषि पहले की तुलना में अधिक मजबूत और जलवायु-अनुकूल बनी है.
उन्होंने यह भी बताया कि किसानों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने, बीमा दावों की प्रक्रिया आसान बनाने और कृषि उत्पादकता बढ़ाने में डिजिटल तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है.
कार्यशाला में संचार एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ अरुण यादव ने जनप्रतिनिधियों के लिए डिजिटल कम्युनिकेशन पर विशेष क्षमता निर्माण सत्र आयोजित किया. इस दौरान सोशल मीडिया एल्गोरिदम, प्लेटफॉर्म एनालिटिक्स, ऑडियंस विश्लेषण, कंटेंट रणनीति, तथ्य सत्यापन, साइबर सुरक्षा, डेटा गोपनीयता और AI आधारित संचार जैसे विषयों पर व्यावहारिक जानकारी दी गई. विशेषज्ञों ने बताया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग जनप्रतिनिधियों और नागरिकों के बीच संवाद को अधिक प्रभावी बना सकता है.
कार्यक्रम के समापन पर NFPRC के बोर्ड सदस्य डॉ. अभिनव प्रकाश ने सभी वक्ताओं और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि संगठन भविष्य में भी शोध-आधारित नीति संवाद, विधायी क्षमता निर्माण और जनहितकारी नीति निर्माण के लिए ऐसे कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा. कार्यशाला में शामिल जनप्रतिनिधियों ने भी माना कि निष्पक्ष, ज्ञान-आधारित और शोध-केंद्रित संवाद मंच नीति निर्माण को मजबूत बनाने और बेहतर शासन व्यवस्था स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
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