Supreme Court: किसी भी इंसान को खाना पकाने, सफाई और कपड़े धोने जैसे घरेलू कामों में अपनी पत्नी की बराबर मदद करनी चाहिए. आप किसी नौकरानी से नहीं बल्कि जीवन साथी से शादी की है. ये सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी है. पत्नी-पत्नी के बीच घर के कामकाज को लेकर हुई आपसी लड़ाई अदालत पहुंच गई.
सुप्रीम कोर्ट ने बीते शुक्रवार को कहा कि पति को खाना पकाने, सफाई करने और कपड़े धोने जैसी घरेलू जिम्मेदारियों में भाग लेना चाहिए. कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि विवाह एक साझेदारी है, न कि घरेलू नौकरों को काम पर रखना है. ये टिप्पणियां न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती देने वाले व्यक्ति द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के दौरान की है.
2017 में शादी 2019 से अलग
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान, आरोपी के वकील ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता सफल नहीं रही. उन्होंने आगे कहा कि दंपति ने मई 2017 में शादी की थी और 2019 से वे अलग रह रहे हैं.
अनुचित था महिला का व्यवहार
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, वकील ने कहा, “मैं (पुरुष) तलाक चाहता हूं. निचली अदालत ने क्रूरता के आधार पर तलाक मंजूर कर दिया है. जब न्यायाधीश ने कथित क्रूरता के बारे में सवाल किया तो उस व्यक्ति के वकील ने कहा कि महिला का व्यवहार अनुचित था और वह खाना नहीं बनाती थी.
पति कामों में बराबर हिस्सा लेना होगा
न्यायमूर्ति नाथ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि उच्च न्यायालय का यह कहना सही है कि यह क्रूरता का आधार नहीं हो सकता है. आपको इन सभी कामों में बराबर हिस्सा लेना होगा, खाना बनाना, सफाई करना, कपड़े धोना, सब कुछ. आज का समय अलग है.
आप किसी नौकरानी से शादी नहीं कर रहे
न्यायमूर्ति मेहता ने कहा है की, आप किसी नौकरानी से शादी नहीं कर रहे हैं. आप एक जीवन साथी से शादी कर रहे हैं. पीठ को बताया गया कि वे दोनों एक सरकारी स्कूल में काम करते थे. दोनों पक्षों को व्यक्तिगत रूप से बुलाएं. हम उनसे बात करना चाहेंगे. इसने मामले की अगली सुनवाई के लिए 27 अप्रैल की तारीख तय की गई है और दोनों पक्षों को इसके समक्ष उपस्थित रहने का अनुरोध किया गया है.