Delhi News: देश का दिल कही जाने वाली दिल्ली में आवो हवा ठीक नहीं है. पहले ही एयर क्वालिटी के मुद्दे ने लोगों के जेहन में गंभीर बीमारियों को लेकर चिंता बना रखी है. सेहत के बाद सुरक्षा ने भी गंभीर चिंता का विषय बना दिया है. दिल्ली रहने के लिए भी सुरक्षित नहीं है. खासकर, महिला और किशोरियों के गुमशुदगी के केस लोगों के मन में डर पैदा करते है. इन मामलों मे दिल्ली पुलिस का एक्शन कुछ हद तक तो राहत प्रदान करते हैं. हालांकि, आंकडों पर नजर डालें तो यह पर्याप्त मालूम नहीं पड़ते हैं.
दिल्ली पुलिस के आधिकारिक डेटा के मुताबिक, साल 2026 में 1 से 15 जनवरी के बीच कुल 807 लोग गायब हुए हैं. यह कोई छोटी बात नहीं है, जिसे नजरअंदाज कर दिया जाए. यह आंकड़े किसी को भी डरा सकते हैं. ऐसे में मानव तस्करी की डरावनी तस्वीर जेहन में आने लगती है. बता दें कि दिल्ली, नोएडा समेंत पूरे एनसीआर में देशभर से लोग जॉब या अन्य काम के सिलसिले में जाते हैं. यह शहर काफी व्यस्तता और दौड़भाग वाला है.
किशोरियों के मामले चिंता के विषय
दिल्ली पुलिस के आधिकारिक डेटा पर नजर डालें तो रोजाना एवरेज 54 लोगों के गायब होने वाले केस ने कई तरह के प्रश्न उठा दिए. दैनिक जागरण के डिजिटल विंग में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से 509 महिलाएं और लड़कियां थीं, जबकि 298 पुरुष. कुल लापता मामलों में नाबालिग 191 और वयस्क 616 थे. अगर आप इन डेटा पर नजर डालें तो यह दिल्ली में महिलाओं, खास तौर पर किशोरियों की सेफ्टी पर गंभीर सवाल खड़े करता है.
दिल्ली पुलिस को कुछ हद तक मिली सफलता
मामले को लेकर दिल्ली पुलिस भी अलर्ट है. जानकारी के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए 235 लोगों को ट्रेस किया, हालांकि, 572 लोग अभी भी गुमशुदगी की लिस्ट में हैं. इस केस में नाबालिगों में लड़कियों पर सबसे अधिक खतरा बताया गया है. बता दें कि 15 दिनों में औसतन रोजाना 13 बच्चों के गुमशुदा होने के केस मिले हैं. आकड़ों पर नजर डालें तो कुल 191 नाबालिगों में से 146 सिर्फ लड़कियां थीं.
- 12 से 18 साल तक के किशोर अधिक प्रभावित
- डेटा के मुताबिक, गायब होने के 169 केसेस में 138 टीनेज लड़कियां और 31 लड़के हैं.
- पुलिस ने इन गायब बच्चों में से 29 लड़कियां और 19 लड़कों को खोज निकाला है. लेकिन, 121 किशोर या टीनेज लड़के अभी भी गुम हैं.
- 8-12 साल तक की उम्र में 13 बच्चे गायब हैं. इनमें 8 लड़के और 5 लड़कियां शामिल हैं. वहीं, सिर्फ 3 लड़के अभी तक मिले हैं.
- 8 वर्ष से कम उम्र की बात करें तो 9 बच्चे गुम हैं. इनमें से 3 लड़के पुलिस ने खोज निकाले और 6 अभी भी लापता है.
वयस्कों में भी लेडीज की तादात ज्यादा
एक रिपोर्ट पर नजर डालें तो डेटा के मुताबिक, 616 वयस्क गायब लोगों में से 363 महिलाएं और 253 पुरुष हैं. जबकि, अभी तक पुलिस ने 90 पुरुष और 91 महिलाओं को रेस्क्यू किया है. वहीं, 435 अभी भी लापता की सूची में हैं.
डरावना है साल 2025 का डेटा
अगर साल 2025 की बात की जाए तो कुल 24,508 लोग गायब हुए हैं. इनमें महिलाओं की तादात 14,870 और पुरुष 9,638 थे. जबकि, इनमें से पुलिस ने 15,421 को खोज लिया. लेकिन 9,087 मामले अब भी सुलझ नहीं पाए हैं. साल 2016-2026 तक के पूरे एक दशक को देखें तो इसमें कुल 2,32,737 लोग गुमशुदा है. करीब 1.8 लाख लोगों को पुलिस ने ट्रेस किया. जबकि, तकरीबन 52,000 मामले अभी भी अनसुलझे हैं.
हर साल इतने लोग हो रहे लापता
आंकड़े भले ही हमें डराते हों लेकिन इसे स्वीकार करना पड़ेगा. डेटा के अनुसार, हर साल औसतन 5,000 से ज्यादा किशोर गायब होते हैं. इनमें से तकरीबन 3,500 किशोरियां शामिल हैं. जबकि, 2025 में 5,081 किशोर गुमशुदा हुए थे और लड़कियों की तादात 3,970 थी. इनमें से 1,013 लड़कियों के परिवार वाले अब भी उनकी राह तक रहे हैं. उन्हें उम्मीद है कि उनकी बेटी वापस जरूरी आ जाएगी. घर पर दस्तक देती हर आवाज में उन्हें अपने बच्चें नजर आते हैं. फिलहाल, गुम हुए बच्चों की तलाश में पुलिस जुटी हुई है.
नोट – हमारा मकसद आपको जानकारी प्रदान करना है. यह लेख विभिन्न स्त्रोंतो से लिया गया है, जिसमें डेटा के साथ जानकारी दी गई है.