सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि हरियाणा में बच्चों की सेहत को लेकर जो आंकड़े सामने आए हैं, वे अत्यंत गंभीर और चिंताजनक हैं। हजारों नन्हे जीवन आज पोषण की कमी और सरकारी उपेक्षा के कारण खतरे में हैं। ये स्थिति सरकार की नाकाम योजनाओं का ही परिणाम है।
India News (इंडिया न्यूज), MP Kumari Selja : सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि हरियाणा में बच्चों की सेहत को लेकर जो आंकड़े सामने आए हैं, वे अत्यंत गंभीर और चिंताजनक हैं। हजारों नन्हे जीवन आज पोषण की कमी और सरकारी उपेक्षा के कारण खतरे में हैं। ये स्थिति सरकार की नाकाम योजनाओं का ही परिणाम है। सरकार इस गंभीर स्थिति पर आत्ममंथन करने के बजाय केवल आंकड़ों को चमकाने और विज्ञापन में करोड़ों खर्च करने में व्यस्त है। कांग्रेस हर बच्चे के अधिकार, पोषण और स्वास्थ्य के लिए आवाज़ बुलंद करती रहेगी।
मीडिया को जारी बयान में सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि हरियाणा में खेल-खिलाड़ी और मजबूत कद-काठी को लेकर दूध दही का खाणा, यो मेरा हरियाणा कहावत काफी प्रसिद्ध है। वर्तमान में प्रदेश की नई पीढ़ी की स्थिति पर यह कहावत फिट नहीं बैठ रही है। राज्य में 25,962 आंगनवाड़ी केंद्र हैं, जिनमें 23,447 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और 21,127 आंगनवाड़ी सहायिका हैं। सुधार की दिशा में 149 प्रोजेक्ट भी चल रहे हैं। वहीं, कुल 19 लाख 85 हजार 134 बच्चे लाभार्थी है।
दूध उपहार योजना के तहत बच्चों (1-6 वर्ष) के साथ-साथ गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं को इंस्टेंट खीर, प्रोटीन मिल्क बार और स्किम्ड मिल्क पाउडर सहित विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराए जा रहे हैं। बावजूद इसके बच्चों का कुपोषण का शिकार होना गंभीर चिंता विषय है।
राज्य में 0 से 5 वर्ष तक की आयु के 23.41 प्रतिशत बच्चे बौनेपन का शिकार हैं। यह उत्तर भारत में सबसे अधिक है। इसके अतिरिक्त 7.85 प्रतिशत बच्चे कम वजन के हैं और 3.83 प्रतिशत बच्चे अत्यधिक कुपोषित हैं। यह स्थिति केवल सरकारी आंकड़ों की बात नहीं है, बल्कि हरियाणा के हजारों नन्हे जीवन आज पोषण की कमी और सरकारी उपेक्षा के कारण खतरे में हैं।
सांसद कुमारी सैलजा ने कहा है कि भाजपा सरकार द्वारा चलाई जा रही पोषण संबंधी योजनाएं जैसे अन्नपूर्णा योजना, पोषण मिशन और आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों को पोषण देने की व्यवस्था है। इनका जमीनी असर न के बराबर रह गया है। जिन बच्चों को इन योजनाओं से पोषण और सुरक्षा मिलनी चाहिए थी, वहीं आज सबसे ज्यादा कुपोषण झेल रहे हैं। यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि पोषण योजनाओं का बजट आखिर गया कहां?
चिंता की बात यह भी है कि सरकार इस गंभीर स्थिति पर आत्ममंथन करने के बजाय केवल आंकड़ों को चमकाने और विज्ञापन में करोड़ों खर्च करने में व्यस्त है। सच्चाई से मुँह मोड़ना, ज़मीनी स्थिति की अनदेखी करना और जिम्मेदारी से बचना अब भाजपा सरकार की कार्यशैली बन चुकी है। कुपोषण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर भी सरकार प्रवासी आबादी को दोष देकर खुद को बचाने का प्रयास कर रही है, जो अत्यंत निंदनीय है।
सांसद ने कहा है कि आज हरियाणा के ननिहाल मुख्यमंत्री से जवाब मांग रहे हैं। यह केवल एक स्वास्थ्य संकट नहीं है, बल्कि एक नीतिगत विफलता है, जो हमारे भविष्य को खोखला कर रही है। बच्चों का बचपन छिन जाना, समाज के भविष्य को छिनने के बराबर है। क्या यही है भाजपा का विकास मॉडलक्या सरकार बच्चों की जिंंदगी की कीमत पर अपनी नाकामी छिपाएगी? कांग्रेस पार्टी हरियाणा के प्रत्येक बच्चे के अधिकार, पोषण और स्वास्थ्य के लिए आवाज बुलंद करती रहेगी। हम सदन से लेकर सड़क तक यह सवाल पूछेंगे पोषण कहां गया, बचपन क्यों छिन गया?
सांसद कुमारी सैलजा ने कहा हैै कि बिहार में स्पेशल इंसेंटिव रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कुमारी सैलजा ने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया बगैर पारदर्शिता और जल्दबाजी में चलाई जा रही है, जिसका मकसद सीधे-सीधे भाजपा को लाभ पहुंचाना है। सांसद ने कहा कि जब संसद में केंद्र सरकार विपक्ष से टकरा रही है, उसी समय बिहार में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कुचला जा रहा है। चुनाव आयोग की निष्पक्षता सवालों के घेरे में है। क्या लोकतंत्र को सत्ता के हितों के लिए बलि चढ़ाया जा रहा है?
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