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Uttam Nagar Update: ईद के मौके पर उत्तम नगर में हाई सिक्योरिटी अलर्ट, बिना ID और रिश्तेदारों की एंट्री बैन

Uttam Nagar Update: हस्तसाल गांव की तंग गलियां आमतौर पर नवरात्रि के भजनों और ईद की तैयारियों की मिली-जुली रौनक से गुलजार रहती हैं. लेकिन, इस बार एक अजीब सी खामोशी में डूबी हुई हैं. होली के दौरान 26 साल के तरुण बुटोलिया की पीट-पीटकर हत्या (लिंचिंग) के बाद यह घटना तब हुई जब उसके चचेरे भाई ने गलती से दूसरे समुदाय की एक महिला पर पानी डाल दिया था. दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के उत्तम नगर में स्थित यह इलाका एक 'हाई-सिक्योरिटी ज़ोन' में बदल गया है. दिल्ली पुलिस और CRPF के जवान, A ब्लॉक में तरुण के घर की ओर जाने वाली लगभग हर गली के प्रवेश और निकास द्वार पर तैनात हैं. सुरक्षा का यह घेरा B और C ब्लॉक तक भी फैला हुआ है.

Uttam Nagar Update: हस्तसाल गांव की तंग गलियां आमतौर पर नवरात्रि के भजनों और ईद की तैयारियों की मिली-जुली रौनक से गुलजार रहती हैं. लेकिन, इस बार एक अजीब सी खामोशी में डूबी हुई हैं. होली के दौरान 26 साल के तरुण बुटोलिया की पीट-पीटकर हत्या (लिंचिंग) के बाद यह घटना तब हुई जब उसके चचेरे भाई ने गलती से दूसरे समुदाय की एक महिला पर पानी डाल दिया था. दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के उत्तम नगर में स्थित यह इलाका एक ‘हाई-सिक्योरिटी ज़ोन’ में बदल गया है. दिल्ली पुलिस और CRPF के जवान, A ब्लॉक में तरुण के घर की ओर जाने वाली लगभग हर गली के प्रवेश और निकास द्वार पर तैनात हैं. सुरक्षा का यह घेरा B और C ब्लॉक तक भी फैला हुआ है.

बैरिकेड लगा दिए गए हैं और आने-जाने पर सख्त पाबंदी है. यहां तक कि उन तंग गलियों में भी जहां मुश्किल से बैरिकेड लगाने की जगह है. शुक्रवार को पुलिसकर्मी इलाके में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे हर व्यक्ति का पहचान पत्र (ID) और पता जांच रहे थे. केवल गांव के निवासियों को ही अंदर जाने की अनुमति दी जा रही थी, जबकि दूसरों को वापस लौटा दिया जा रहा था. गांव वालों ने बताया कि वाहनों की आवाजाही पर भी रोक लगा दी गई थी, जिससे उन्हें और भी ज़्यादा परेशानी हो रही थी.

प्रशासन ने कई CCTV कैमरे लगाए

सिर्फ़ उसी गली में जहां तरुण रहता था, वहां लगभग 8 से 10 कैमरे लगाए गए हैं और आस-पास के इलाकों में भी और कैमरे लगाए गए हैं. निगरानी का यह दायरा गांव की बाहरी सड़कों तक भी फैला हुआ है. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए अर्धसैनिक बलों की चार से पांच कंपनियाँ और दिल्ली पुलिस के लगभग 450 जवान तैनात किए गए हैं. घुड़सवार पुलिसकर्मियों की तैनाती के लिए भी अनुरोध भेजा गया है. पिछले सालों के मुकाबले इस बार का माहौल बिल्कुल अलग है. स्थानीय लोगों ने बताया कि आमतौर पर नवरात्रि के दौरान गलियों में टेंट लगाए जाते थे. महिलाएं दिन भर कीर्तन करती थीं और बच्चे मंजीरा व छोटे ढोल बजाने के लिए इकट्ठा होते थे. ईद का त्योहार भी शुरू होने वाला था इसलिए आमतौर पर यह इलाका काफी गुलजार रहता था. लेकिन इस साल हस्तसाल की सड़कें लगभग वीरान पड़ी हैं.

रिश्तेदारों को भी नहीं जाने दे रहे पुलिसकर्मी

एक निवासी ने कहा कि हम जश्न कैसे मना सकते हैं, जब वे हर किसी का पहचान पत्र जांच रहे हैं और हमारे रिश्तेदारों को भी इलाके में घुसने की इजाज़त नहीं दे रहे हैं? भारी सुरक्षा तैनाती के बावजूद अपराध स्थल के पास स्थित स्थानीय ईदगाह के पास तैनात CRPF जवानों से भरी दो बसें भी शामिल हैं. स्थानीय लोग इस बात पर जोर देते हैं कि उनके बीच आपसी भाईचारा अभी भी बरकरार है. जहां एक तरफ आरोपी के परिवार वाले घर छोड़कर भाग गए हैं और उनका घर खाली पड़ा है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय मुस्लिम परिवार इस बात पर अड़े हैं कि वे कहीं नहीं जाएंगे. हम यहाँ दशकों से साथ-साथ रह रहे हैं और सांप्रदायिक तनाव कभी कोई मुद्दा नहीं रहा. 30 साल के मोहम्मद हामिद ने कहा कि यह हत्या एक दुखद घटना है लेकिन बेवजह डर फैलाया जा रहा है. बाहरी लोग इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने और तनाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. 

डर फैलाना बंद करना चाहिए

शहीदा, तरुण के घर के सामने वाली गली में रहती हैं, ने कहा कि यहां कुछ परिवार उत्तर प्रदेश और राजस्थान से आए प्रवासी हैं, जो आमतौर पर ईद के मौके पर अपने गांव लौट जाते हैं. हम भी अक्सर आते-जाते रहते हैं। अब जब सुरक्षा इतनी कड़ी है, तो कई लोग कुछ समय के लिए यहां से चले गए हैं. सांप्रदायिक सौहार्द की इस भावना को उनके हिंदू पड़ोसियों ने भी दोहराया. सुनीता, जो तरुण के घर के पीछे वाली गली में रहती हैं, ने कहा कि ‘कंजक’—नवरात्रि के दौरान छोटी बच्चियों को भोजन कराने की एक परंपरा सबको साथ लेकर चलने वाली है.

जब हम छोटी बच्चियों को अपने घर भोजन के लिए बुलाते हैं, तो हम उनसे यह नहीं पूछते कि वे हिंदू हैं या मुसलमान. हर बच्ची एक ‘कन्या’ देवी होती है और हम उनके साथ पूरे सम्मान से पेश आते हैं. स्थानीय व्यापारी सांप्रदायिक पलायन की अफवाहों को दूर करने का प्रयास कर रहे हैं. 53 साल के महेश चंद, जो इस इलाके में करीब 50 सालों से राशन की दुकान चला रहे हैं, ने उन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें कहा जा रहा था कि कुछ परिवार यहां से भाग रहे हैं. पिछले तीन दिनों में कई मुसलमानों ने हमेशा की तरह मुझसे गेहूं और चावल खरीदा है. कोई भी परिवार यहां से नहीं जा रहा है. हमें डर फैलाना बंद करना होगा. 

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